कहानी – स्वत्व-रक्षा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)
मीर दिलावर अली के पास एक बड़ी रास का कुम्मैत घोड़ा था। कहते तो वह यही थे कि मैंने अपनी जिन्दगी की आधी कमाई इस पर खर्च की है, पर वास्तव में उन्होंने इसे पलटन से सस्ते दामों मोल लिया …
मीर दिलावर अली के पास एक बड़ी रास का कुम्मैत घोड़ा था। कहते तो वह यही थे कि मैंने अपनी जिन्दगी की आधी कमाई इस पर खर्च की है, पर वास्तव में उन्होंने इसे पलटन से सस्ते दामों मोल लिया …
मियाँ आजाद शिकरम पर से उतरे, तो शहर को देख कर बाग-बाग हो गए। लखनऊ में घूमे तो बहुत थे, पर इस हिस्से की तरफ आने का कभी इत्तिफाक न हुआ था। सड़कें साफ, कूड़े-करकट से काम नहीं, गंदगी का …
पहिले कहौं हस्तिनी नारी । हस्ती कै परकीरति सारी॥ सिर औ पायँ सुभर गिउ छोटी । उर कै खीनि लंक कै मोटी॥ कुंभस्थल कुच मद उर माहीं । गयन गयंद ढाल जनु वाहीं॥ दिस्टि न आवै आपन पीऊ …