193 देशों की प्रतिबद्धता से तैयार, पर्यावरणीय उपक्रम को लागू करने में मदद कर रहा है “स्वयं बनें गोपाल” समूह

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 देशों द्वारा, पूरी पृथ्वी के पर्यावरण सरंक्षण के लिए ली गयी प्रतिबद्धता यानी “टेन वाई. एफ. पी.” (10YFP) को

वंदना

{निम्नलिखित 4 कवितायें मूर्धन्य लेखिका श्रीमती उषा त्रिपाठी जी द्वारा रचित हैं जिनकी कई पुस्तकें (जैसे- नागफनी, अँधा मोह, सिंदूरी बादल, सांध्य दीप, पिंजरे का पंक्षी, कल्पना आदि) प्रकाशित हो

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा, पूरे विश्व के पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण पर निगरानी रखने वाले उपक्रम का हिस्सा बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, जैसा की सभी को पता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ लगातार प्रयास कर रहा है पूरे विश्व के पारिस्थितिकी तंत्र का फिर से कायाकल्प

क्या योग की सफलता, पर्यावरण की सफलता पर निर्भर करती है

सर्वप्रथम सभी आदरणीय पाठकों को “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” (International Yoga Day) की हार्दिक शुभकामनाएं ! आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर, सभी लोग बातें कर रहें हैं योग, आसन, प्राणायाम आदि

विश्व पर्यावरण दिवस पर, जानिये स्वयं व समाज को भी जबरदस्त लाभान्वित कर सकने वाली आसान थ्योरी “चार बिना हार” को

जैसा कि हमने अपने इस पूर्व प्रकाशित आर्टिकल (कैसे यूरोपियन यूनियन द्वारा पोषित संस्था की रिपोर्ट में लिखा “स्वयं बनें गोपाल” समूह का नाम, माध्यम बना, बंजर जमीन में सब्जियाँ

कैसे यूरोपियन यूनियन द्वारा पोषित संस्था की रिपोर्ट में लिखा “स्वयं बनें गोपाल” समूह का नाम, माध्यम बना, बंजर जमीन में सब्जियाँ उगाने का

यह घटना हमारे एक आदरणीय पाठक के साथ हुई थी, जो कि उत्तर भारत के एक महानगर के एक पॉश कॉलोनी में रहते हैं और उन्होंने ही हमें इस घटना

56 कॉमनवेल्थ देशों के सेक्रेटरिएट और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा संचालित उपक्रम, में “पॉलिसी मेकर” (नीति निर्माता) का दायित्व मिला हमारे स्वयं सेवक को

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, जैसा की सभी को पता है कि, दुनिया के कई बड़े मुद्दों को हल करने के लिए , विश्व के 56 देशों की सरकारों

जानिये दुनिया की सबसे ताकतवर, इलाज की पद्धतियों के कुछ अनछुए पहलुओं बारे में

वैसे तो पूरी दुनिया की हर सभ्यता में, कई प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों से संबंधित अनगिनत जानकारियां मिलती हैं, लेकिन बार – बार तजवीज़ करने के बाद भी हमेशा यही निष्कर्ष

कोविड के बाद से अक्सर महसूस होने वाली बदबू, समाप्त हुई प्राणायाम करने से

यहाँ हम अनुभव साझा कर रहें हैं कुछ ऐसे सज्जनों का, जिन्हे कोविड की समाप्ति के बाद, ये विचित्र समस्या झेलनी पड़ती थी कि उन्हें अक्सर एक अजीब बदबू महसूस

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 193 देशों के साथ विमर्श से तैयार, “ए. आई. व डिजिटल टेक्नोलॉजी” के वैश्विक नियंत्रक समझौते के समर्थक समूह में शामिल हुआ “स्वयं बनें गोपाल”

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, पिछली सदी (यानी सन 1900) को परमाणु सदी माना जाता है क्योकि पिछली सदी की सबसे महत्वपूर्ण खोज, परमाणु सम्बंधित अविष्कारों को माना जाता

चंद शब्दों की आंधियों से …

लोग कहते हैं वक्त  बड़ा से बड़ा घाव भर देता है  लेकिन कुछ घाव ऐसे होते हैं  जो कभी नहीं भरते हैं  अपनों का स्नेह व सुरक्षा उस पर  एक

G7, G20, यूरोपियन यूनियन, अमेरिका – फ्रांस – जापान समेत कई देशों की सरकारों के साथ – साथ “स्वयं बनें गोपाल” समूह भी मेम्बर बना इस ग्लोबल पार्टनरशिप का

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, वास्तव में समुद्रों का सरंक्षण दुनिया की सबसे ज्वलंत समस्याओं में से एक है और पृथ्वी पर स्थित जीवों का जीवनचक्र सुगमता पूर्वक चलते

(भाग – 5) जब विनम्र स्वभाव ने जीवन रक्षा की (श्री कृष्ण चन्द्र पाण्डेय जी आत्मकथा)

आईये जानते हैं, रूद्र के अंश गृहस्थ अवतार के रूप में जन्म लेने वाले परम आदरणीय श्री कृष्ण चन्द्र पाण्डेय जी के जीवन में घटी एक ऐसी घटना के बारे

फ्रांस सरकार व संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आगामी उच्चस्तरीय सभा के एक्शन पैनल में मदद की “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, आश्चर्य की बात है कि आज भी बहुत से लोग एकदम अनजान है इस भयंकर खतरे के बारे में कि हमारी दुनिया के कई

आश्चर्यजनक सत्य घटना, जिसमें खतरनाक भूत प्रेत, वास्तुदोष, गरीबी, कर्जा आदि सब भाग खड़े हुए, सच्ची गौ सेवा करने से

यह बेहद आश्चर्यजनक घटना आज से लगभग 90 वर्ष पहले, भारत के पूर्वी बंगाल क्षेत्र (जो आज का बांग्ला देश है) में हुई थी ! यह घटना उस समय इतनी