कहानी – प्रणय-चिह्‍न (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

”क्या अब वे दिन लौट आवेंगे? वे आशाभरी सन्ध्यायें, वह उत्साह-भरा हृदय-जो किसी के संकेत पर शरीर से अलग होकर उछलने को प्रस्तुत हो जाता था-क्या हो गया?” ”जहाँ तक …

Read more

कहानी – मंदिर – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मातृ-प्रेम, तुझे धान्य है ! संसार में और जो कुछ है, मिथ्या है, निस्सार है। मातृ-प्रेम ही सत्य है, अक्षय है, अनश्वर है। तीन दिन से सुखिया के मुँह में …

Read more

कहानी – अघोरी का मोह (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

”आज तो भैया, मूँग की बरफी खाने को जी नहीं चाहता, यह साग तो बड़ा ही चटकीला है। मैं तो….” ”नहीं-नहीं जगन्नाथ, उसे दो बरफी तो जरूर ही दे दो।” …

Read more

कहानी – सती – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

दो शताब्दियों से अधिक बीत गये हैं; पर चिंतादेवी का नाम चला आता है। बुंदेलखंड के एक बीहड़ स्थान में आज भी मंगलवार को सहस्त्रों स्त्री-पुरुषचिंतादेवी की पूजा करने आते …

Read more

कहानी – रामलीला – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

इधर एक मुद्दत से रामलीला देखने नहीं गया। बंदरों के चेहरे लगाये, आधी टाँगों का पाजामा और काले रंग का ऊँचा कुरता पहने आदमियों को दौड़ते, हू-हू करते देख कर …

Read more

कहानी – अपराधी (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

वनस्थली के रंगीन संसार में अरुण किरणों ने इठलाते हुए पदार्पण किया और वे चमक उठीं, देखा तो कोमल किसलय और कुसुमों की पंखुरियाँ, बसन्त-पवन के पैरों के समान हिल …

Read more

कहानी – हिंसा परम धर्म – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

दुनिया में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो किसी के नौकर न होते हुए सबके नौकर होते हैं, जिन्हें कुछ अपना काम न होने पर भी सिर उठाने की फ़ुर्सत …

Read more

कहानी – इस्तीफा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

दफ्तर का बाबू एक बेजबान जीव है। मजदूरों को आँखें दिखाओ, तो वह त्योरियॉँ बदल कर खड़ा हो जायकाह। कुली को एक डाँट बताओं, तो सिर से बोझ फेंक कर …

Read more

हर दिन कितने खतरों और बीमारियो से बचा सकता है सही तरीके से पहना हुआ जनेऊ

जनेऊ एक ऐसा दिव्य धागा है जो विधि विधान से पहना जाय तो आपको कितनी किस्म की अनजान बाधाओं और रोगों से रोज रोज बचा लेता है | मल-मूत्र विसर्जन …

Read more

कहानी – रूप की छाया (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

काशी के घाटों की सौध-श्रेणी जाह्नवी के पश्चिम तट पर धवल शैलमाला-सी खड़ी है। उनके पीछे दिवाकर छिप चुके। सीढिय़ों पर विभिन्न वेष-भूषावाले भारत के प्रत्येक प्रान्त के लोग टहल …

Read more

कहानी – एक्ट्रेस – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

रंगमंच का परदा गिर गया। तारा देवी ने शकुंतला का पार्ट खेलकर दर्शकों को मुग्ध कर दिया था। जिस वक्त वह शकुंतला के रुप में राजा दुष्यंत के सम्मुख खड़ी …

Read more

कहानी – ब्रह्मर्षि (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

नवीन कोमल किसलयों से लदे वृक्षों से हरा-भरा तपोवन वास्तव में शान्ति-निकेतन का मनोहर आकार धारण किये हुए है, चञ्चल पवन कुसुमसौरभ से दिगन्त को परिपूर्ण कर रहा है; किन्तु, …

Read more

कहानी – अग्नि-समाधि – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

साधु-संतों के सत्संग से बुरे भी अच्छे हो जाते हैं, किन्तु पयाग का दुर्भाग्य था, कि उस पर सत्संग का उल्टा ही असर हुआ। उसे गाँजे, चरस और भंग का …

Read more

कहानी – पाप की पराजय (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

घने हरे कानन के हृदय में पहाड़ी नदी झिर-झिर करती बह रही है। गाँव से दूर, बन्दूक लिये हुए शिकारी के वेश में, घनश्याम दूर बैठा है। एक निरीह शशक …

Read more