लेख – कवि द्वारा वस्तुवर्णन- (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

वस्तु वर्णन-कौशल से कवि लोग इतिवृत्तात्मक अंशों को भी सरस बना सकते हैं। इस बात में हम संस्कृत के कवियों को अत्यंत निपुण पाते हैं। भाषा के कवियों में वह

कहानी – नरक का मार्ग – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

रात ‘भक्तमाल’ पढ़ते-पढ़ते न जाने कब नींद आ गयी। कैसे-कैसे महात्मा थे जिनके लिए भगवत्-प्रेम ही सबकुछ था, इसी में मग्न रहते थे। ऐसी भक्ति बड़ी तपस्या से मिलती है।

कहानी – शराब की दुकान – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कांग्रेस कमेटी में यह सवाल पेश था-शराब और ताड़ी की दूकानों पर कौन धरना देने जाय? कमेटी के पच्चीस मेम्बर सिर झुकाये बैठे थे; पर किसी के मुँह से बात

लेख – पात्र द्वारा भावव्यंजना – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

पात्र द्वारा जिन स्थायी भावों की प्रधानत: व्यंजना जायसी ने कराई है वे रति, शोक और युध्दोत्साह हैं। दो एक स्थानों पर क्रोध की भी व्यंजना है। भय का केवल

कहानी – जुलूस – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पूर्ण स्वराज्य का जुलूस निकल रहा था। कुछ युवक, कुछ बूढ़े, कुछ बालक झंडियाँ और झंडे लिये वंदेमातरम् गाते हुए माल के सामने से निकले। दोनों तरफ दर्शकों की दीवारें

कहानी – पत्‍नी से पति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मिस्टर सेठ को सभी हिन्दुस्तानी चीजों से नफरत थी और उनकी सुन्दरी पत्नी गोदावरी को सभी विदेशी चीजों से चिढ़! मगर धैर्य और विनय भारत की देवियों का आभूषण है।

लेख – भावना या कल्पना – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

आरंभ में ही हम काव्यानुशीलन को भावयोग कह आए हैं और उसे कर्मयोग और ज्ञानयोग के समकक्ष बता आए हैं। यहाँ पर अब यह कहने की आवश्यकता प्रतीत होती है

कहानी – मोटर के छींटे – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

क्या नाम कि… प्रात:काल स्नान-पूजा से निपट, तिलक लगा, पीताम्बर पहन, खड़ाऊँ पाँव में डाल, बगल में पत्रा दबा, हाथ में मोटा-सा शत्रु-मस्तक-भंजन ले एक जजमान के घर चला। विवाह

लेख – संबंधनिर्वाह – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

प्रबंधकाव्य में बड़ी भारी बात है संबंधनिर्वाह। माघ ने कहा है – बह्वपि स्वेच्छया कामं प्रकीर्णमभिधीयते।   अनुज्झितार्थसंबंधा: प्रबन्धो दुरुदाहर:॥   जायसी का संबंधनिर्वाह अच्छा है। एक प्रसंग से दूसरे

कहानी – जेल – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मृदुला मैजिस्ट्रेट के इजलास से ज़नाने जेल में वापस आयी, तो उसका मुख प्रसन्न था। बरी हो जाने की गुलाबी आशा उसके कपोलों पर चमक रही थी। उसे देखते ही

लेख – जायसी का रहस्यवाद – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

सूफियों के अद्वैतवाद का जो विचार पूर्वप्रकरण में हुआ था उससे यह स्पष्ट हो गया कि किस प्रकार आर्य जाति (भारतीय और यूनानी) के तत्त्वचिंतकों द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत को

कहानी – दुराशा (प्रहसन) – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पात्र दयाशंकर -कार्यालय के एक साधारण लेखक   आनंदमोहन -कालेज का एक विद्यार्थी तथा दयाशंकर का मित्र   ज्योतिस्वरूप -दयाशंकर का एक सुदूर-सम्बन्धी   सेवती -दयाशंकर की पत्नी   [होली

लेख – जायसी की भाषा – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

जायसी की भाषा ठेठ अवधी है और पूरबी हिंदी के अंतर्गत है। इससे उसमें ब्रजभाषा और खड़ी बोली दोनों से कई बातों में विभिन्नता है। जायसी को अच्छी तरह समझने

कहानी – मैकू – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कादिर और मैकू ताड़ीखाने के सामने पहुँचे, तो वहाँ कांग्रेस के वालंटियर झंडा लिये खड़े नजर आये। दरवाजे के इधर-उधर हजारों दर्शक खड़े थे। शाम का वक्त था। इस वक्त