कहानी – इंस्टालमेंट (लेखक – भगवतीचरण वर्मा)

चाय का प्याला मैंने होंठों से लगाया ही था कि मुझे मोटर का हार्न सुनाई पड़ा। बरामदे में निकल कर मैंने देखा, चौधरी विश्वम्भरसहाय अपनी नई शेवरले सिक्स पर बैठे

कहानी – मुगलों ने सल्तनत बख्श दी (लेखक – भगवतीचरण वर्मा)

हीरोजी को आप नहीं जानते, और यह दुर्भाग्‍य की बात है। इसका यह अर्थ नहीं कि केवल आपका दुर्भाग्‍य है, दुर्भाग्‍य हीरोजी का भी है। कारण, वह बड़ा सीधा-सादा है।

कहानी – वसीयत (लेखक – भगवतीचरण वर्मा)

जिस समय मैंने कमरे में प्रवेश किया, आचार्य चूड़ामणि मिश्र आंखें बंद किए हुए लेटे थे और उनके मुख पर एक तरह की ऐंठन थी, जो मेरे लिए नितांत परिचित-सी

कविता – कविता संग्रह (लेखक – भगवतीचरण वर्मा)

आज मानव का सुनहला प्रात है आज मानव का सुनहला प्रात है, आज विस्मृत का मृदुल आघात है; आज अलसित और मादकता-भरे, सुखद सपनों से शिथिल यह गात है; मानिनी

लेख – अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

संस्कृत से ग्रंथ को शुरू करने के लिए पाठकों को रोष नहीं होना चाहिए। आखिर हम शास्‍त्र लिखने जा रहे हैं, फिर शास्‍त्र की परिपाटी को तो मानना ही पड़ेगा।

लेख – घुमक्कड़ जातियों में पीछे आगे – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

दुनिया के सभी देशों और जातियों में जिस तरह घूमा जा सकता है, उसी तरह वन्‍य और घुमक्कड़ जातियों में नहीं घूमा जा सकता, इसीलिए यहाँ हमें ऐसे घुमक्कड़ों के

लेख – मृत्‍यु-दर्शन – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ की दुनिया में भय का नाम नहीं है, फिर मृत्‍यु की बात कहना यहाँ अप्रासंगिक-सा मालूम होगा। तो भी मृत्‍यु एक रहस्‍य है, घुमक्कड़ को उसके बारे में कुछ

लेख – जंजाल तोड़ो – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

दुनिया-भर के साधुओं-संन्‍यासियों ने ”गृहकारज नाना जंजाला” कह उसे तोड़कर बाहर आने की शिक्षा दी है। यदि घुमक्कड़ के लिए भी उसका तोड़ना आवश्‍यक है, तो यह न समझना चाहिए

लेख – स्‍त्री घुमक्कड़ – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़-धर्म सार्वदैशिक विश्‍वव्‍यापी घर्म है। इस पंथ में किसी के आने की मनादी नहीं है, इसलिए यदि देश की तरुणियाँ भी घुमक्कड़ बनने की इच्‍छा रखें, तो यह खुशी की

लेख – लेखनी और तूलिका – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

मानव-मस्तिष्‍क में जितनी बौद्धिक क्षमतायें होती है, उनके बारे में कितने ही लोग समझते हैं कि ”ध्‍यानावस्थित तद्गत मन” से वह खुल जाती हैं। किंतु बात ऐसी नहीं है। मनुष्‍य

लेख – विद्या और वय पीछे – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

यदि सारा भारत घर-बार छोड़कर घुमक्कड़ हो जाय, तो भी चिंता की बात नहीं है। लेकिन घुमकक्‍ड़ी एक सम्‍मानित नाम और पद है। उसमें, विशेषकर प्रथम श्रेणी के घुमक्कड़ों में

लेख – धर्म और घुमक्कड़ी – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

किसी-किसी पाठक को भ्रम हो सकता है, कि धर्म और आधुनिक घुमक्कड़ी में विरोध है। लेकिन धर्म से घुमक्कड़ी का विरोध कैसे हो सकता है, जबकि हम जानते हैं कि

लेख – निरुद्देश्‍य – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

निरुद्देश्‍य का अर्थ है उद्देश्‍यरहित, अर्थात् बिना प्रयोजन का। प्रयोजन बिना तो कोई मंदबुद्धि भी काम नहीं करता। इसलिए कोई समझदार घुमक्कड़ यदि निरुद्देश्‍य ही बीहड़पथ को पकड़े तो यह

लेख – स्वावलंबन – घुमक्कड़-शास्त्र – (लेखक – राहुल सांकृत्यायन)

घुमक्कड़ी का अंकुर किसी देश, जाति या वर्ग में सीमित नहीं रहता। धनाढ्य कुल में भी घुमक्कड़ पैदा हो सकता है, लेकिन तभी जब कि उस देश का जातीय जीवन