उपन्यास – अधखिला फूल – अध्याय 20 (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)
धीरे-धीरे रात बीती, भोर हुआ, बादलों में मुँह छिपाये हुए पूर्व ओर सूरज निकला-किरण फूटी। पर न तो सूरज ने अपना मुँह किसी को दिखलाया, न किरण धरती पर आयी। कल की बातें जान पड़ती हैं, इनको भी खल रही …