कविता – वैदेही-वनवास – मंगल यात्रा मत्तसमक (लेखक – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध)
अवध पुरी आज सज्जिता है। बनी हुई दिव्य-सुन्दरी है॥ विहँस रही है विकास पाकर। अटा अटा में छटा भरी है॥1॥ दमक रहा है नगर, नागरिक। प्रवाह में मोद के बहे हैं॥ गली-गली है गयी सँवारी। चमक रहे चारु चौरहे हैं॥2॥ …