गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 18 (बिछुड़े हुए बालक का पुनर्मिलन)

श्री जीवन लाल वर्मा, सरसई का कहना है यदि छोटे बालक, भावुक हृदय माता-पिता की आँखों के तारे होते हैं। जब पशु-पक्षी तक अपने बालकों को इतना प्यार करते हैं तो बुद्घिजीवी मनुष्यों में बढ़ी-चढ़ी ममता का होना स्वाभाविक ही …

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भूख बढाइये, दुबलापन भगाइए

गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के वजह से यदि पेट की अग्नि किसी कारण से मंद पड़ जाये तो appetite (भूख) लगनी बंद हो जाती है जिससे आदमी leanness or thinness (दुबलेपन) का शिकार हो सकता है। प्रस्तुत है पेट …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 17 (निराशा में आशा की किरण)

श्री अयोध्या प्रसाद दीक्षित, कानपुर से लिखते हैं कि मेरी धर्मपत्नी ने अपने विवाह से पूर्व हिन्दी मिडिल किया था। इस बात को एक लम्बी मुद्दत बीत गई। विवाह के उपरान्त वह घर गृहस्थी के कामों में लग गई। बच्चों …

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श्री कृष्ण कथायें

कैसे आये प्रभु 16 कलाओ के साथ – द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसो के अत्याचार बढने लगे पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी कथा सुनाने के लिए तथा उद्धार  के लिए ब्रह्मा जी के पास गई।  पृथ्वी पर …

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संस्मरण – जेल-जीवन की झलक (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

जेल जाने के पहले जेल के संबंध में हृदय में नाना प्रकार के विचार काम करते थे। जेल में क्‍या बीतती है, यह जानने के लिए बड़ी उत्‍सुकता थी। कई मित्रों से, जो इस यात्रा को कर चुके थे, बातें …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 16 (गायत्री के अनुग्रह का परिचय)

श्री अम्बाशंक गोविन्द जी व्यास, जूनागढ़ ने लिखा है कि परिस्थितियोंवश में स्कूली शिक्षा बहुत ही कम प्राप्त कर सका। कक्षा चार उत्तीर्ण करने के बाद रोटी कमाने की चिन्ता हुई और 12 रुपया मासिक की नौकरी पर लग गया। …

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श्री शिव कथायें

शक्तिपीठ कथा – दक्ष प्रजापति की कई पुत्रियां थी। सभी पुत्रियां गुणवती थीं। फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था। वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो, जो सर्व शक्ति-संपन्न हो एवं सर्व …

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कहानी – चित्रवाले पत्थर (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

मैं ‘संगमहाल’ का कर्मचारी था। उन दिनों मुझे विन्ध्य शैल-माला के एक उजाड़ स्थान में सरकारी काम से जाना पड़ा। भयानक वन-खण्ड के बीच, पहाड़ी से हटकर एक छोटी-सी डाक बँगलिया थी। मैं उसी में ठहरा था। वहीं की एक …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 15 (गायत्री द्वारा सुसंति की प्राप्ति)

पं. श्रीकृष्ण शुक्ल, देहली का कहा है कि गायत्री का आश्रय से मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है। कोई वस्तु नहीं जिसे गायत्री साधक प्राप्त न कर सके। अनुभवी लोगों ने ऐसा ही कहा है। उसकी पुष्टि में अनेक …

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पाण्डव कथायें

पांडवों वनवास कथा – बात पांडवों के वनवास की है। जुए में हारने के बाद पांडवों को बारह वर्ष का वनवास और एक साल का अज्ञातवास गुजारना था। वनवास के दौरान अर्जुन ने दानवों से युद्ध में देवताओं की मदद …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 14 (साधना के प्रारम्भिक अनुभव)

गिरीशदेव वर्मा, बहरायच, लिखते हैं कि जब मैं पांच वर्ष का था तभी पिता जी ने मुझे गायत्री शिक्षा देना आरम्भ कर दिया था। वे जब संध्या करते थे तो मुझे पास बिठा लेते थे। अयोध्या ले जाकर उन्होंने मुझे …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 13 (साधना के पथ पर)

पं. राधेमोहन मिश्र, वैघ बहरायच, लिखते हैं कि मेरी प्रकृति अपनी बाल्यावस्था से ही आध्यात्मवाद की ओर रही। मुझे ऐसे मित्र तथा मार्ग-प्रदर्शक मिलते गये जिनसे और सहायता मिलती गयी। घर में अपने वयोवृद्घों को गुरु मंत्र जपते देखा करता, …

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महाभारत कथायें

कर्ण कथा – महाभारत की शुरुआत में कर्ण के जन्म की कथा आती है। कर्ण की मां कुंती राजकुमारी थीं। एक दिन उनके राजमहल में महर्षि दुर्वासा आए। दुर्वासा अपने क्रोध और शापों के कारण बहुत चर्चित थे। हर राजा …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 12 (असाध्य बीमारियों से छुटकारा)

ठा. रामकरणसिंह वैद्य, जफरापुरा, लिखते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व मेरी स्त्री को संग्रहणी रोग हुआ था, बहुत चिकित्सा की पर कुछ लाभ न हुआ। दो वर्ष इस रोग से ग्रसित रहने के कारण उसका शरीर अस्थि पंजर हो गया …

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प्रचण्ड तेजस्वी सन्त – भाग 2

रामकृष्ण परमहंस – भारत के एक महान संत एवं विचारक थे। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति का जीवन बिताया। रामकृष्ण परमहंस …

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गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 11 (शत्रुओं का षडय़ंत्र विफल)

श्री गोकुलचन्द सक्सेना, खडग़पुर, लिखते हैं कि हमारे लोको दफ्तर के हैडक्लर्क और सुपरिटेण्डेण्ट से एक बार मेरी गरमा-गरम बहस हो गई। आपस में अशिष्ठ और अवांछनीय शब्दों का भी प्रयोग हो गया। उस समय तो दूसरे लोगों ने बीच-बचाव …

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