कहानी – आगा-पीछा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

रूप और यौवन के चंचल विलास के बाद कोकिला अब उस कलुषित जीवन के चिह्न को आँसुओं से धो रही थी। विगत जीवन की याद आते ही उसका दिल बेचैन हो जाता और वह विषाद और निराशा से विकल होकर …

Read more

कविताएँ – काम सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 “मधुमय वसंत जीवन-वन के,   बह अंतरिक्ष की लहरों में,   कब आये थे तुम चुपके से   रजनी के पिछले पहरों में?     क्या तुम्हें देखकर आते यों   मतवाली कोयल बोली थी?   उस नीरवता में …

Read more

कहानी – सत्याग्रह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

हिज एक्सेलेंसी वाइसराय बनारस आ रहे थे। सरकारी कर्मचारी, छोटे से बड़े तक, उनके स्वागत की तैयारियाँ कर रहे थे। इधर काँग्रेस ने शहर में हड़ताल मनाने की सूचना दे दी थी। इससे कर्मचारियों में बड़ी हलचल थी। एक ओर …

Read more

कविताएँ – रहस्य सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 उर्ध्व देश उस नील तमस में,   स्तब्ध हि रही अचल हिमानी,   पथ थककर हैं लीन चतुर्दिक,   देख रहा वह गिरि अभिमानी,     दोनों पथिक चले हैं कब से,   ऊँचे-ऊँचे चढते जाते,   श्रद्धा आगे …

Read more

कहानी – प्रेरणा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधामी कोई लड़का न था, बल्कि यों कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मुझे ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से साबका न पड़ा था। कपट-क्रीड़ा में उसकी जान बसती थी। अध्यापकों को बनाने …

Read more

कविताएँ – लज्जा सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 “कोमल किसलय के अंचल में   नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी,   गोधूली के धूमिल पट में   दीपक के स्वर में दिपती-सी।     मंजुल स्वप्नों की विस्मृति में   मन का उन्माद निखरता ज्यों-   सुरभित लहरों की …

Read more

कहानी – सद्गति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

दुखी चमार द्वार पर झाडू लगा रहा था और उसकी पत्नी झुरिया, घर को गोबर से लीप रही थी। दोनों अपने-अपने काम से फुर्सत पा चुके थे, तो चमारिन ने कहा, ‘तो जाके पंडित बाबा से कह आओ न। ऐसा …

Read more

कविताएँ – संघर्ष सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 श्रद्धा का था स्वप्न   किंतु वह सत्य बना था,   इड़ा संकुचित उधर   प्रजा में क्षोभ घना था।     भौतिक-विप्लव देख   विकल वे थे घबराये,   राज-शरण में त्राण प्राप्त   करने को आये।   …

Read more

कहानी – विनोद – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

विद्यालयों में विनोद की जितनी लीलाएँ होती रहती हैं, वे यदि एकत्र की जा सकें, तो मनोरंजन की बड़ी उत्तम सामग्री हाथ आये। वहाँ अधिकांश छात्र- जीवन की चिंताओं से मुक्त रहते हैं। कितने ही तो परीक्षाओं की चिंता से …

Read more

कहानी – बनजारा (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

धीरे-धीरे रात खिसक चली, प्रभात के फूलों के तारे चू पडऩा चाहते थे। विन्ध्य की शैलमाला में गिरि-पथ पर एक झुण्ड बैलों का बोझ लादे आता था। साथ के बनजारे उनके गले की घण्टियों के मधुर स्वर में अपने ग्रामगीतों …

Read more

कहानी – ढपोरसंख – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मुरादाबाद में मेरे एक पुराने मित्र हैं, जिन्हें दिल में तो मैं एक रत्न समझता हूँ पर पुकारता हूँ ढपोरसंख कहकर और वह बुरा भी नहीं मानते। ईश्वर ने उन्हें जितना ह्रदय दिया है, उसकी आधी बुद्धि दी होती, तो …

Read more

कहानी – प्रसाद (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

मधुप अभी किसलय-शय्या पर, मकरन्द-मदिरा पान किये सो रहे थे। सुन्दरी के मुख-मण्डल पर प्रस्वेद बिन्दु के समान फूलों के ओस अभी सूखने न पाये थे। अरुण की स्वर्ण-किरणों ने उन्हें गरमी न पहुँचायी थी। फूल कुछ खिल चुके थे! …

Read more

जब पूरा ब्रह्माण्ड नाच उठा

यही वो महान रात्रि है जब सबको बाँधने वाला खुद बंध गया, यही वो महान रात्रि है जब अंतहीन अबूझ पहेली ईश्वर एक बहुत सुन्दर रूप में हमें प्राप्त हुआ, आज मौका है जम कर उत्सव मनाने का, आज अवसर …

Read more

कहानी – तगादा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

सेठ चेतराम ने स्नान किया, शिवजी को जल चढ़ाया, दो दाने मिर्च चबाये, दो लोटे पानी पिया और सोटा लेकर तगादे पर चले। सेठजी की उम्र कोई पचास की थी। सिर के बाल झड़ गये थे और खोपड़ी ऐसी साफ-सुथरी …

Read more

कहानी – परिवर्तन (लेखक – जयशंकर प्रसाद)

चन्द्रदेव ने एक दिन इस जनाकीर्ण संसार में अपने को अकस्मात् ही समाज के लिए अत्यन्त आवश्यक मनुष्य समझ लिया और समाज भी उसकी आवश्यकता का अनुभव करने लगा। छोटे-से उपनगर में, प्रयाग विश्वविद्यालय से लौटकर, जब उसने अपनी ज्ञान-गरिमा …

Read more

कहानी – भूत – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मुरादाबाद के पंडित सीतानाथ चौबे गत 30 वर्षों से वहाँ के वकीलों के नेता हैं। उनके पिता उन्हें बाल्यावस्था में ही छोड़कर परलोक सिधारे थे। घर में कोई संपत्ति न थी। माता ने बड़े-बड़े कष्ट झेलकर उन्हें पाला और पढ़ाया। …

Read more