
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,
“मरीन प्रोटेक्टेड एरियाज डे” (Marine Protected Areas Day ; MPA Day) उपक्रम का उद्देश्य, पूरे विश्व में समुद्री संरक्षित क्षेत्रों (Marine Protected Areas) के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है ! वास्तव में ये ऐसे समुद्री क्षेत्र होते हैं, जहाँ पर्यावरण और जैव विविधता की विशेष सुरक्षा के लिए, सरकारों द्वारा कुछ गतिविधियों पर नियंत्रण किया जाता है !
चूंकि पूरी पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग महासागरों से ही ढका हुआ है, इसलिए इसे आसान भाषा में, पृथ्वी के पर्यावरण के सबसे बड़े नियंत्रक समुद्रों, के अस्तित्व की रक्षा के लिए समर्पित, अभियान कहा जा सकता है ! आईये सबसे पहले जानतें है कि आखिर क्यों समुद्रों को, पर्यावरण का लाइफ सपोर्ट सिस्टम (जीवन रक्षक प्रणाली) कहतें हैं-
वैश्विक तापमान का नियंत्रण- सूरज से आने वाली अतिरिक्त गर्मी (ऊष्मा) को, समुद्र अपने भीतर सोख लेते हैं ! समुद्र की विशाल धाराएं भूमध्य रेखा (Equator) के गर्म पानी को ध्रुवों (Poles) की ओर, और ध्रुवों के ठंडे पानी को गर्म इलाकों की ओर ले जाती हैं, जिससे पूरी पृथ्वी का तापमान संतुलित रहता है !
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का अवशोषण- मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड का एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 25% से 30 % तक) समुद्र अपने अंदर समाहित कर लेता है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार धीमी होती है !
ऑक्सीजन का सबसे बड़ा स्रोत- हमें मिलने वाली आधी से ज़्यादा ऑक्सीजन समुद्र में मौजूद छोटे पौधों- फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) द्वारा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के ज़रिए बनाई जाती है !
जल चक्र (Water Cycle) का आधार- पृथ्वी पर होने वाली बारिश का मुख्य स्रोत समुद्र ही हैं ! समुद्र के पानी का वाष्पीकरण (Evaporation) ही बादलों का निर्माण करता है, जिससे पूरी धरती को मीठा पानी मिलता है !
आईये अब जानतें हैं कि अगर हर तरह के खतरों से समुद्रों की रक्षा नहीं की गयी तो क्या हो सकता है-
अभूतपूर्व गर्मी- धरती के गर्म होने के साथ – साथ समुद्र की सतह का तापमान भी रिकॉर्ड गति से बढ़ रहा है ! हालिया अध्ययनों के अनुसार, महासागर लगातार अतिरिक्त ऊर्जा सोख रहे हैं, जो प्रति सेकंड कई परमाणु बमों के फटने से निकलने वाली ऊर्जा के बराबर है !
मरीन हीटवेव- जैसे जमीन पर लू चलती है, वैसे ही समुद्र के भीतर भी अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या (Marine Heatwaves) पिछले तीन दशकों में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है ! यह गर्म पानी समुद्री जीवों को झुलसा देता है और उनकी मृत्यु दर को बढ़ा देता है !
कोरल ब्लीचिंग (Coral Bleaching – मूंगे की चट्टानों का नष्ट होना)- मूंगे की चट्टानें (Coral Reefs) समुद्र का सबसे घना और विविध पारिस्थिकी तंत्र हैं, जिन्हें “समुद्र के वर्षावन” कहा जाता है ! तापमान में मामूली बढ़ोतरी (1-2 डिग्री सेल्सियस) होने पर भी कोरल अपने भीतर रहने वाले रंगीन शैवाल (Algae) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे वे पूरी तरह सफेद (ब्लीच) हो जाते हैं ! एक वैश्विक संकट के रूप में, बड़े पैमाने पर होने वाली कोरल ब्लीचिंग की वजह से दुनिया के 84% से अधिक रीफ प्रभावित हो चुके हैं, जिससे लगभग 44% कोरल प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है !

महासागर का अम्लीकरण (Ocean Acidification)- समुद्र द्वारा भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखने के कारण, पानी का रासायनिक संतुलन बिगड़ रहा है और पानी अधिक अम्लीय (Acidic) होता जा रहा है ! पानी में एसिड की मात्रा बढ़ने से केकड़े, घोंघे, लॉबस्टर और छोटे प्लवक (Phytoplankton) अपने सुरक्षात्मक कवच या कंकाल (Shells) नहीं बना पाते ! जब खाद्य श्रृंखला (Food Chain) के आधार पर मौजूद ये जीव खत्म होने लगते हैं, तो इन पर निर्भर बड़ी मछलियां और व्हेल भी संकट में आ जाती हैं !
ऑक्सीजन की कमी (Dead Zones का बनना)- गर्म पानी में ऑक्सीजन को रोकने की क्षमता कम होती है ! इसके अलावा, तापमान बढ़ने से समुद्र की ऊपरी गर्म परत और नीचे की ठंडी परत आपस में ठीक से मिल नहीं पातीं (Stratification) ! इसके कारण समुद्र के कई हिस्सों में ऑक्सीजन का स्तर बेहद गिर गया है, जिससे वहां “डेड ज़ोन” (Dead Zones) बन गए हैं, जहां कोई भी समुद्री जीव जीवित नहीं रह सकता !
जीवों का विस्थापन- बदलते तापमान के कारण समुद्री जीवों के रहने के ठिकाने बदल रहे हैं ! कई मछलियां और समुद्री जीव ठंडे पानी की तलाश में भूमध्य रेखा (Equator) को छोड़कर उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों की ओर पलायन कर रहे हैं ! जो जीव तेजी से प्रवास या अनुकूलन (Adaptation) नहीं कर पाते, वे सामूहिक रूप से विलुप्त होने की कगार पर हैं !
समुद्री जल स्तर का बढ़ना (Sea Level Rise)- ग्लेशियरों के पिघलने और गर्म पानी के फैलने (Thermal Expansion) के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है ! इससे तटीय शहरों और द्वीपों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है (समुद्री जलस्तर बढ़ने से मानवों को क्या भयंकर अंजाम भुगतने पड़ सकतें हैं, जानने के लिए कृपया हमारे इस पूर्व प्रकाशित आर्टिकल को पढ़ें- फ्रांस सरकार व संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आगामी उच्चस्तरीय सभा के एक्शन पैनल में मदद की “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने) !
समुद्रों की इस दुर्दशा में सबसे बड़ा हाथ विभिन्न इंसानी गतिविधियों का माना जा रहा है (प्लास्टिक प्रदूषण भी आग में घी का काम कर रहे हैं) ! अगर समय रहते कार्बन उत्सर्जन जैसे सभी हानिकारक खतरों को कम नहीं किया गया, तो हम अपनी इस जीवन रक्षक प्रणाली को हमेशा के लिए खो देंगे !
इसलिए इस वैश्विक समस्या की गंभीरता को देखते हुए “मरीन प्रोटेक्टेड एरियाज डे” अभियान का समर्थन, कई देशों की सरकारों के साथ – साथ “संयुक्त राष्ट्र संघ का सतत विकासार्थ महासागर विज्ञान दशक” (United Nations Decade of Ocean Science for Sustainable Development) और “यूनेस्को का इंटरगवर्नमेंटल ओशियनोग्राफ़िक कमीशन” (Intergovernmental Oceanographic Commission of UNESCO) आदि भी करतें हैं और इसकी स्थापना में, सभी यूरोपियन देशों की सरकारों का नेतृत्व करने वाली यूरोपियन यूनियन (European Union) जैसी संस्थाओं ने सहयोग किया है (अधिक जानकारी के लिए कृपया इसकी वेबसाइट देखिये- https://mpaday.org/) !
यहाँ आदरणीय पाठको को याद दिलाना चाहेंगे कि ऊपर वर्णित, यूनेस्को के इंटरगवर्नमेंटल ओशियनोग्राफ़िक कमीशन की महासागरीय आंकड़ा एवं सूचना प्रणाली (स्रोतों का अभिलेख) की जो वेबसाइट है (जिसमें समुद्रों से जुड़ी सारी जानकारी, जैसे- सैटेलाइट्स, सेंसर्स, रिसर्च डाटा, मैप्स, रिपोर्ट्स, टूल्स, सॉफ्टवेयर, संस्थाएं, प्रोजेक्ट्स आदि एक ही जगह उपलब्ध है, ताकि देशों की सरकारें सामुद्रिक प्रदूषण व क्लाइमेट चेंज जैसे अति महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहतर फैसले ले सकें) उसमें भी “स्वयं बनें गोपाल” समूह का विवरण प्रकाशित है, जिसे देखने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- 153 देशों को सदस्य बनाकर, सामुद्रिक विज्ञान व प्रबंधन करने वाली संस्था की वेबसाइट पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह प्रकाशित
मरीन प्रोटेक्टेड एरियाज डे यानी 1 अगस्त को यह उपक्रम, विश्व के विभिन्न भागों के वैज्ञानिको, पर्यावरणविद, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं आदि, के उन कार्यक्रमों का प्रकाशन अपनी वेबसाइट पर करता है, जो संयुक्त राष्ट्र संघ के Sustainable Development Goals (SDGs), खासकर Life Below Water (SDG 14) को सपोर्ट करतें हैं !
इस 2026 वर्ष में “मरीन प्रोटेक्टेड एरियाज डे” की वेबसाइट में, पूरे विश्व से लगभग 100 कार्यक्रम प्रकाशित हुए हैं, जिसमें से भारत देश से, जो एकमात्र पर्यावरणीय कार्यक्रम प्रकाशित हुआ है, वो है आपके अपने “स्वयं बनें गोपाल” समूह का, जिसे देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें (और ओपेन होने वाले पेज में बनें पृथ्वी के नक़्शे के, अंदर बने भारत के नक़्शे के, अंदर बने नीले रंग के बिंदु पर क्लिक करें)- MPA Day 2026 : Celebrating Actions For Global Impact

“स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ – साथ जिन लगभग 100 संस्थाओं के कार्यक्रम प्रकाशित हुए हैं उनके नाम देखने के लिए भी ऊपर दिए गए लिंक (यानी MPA Day 2026 : Celebrating Actions For Global Impact) पर क्लिक करें ………….. या उनमें से कुछ नाम निम्लिखित लिस्ट में भी देखा जा सकता है-
• संयुक्त राष्ट्र संघ का उपक्रम COBSEA (COBSEA)
• गवर्नमेंट ऑफ़ सेंट हेलेना (Government of St Helena)
• मिनिस्टरी फॉर एनर्जी ट्रांजीशन, क्लाइमेट प्रोटेक्शन एंड नेचर ऑफ़ स्टेट ऑफ़ श्लेसविग-होल्सटीन (Ministry for Energy Transition, Climate Protection, Environment and Nature of the State of Schleswig-Holstein)
• मिनिस्टरी फॉर एनवायरनमेंट एंड क्लाईपेडा यूनिवर्सिटी का क्यूरोनियन स्पिट नेशनल पार्क टूगेदर विथ स्टेट सर्विस फॉर प्रोटेक्टेड एरियाज (Ministry of Environment and Klaipeda Universit’s Curonian Spit National Park together with State Service for Protected Areas)
• स्टेट ऑफिस फॉर फॉर एग्रीकल्चर एंड एनवायरनमेंट ऑफ़ वेस्टर्न पोमेरनिआ (State Office for Agriculture and Environment of Western Pomerania – StALU Vorpommern)
• मरीन कंज़र्वेशन कंबोडिया (Marine Conservation Cambodia)
• नेचुरल ए एम् बी मरीन रिज़र्व ऑफ़ कोलम्ब्रेटेस आईलैण्ड (Natural AMB Marine Reserve of Columbretes Islands)
• मेड पैन फ्रांस (MedPAN)
• डॉलफिन रिसर्च ऑस्ट्रेलिया (Dolphin Research Australia)
• ओशन लवर्स फेस्टिवल (Ocean Lovers Festival)
• डिवॉन वाइल्डलाइफ (Devon Wildlife)
• कोरल ट्रायंगल सेंटर (Coral Triangle Center)
• कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एनवायर्नमेंटल डिज़ाइन & मैनेजमेंट (California Institute of Environmental Design & Management)

मरीन लाइफ (समुद्री जीवन) को सुरक्षित रखने के लिए सभी प्रयास सिर्फ समुद्र में ही नहीं होतें हैं, बल्कि जमीन के माध्यम से भी काफी हद तक समुद्रों को बचाया जा सकता है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं भारतीय देशी गाय माँ के गोबर – गोमूत्र से बनी सर्वोत्तम प्राकृतिक खाद द्वारा खेती करना, क्योकि रासायनिक खेती (Chemical Farming) से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस (Nitrogen, Phosphorus etc) आदि जैसे केमिकल्स, नदियों से बहकर बड़ी मात्रा में समुद्र में पहुँचते हैं, जिससे एल्गल ब्लूम (Algal Bloom) यानी पानी में शैवाल (Algae) या साइनोबैक्टीरिया की तेज वृद्धि होती है और समुद्री जीवों पर प्रतिकूल असर पड़ता है !
अतः सारांश रूप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण के अहम् अंग माने जाने वाले समुद्री जीवों (जैसे- मछलियां, मूंगा आदि) के उचित सरंक्षण (जैसे- मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, माइनिंग या ड्रिलिंग पर रोक, शिप्स – टूरिस्ट्स – उद्योगों – कारखानों द्वारा कचरा फेकने पर पाबंदी आदि) करने से …………… इन जीवों की संख्या बढ़ती है जिससे पूरे समुद्र का इको सिस्टम सुधरता है …………… कोरल रीफ्स और मैंग्रोव्स सुरक्षित रहते हैं …………… जलवायु परिवर्तन धीमा पड़ता है …………… और पर्यावरण पर्यटन (Sustainable Livelihood Tourism ; Eco-Tourism) बढ़ने से समाज की आर्थिक दशा में भी इजाफा सकता है …………… इसलिए मरीन प्रोटेक्टेड एरियाज डे का महत्वपूर्ण असर = महासागर सरंक्षण + अर्थव्यवस्था संवर्धन !
जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !
कृपया हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
कृपया हमारे यूट्यूब चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
कृपया हमारे एक्स (ट्विटर) पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
कृपया हमारे ऐप (App) को इंस्टाल करने के लिए यहाँ क्लिक करें
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं/पोस्ट्स/विडियोज़ आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी तरह की जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें, क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं ! अतः किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, प्राप्त हुई किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे ! धन्यवाद !