शिवपुराण में यह वर्णन पाया जाता है कि महाराज शतानीक को दानी होने पर भी नरक-यातना भोगनी पड़ी थी। इसमें सन्देह नहीं कि महाराज शतानीक महादानी थे, किन्तु उनके बाद जब
श्रावस्ती नगरी में कृशागौतमी नाम की एक कन्या रहती थी। गौतमी उसका असली नाम था। काम करते-करते वह जल्दी थक जाती थी, अतएव लोग उसे कृशागौतमी के नाम से पुकारते
नास्तिक लोग भगवान् और भूत आदि बातों पर अविश्वास करते हैं और कहते हैं आज के साइंस के जमाने में भूत (Ghost) या भगवान् जैसी किसी सुपरनैचुरल चीज के अस्तित्व
आजकल के वैज्ञानिकों ने पैदावार बढ़ाने के लिए लगभग हर सब्जी और अनाज के जीन्स में परिवर्तन करके कई नयी नयी प्रजातियाँ विकसित की हैं जिससे भगवान प्रदत्त जबरदस्त औषधीय
यहाँ पर कुछ आसान उपाय दिए जा रहे हैं जिनका नियमित उपयोग करने से चोट के निशान, जलने के दाग, मुहांसे के धब्बे, प्रेगनेंसी के स्ट्रेच मार्क में काफी सुधार