मौत के नाम से जीव काँप जायेगा अगर तन्मात्राओं में मोह हो

थोडा सा आप समय दीजिये अपने शरीर की चालाकियों और लालच को समझने में क्योकि अगर आप एक बार समझ गए की मन में उठने वाली इच्छा के पीछे क्या

आप कैसे दिखतें हैं और क्या सोचतें हैं, ये भी बता सकता है आयुर्वेद

आयुर्वेद में हर छोटी सी छोटी चीज का बहुत विस्तृत वर्णन है जिसे समझना सबकी बस की बात नहीं है क्योंकि एक तो ये क्लिष्ट देवभाषा संस्कृत के गूढ़ सूत्रों

भक्ति संक्रामक है

16 पूर्ण कलाओं के साथ उस निराकार ब्रम्ह ने आकार लिया जिनका नाम था कृष्ण | ये श्री कृष्ण का अवतार तो स्थूल रूप से लगभग 5000 साल पहले हुआ

सिर्फ ये एक काम करने से आँखों के कई रोगों के नाश होता है

हमारे योग शास्त्र के हठ योग साधना पद्धति में एक क्रिया होती है जिसका नाम है त्राटक ! इस त्राटक को आँखों के सभी रोगों और विकृतियों को नष्ट करने

सबसे बड़ा वैरागी

श्रीमत् भागवत पुराण में भगवान दत्तात्रेय सर्प की निर्मोही पन से प्रभावित थे इसलिए वे सर्प की निर्मोहीपन, निरासक्ति और संग्रह न करने की इच्छा को अनुकरणीय मानते थे। क्योकि

मुंह, दांत और गले की कई बीमारियों के नाश के लिए

यहाँ पर बार बार के सफलता पूर्वक आजमाया हुये नुस्खे के बारे में बताया जा रहा है जो शर्तिया कई तरह के मुंह, दाँतों और गले के रोगों में बहुत

सिर पर भगवान का हाथ हो तो, पूरी सेना भी अकेले आदमी को हरा ना सके

कीचक के वध की सूचना आँधी की तरह फैल गई। वास्तव में कीचक बड़ा पराक्रमी था और उससे त्रिगर्त के राजा सुशर्मा तथा हस्तिनापुर के कौरव आदि डरते थे। कीचक

किसने कहा शादी करना जरूरी है ?

श्री स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन में कई विषयों के रहस्यमय पहलुओ का उजागर किया जिसकी वजह से उनकी गिनती आज भी दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोगों में होती

एक कमजोर औरत क्या कर सकती है

जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उसे अपने पीछे आते देखकर यमराज ने उसे

प्रकृति का लय ही, प्रलय है

हर व्यक्ति के जीवन का अन्त ही प्रलय है । श्री महर्षि ने जाने कितने छात्रों को, जाने कितनी बार पढ़ाया होगा यह सूक्त। कितनी बार दुहराया होगा वह अर्थ जो उन्होंने अपने

अगर गूँगा, पागल, बकवासी, धृष्ट, मूर्ख, डरपोक और निकृष्ट कुल की गाली सुनने का जिगर हो तो ही इसे शुरू करियेगा…

एक सिद्ध योगी थे । अपनी सिद्धियों के द्वारा अनेक कार्य शीघ्र सम्पन्न कर देते थे । किन्तु उन्हें अपने हृदय में शान्ति का अनुभव नहीं होता था । उन्होंने

5000 साल पहले हुई भविष्यवाणी कितनी सटीक साबित हो रही है

ये प्रसंग है, अनन्त ब्रह्माण्ड नायक योगेश्वर श्री कृष्ण और उनके परम प्रिय पांडु पुत्रों का | महाभारत के अति भीषण युद्ध में जीत के बाद जब सब कुछ सामान्य

देवभाषा संस्कृत में लिखे बच्चों, बूढों और जवानों के लिए कुछ नियम

  पिता रत्नाकरो यस्य, लक्ष्मीर्यस्य सहोदरी । शङ्खो भिक्षाटनं कुर्यात्, फलं भाग्यानुसारतः ।। मतलब – पिता जिसका सागर है, और लक्ष्मी जिसकी बहन है (यहाँ शंख की बात हो रही

लकवा, पागलपन, घबराहट, डर, स्ट्रेस, डिप्रेशन, मेमोरी लॉस आदि सभी मानसिक रोगो में गारन्टीड फायदा देगी यह मुद्रा

ये कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि हार्ड कोर, वेरी एनसीएन्ट साइंस है जिसका नाम है “योग” जिसके प्रथम प्रणेता थे अनन्त शक्तिशाली, जन्म – मृत्यु से रहित, सबको बनाने,