अनुवाद – आजाद-कथा – भाग 13 – (लेखक – रतननाथ सरशार, अनुवादक – प्रेमचंद)
इधर शिवाले का घंटा बजा ठनाठन, उधर दो नाकों से सुबह की तोप दगी दनादन। मियाँ आजाद अपने एक दोस्त के साथ सैर करते हुए बस्ती के बाहर जा पहुँचे। क्या देखते हैं, एक बेल-बूटों से सजा हुआ बँगला है। …