पिता हों तो ऐसे
आईये जानते हैं सबसे पहले कि परम आदरणीय हिन्दू धर्म के अनुसार, पिता कहतें किसे हैं– पिता- ‘पा रक्षणे’ धातु से ‘पिता’ शब्द निष्पन्न होता है अर्थात ‘य: पाति स पिता’ जो रक्षा करता है, वह पिता कहलाता है ! …
आईये जानते हैं सबसे पहले कि परम आदरणीय हिन्दू धर्म के अनुसार, पिता कहतें किसे हैं– पिता- ‘पा रक्षणे’ धातु से ‘पिता’ शब्द निष्पन्न होता है अर्थात ‘य: पाति स पिता’ जो रक्षा करता है, वह पिता कहलाता है ! …
अक्सर कई सज्जन व्यक्तियों के मन की अंतर्व्यथा होती है कि उनसे जीवन में जो कुछ भी जाने अनजाने पाप, गलतियाँ आदि हो चुकी हैं, उसका दंड ना जाने, भगवान् अभी या भविष्य में किस भयानक सजा व कष्टों के …
[ महती ईश्वरीय कृपा से जब जब परम आदरणीय ऋषि सत्ता का अति दुर्लभ सम्पर्क “स्वयं बनें गोपाल” समूह को प्राप्त होता है तब तब कोई ना कोई बेशकीमती ज्ञान हमें अवश्य प्राप्त होता है, जिनमें से कुछ ज्ञान को …
(This article is English version of previously published article titled – क्या वैज्ञानिक पूरा सच बोल रहें हैं बरमूडा ट्राएंगल के बारे में which was published on 21st Nov 2016 on “Svyam Bane Gopal” Group’s website)- {The following article is …
[परम आदरणीय ऋषि सत्ता की अत्यंत दयामयी कृपा है कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह को उनसे जुड़े दुर्लभ सत्य वृत्तान्त को पुनः प्रकाशित करने की अनुमति मिली है ! ऋषि सत्ता के बारम्बार हमारे समूह के प्रति दृष्टिगोचर होने वाली …
{This article is English version of previously published article titled– क्यों गिरने से पहले कुछ उल्कापिण्डो को सैटेलाईट नहीं देख पाते (link of this article is given below of this English version article) which was published on 24th May 2016 …
[एक दिव्य देहधारी ऋषि सत्ता की परम आश्चर्यजनक पर नितांत गोपनीय आत्मकथा, जिसे विशेष मूहूर्त पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह को प्रकाशित करने की विशेष अनुमति प्राप्त हुई है ! वह दिव्य गाथा, उन्ही की वाणी में, इस प्रकार है]- …
आंकड़ों के अनुसार अकेले भारत में हर 5 मिनट में, 2 मौत सिर्फ किडनी की बीमारी से हो रही है और इन आकड़ों में अधिकता शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों की है जो डायबिटिज या हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं …
समाज में सर्वत्र तेजी से बढ़ती हुई संवेदनहीन संतानों की संख्या को देखते हुए, “स्वयं बनें गोपाल” समूह इस लेख को लिखने पर मजबूर हो गया ! यहाँ हम बात कर रहें हैं मुख्यतः उन संतानों के बारे में, जिनको …
कभी कभी बड़े से बड़े भक्तों के मन में भी प्रश्न आता है कि, क्या लगातार ईश्वर को देखने से उबन (बोरियत) नहीं होगी ? और अगर बोरियत होगी तो फिर कोई आदमी क्यों पूरी जिंदगी मेहनत करे वो भी …
दुनिया दिन ब दिन सुविधा भोगी होती जा रही है और इसी सुविधा भोगी मानसिकता की तीव्र उत्कंठा के हजारों उदाहरणों में से एक है अपने नवजात बच्चों के लिए डायपर इस्तेमाल करना ! आज की बहुत सी महिलाओं को …
हर नशा करने वाला जानता है कि नशा करने से एक ना एक दिन उसे कोई घातक रोग लग सकता है पर वो यह सोचकर अपने दिल को झूठी दिलासा देता रहता है कि अगर नशे से कोई बीमारी होनी …
इंग्लिश भाषा की एक फेमस कहावत है कि “चाइल्ड इज द फादर ऑफ़ मैन” इसलिए आज के बच्चों की बचपन की ही ट्रेनिंग, भविष्य के पूरे समाज की दिशा तय करती है अतः इसे किसी भी हाल में हल्के में …
भारत भूमि का पृथ्वी पर अपना एक विशिष्ट स्थान है क्योंकि यहाँ एक से बढ़कर एक दिव्य तीर्थ स्थल हैं (जैसे – हिमालय, वृन्दावन, जगन्नाथपुरी, अयोध्या, विन्ध्याचल, द्वारिका, रामेश्वरम, काशी आदि) और इन सभी तीर्थ स्थलों को और ज्यादा सुशोभित …
आजकल की महानगरीय जीवन शैली की वजह से अक्सर नव विवाहित जोड़ों में अपने शादी के प्रति उत्साह कुछ ही वर्षों में कम होने लगता है ! आईये जानने की कोशिश करतें हैं समाज के लिए घातक इसी समस्या के …
जब शत्रु प्रबल हो और लड़ने के लिए समय भी इफरात ना हो तो बहुत जबरदस्त मोर्चाबंदी करनी पड़ती है शत्रु को कुचल डालने के लिए ! कैंसर (कर्कट रोग) इसी स्तर का शत्रु है और खासकर अगर यह बढ़कर …