गृहस्थ संत परम आदरणीय श्री कृष्ण चन्द्र पाण्डेय जी भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे (श्री पाण्डेय जी का संक्षिप्त जीवन परिचय जानने के लिए कृपया उनसे सम्बन्धित पूर्व
आजकल लोगों को आँखों से सम्बन्धित तरह – तरह की बीमारियाँ बहुत हो रही हैं और जिनके प्रमुख कारण हैं- डायबिटिज, किसी तरह का नशा करना, केमिकल व प्रिजर्वेटिव युक्त
सबसे पहले हम अपने सभी आदरणीय पाठको को बताना चाहेंगे कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह की स्थापना में जिन दिव्य ऋषि सत्ताओं द्वारा प्रदत्त विशेष ज्ञान व स्नेह का आधार
(विशेष अवसर पर गोलोक वासी ऋषि सत्ता की अत्यंत दयामयी कृपा से प्राप्त आपबीती दुर्लभ अनुभव का अंश विवरण)- मेरे अपने पार्थिव देह को छोड़ने अर्थात मृत्यु के बाद जब
{नीचे सर्वप्रथम श्री परमहंस योगानंद की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक “एक योगी की आत्मकथा” (जो फिलोसौफिकल लायब्रेरी न्यूयार्क के 1946 मूल संस्करण का पुनर्मुद्रण है) के पेज नम्बर 431 और 513
मुख्यतः भक्ति योग में शीघ्र सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले आदरणीय जिज्ञासुओं के लिए यह लेख प्रस्तुत है ! इसमें सबसे पहली बात यह समझने की जरूरत है
आईये जानते हैं सबसे पहले कि परम आदरणीय हिन्दू धर्म के अनुसार, पिता कहतें किसे हैं– पिता- ‘पा रक्षणे’ धातु से ‘पिता’ शब्द निष्पन्न होता है अर्थात ‘य: पाति स
[परम आदरणीय ऋषि सत्ता की अत्यंत दयामयी कृपा है कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह को उनसे जुड़े दुर्लभ सत्य वृत्तान्त को पुनः प्रकाशित करने की अनुमति मिली है ! ऋषि
[एक दिव्य देहधारी ऋषि सत्ता की परम आश्चर्यजनक पर नितांत गोपनीय आत्मकथा, जिसे विशेष मूहूर्त पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह को प्रकाशित करने की विशेष अनुमति प्राप्त हुई है !
भारत भूमि का पृथ्वी पर अपना एक विशिष्ट स्थान है क्योंकि यहाँ एक से बढ़कर एक दिव्य तीर्थ स्थल हैं (जैसे – हिमालय, वृन्दावन, जगन्नाथपुरी, अयोध्या, विन्ध्याचल, द्वारिका, रामेश्वरम, काशी
पश्चिमी देशों के खोखले कल्चर का अंधाधुंध अनुसरण कर अपने आप को मॉडर्न, क्लासी बनने वाले ऐसे मूर्ख भारतीय जो अपने अनंत वर्ष पुराने भारतीय सनातन धर्म को मात्र अंधविश्वास