जरा गौर से पहचानिए इन आँखों को

कुछ लोग कहते हैं कि आज के आधुनिक युग में भगवान, ईश्वर आदि सब झूठ बातें हैं, और भगवान के बारें में जो कुछ भी कहा सुना या लिखा गया

प्यार से हैंडल करना, बहुत जल्दी रोने लगते हैं

जी हाँ इनका ये मनमोहक स्वभाव खुद कई, बड़े बड़े ऋषियों ने देखा और आश्चर्य चकित होकर इनके कई अदभुत नाम रखे ! श्री राधा कृष्ण के युगल सहस्त्र नामों

श्री कृष्ण ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए अपने भगवान होने तक की मर्यादा तोड़ दी

किसी भी हद तक जा सकते है कृष्ण अपने भक्त की रक्षा करने के लिए ! इतिहास गवाह है की एक नहीं हजारों बार ऐसा हुआ है की श्री कृष्ण

मौत भयानक नहीं है

याग्वल्क्य ऋषि का एक अलग दर्शन है मृत्यु के बारे में, उनका कहना है की जीवन से पहले भी मृत्यु है और जीवन के बाद भी मृत्यु है, तो मृत्यु

मुझे जान से मार क्यों नहीं देते

ये भीषण चीत्कार है उस भयंकर दर्द की जो दिल में उठता है उस भक्त के, जिसे सिर्फ एक सेकंड के लिए, त्रैलोक्य मोहन लड्डू गोपाल की झलक दिख जाती

आसक्ति में अपमान है !

जी हाँ, यह तय बात है कि इस दुनिया में हम जिन जिन व्यक्तियों/वस्तुओं से जितना ज्यादा आसक्ति रखेंगे (ईश्वर को छोड़कर) उन उन व्यक्तियों/वस्तुओं से उतना ज्यादा दुःख (जो

मौत के नाम से जीव काँप जायेगा अगर तन्मात्राओं में मोह हो

थोडा सा आप समय दीजिये अपने शरीर की चालाकियों और लालच को समझने में क्योकि अगर आप एक बार समझ गए की मन में उठने वाली इच्छा के पीछे क्या

भक्ति संक्रामक है

16 पूर्ण कलाओं के साथ उस निराकार ब्रम्ह ने आकार लिया जिनका नाम था कृष्ण | ये श्री कृष्ण का अवतार तो स्थूल रूप से लगभग 5000 साल पहले हुआ

सबसे बड़ा वैरागी

श्रीमत् भागवत पुराण में भगवान दत्तात्रेय सर्प की निर्मोही पन से प्रभावित थे इसलिए वे सर्प की निर्मोहीपन, निरासक्ति और संग्रह न करने की इच्छा को अनुकरणीय मानते थे। क्योकि

सिर पर भगवान का हाथ हो तो, पूरी सेना भी अकेले आदमी को हरा ना सके

कीचक के वध की सूचना आँधी की तरह फैल गई। वास्तव में कीचक बड़ा पराक्रमी था और उससे त्रिगर्त के राजा सुशर्मा तथा हस्तिनापुर के कौरव आदि डरते थे। कीचक

एक कमजोर औरत क्या कर सकती है

जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उसे अपने पीछे आते देखकर यमराज ने उसे

प्रकृति का लय ही, प्रलय है

हर व्यक्ति के जीवन का अन्त ही प्रलय है । श्री महर्षि ने जाने कितने छात्रों को, जाने कितनी बार पढ़ाया होगा यह सूक्त। कितनी बार दुहराया होगा वह अर्थ जो उन्होंने अपने

अगर गूँगा, पागल, बकवासी, धृष्ट, मूर्ख, डरपोक और निकृष्ट कुल की गाली सुनने का जिगर हो तो ही इसे शुरू करियेगा…

एक सिद्ध योगी थे । अपनी सिद्धियों के द्वारा अनेक कार्य शीघ्र सम्पन्न कर देते थे । किन्तु उन्हें अपने हृदय में शान्ति का अनुभव नहीं होता था । उन्होंने

5000 साल पहले हुई भविष्यवाणी कितनी सटीक साबित हो रही है

ये प्रसंग है, अनन्त ब्रह्माण्ड नायक योगेश्वर श्री कृष्ण और उनके परम प्रिय पांडु पुत्रों का | महाभारत के अति भीषण युद्ध में जीत के बाद जब सब कुछ सामान्य