देवभाषा संस्कृत में लिखे बच्चों, बूढों और जवानों के लिए कुछ नियम

  पिता रत्नाकरो यस्य, लक्ष्मीर्यस्य सहोदरी । शङ्खो भिक्षाटनं कुर्यात्, फलं भाग्यानुसारतः ।। मतलब – पिता जिसका सागर है, और लक्ष्मी जिसकी बहन है (यहाँ शंख की बात हो रही

कई महान आश्चर्यों को अपने में समेटा है पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर

वैसे तो उड़ीसा के पुरी मंदिर को कलियुग का साक्षात मोक्षदायिनी तीर्थ कहा गया है और जहा साक्षात जगन्नाथ भगवान कृष्ण विराजते हो उस स्थल पर अनगिनत दृश्य – अदृश्य

धर्म पिता के धर्म पुत्र का धर्म

पांड़ु पुत्र युधिष्ठर के बारे में चर्चा करते ही लोग उनके जुए में सर्वस्व हारने की बात याद करते है पर ये भूल जाते है की युधिष्ठर जी से बड़ा

मृत गाय माता का पुर्नजन्म

संत अपनी योग विभूतियों को जगजाहिर नहीं करते लेकिन जरुरत पड़ने पर कृपा करने से पीछे भी नहीं हटते। मिथिला के बनगाँव के श्री कारी खाँ ने स्वामी जी को

पूरे विश्व के बारह शिवलिंग एक ही स्थान पर, वह भी भगवान श्री राम द्वारा स्थापित

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने भी उस रामपथ को खोजने की शुरूआत की है जो अयोध्या से चित्रकूट होता हुआ दण्डकारण क्षेत्र से पंचवटी होते हुआ रामेश्वरम जाता है !

एक जीभ चार जबान

वाणी सामान्य अर्थों में वह कही जाती है जो जिह्वा से कही और कानों से सुनी जाये। इसका एक स्वरूप लेखन और वाचन भी हो सकता है। यह स्थूल वाणी

सभी बीमारियो को दूर कर सकने में सक्षम, एक बहुत लाभप्रद तरीका

यहाँ पर कुछ ऐसी जानकारियां बतायी जा रही है जो, कुछ बेहद अनुभवी वैद्यो और उच्च कोटि के संतो की दयामयी कृपा से सुनने को मिली है। यह जानकारी है

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 39 (सकाम से निष्काम साधना)

श्री पं. रामस्वरुप जी चाचोदिया, राठ का कहना है सामान्यतया मनुष्य तत्काल के लाभ को देखता है। तात्कालिक लोभ के लिए वह भविष्य की भारी हानि का खतरा भी उठाता

प्रचण्ड तेजस्वी सन्त – भाग 1

तैलंग स्वामी – ये बड़े उच्चकोटि के संत थे। वे 260 साल तक धरती पर रहे। रामकृष्ण परमहंस ने उनके काशी में दर्शन किये तो बोलेः “साक्षात् विश्वनाथ जी इनके

श्री राम कथायें

धैर्यवान श्री राम – राम, रावण से युद्ध के लिए समुद्र के किनारे पर आ गए थे। सेना सहित समुद्र को पार करने पर विचार विमर्श चल रहा था। तभी

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 38 (चिकित्सा में सफलता)

श्री भूरेलाल जी वैद्य, हर्रई लिखते हैं कि पं. नर्मदाप्रसाद शास्त्री भदरस कानपुर के रहने वाले विद्यावान भाग्यवश हर्रई (जागीर) के राम मन्दिर में आकर पुजारी हो गये थे, ईश्वर

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 37 (छोटी नौकरी से धनी व्यापारी)

शा. मोड़कमल केजड़ीवाल, कलकत्ता लिखते हैं कि जोधपुर राज्य के एक गाँव में हमारी जन्मभूमि है। हिन्दी मिडिल पास करने के बाद पास के गाँव में प्राइमरी स्कूल का अध्यापक

गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 36 (गई लक्ष्मी का पुनरागमन)

श्री शंभूचरण विश्वनोई, वीरपुर लिखते हैं कि हमारे पिता जी बड़े चतुर और बुद्घिमान थे। उन्होने अपने हाथों लगभग दस लाख की सम्पत्ति कमाई थी। जमींदारी, देन-लेन, घी और गल्ले