
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,
वास्तव में, पर्यावरण सरंक्षण जैसी सबसे कठिन समस्या का पूर्ण निस्तारण तभी सम्भव है, जब पर्यावरण के सबसे अहम भाग यानी खेती में केमिकल्स (रासायनिक खाद व कीटनाशक) का अंधाधुंध उपयोग रोका जा सके, साथ ही प्राकृतिक तरीकों से फल/फूल/फसल की पैदावार खूब बढ़ाई जा सके ! इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह सदा से, दुनिया की सबसे विकट आपदा यानी पर्यावरणीय समस्या को ही कई स्वर्णिम अवसरों में बदलकर, आम जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें ख़ुशी – ख़ुशी इंटरेस्टेड होकर सहयोग कर सकें !
अगर आसान भाषा में कहें तो पर्यावरण संबंधित समस्यों को, कैसे खूब पैसा कमाने वाले रोजगारों में बदला जा सकता है, उन्ही सरल तरीकों के बारें में बताता रहा है “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने इस वर्षों पुराने दूसरे उपक्रम के माध्यम से भी, जिसका नाम है “माई गौमाता” (My Gau Mata) और जिसके बारें में विस्तार से जानने के लिए, कृपया इसकी वेबसाइट देखें- https://mygaumata.com/

चूंकि पूरी दुनिया में भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ से बढ़कर, पर्यावरण को लाभ पहुंचाने वाला कोई दूसरा नहीं है, इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने अपने इस दूसरे उपक्रम का नाम भी, परम आदरणीय गाय माँ के ही नाम पर “माई गौमाता” (My Gau Mata) रखा हैं, जिसकी वेबसाइट में दिए गए इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now आप हमारे बेहतरीन रिसर्चर्स से निम्नलिखित सलाह पा सकतें हैं-
कैसे आप आश्चर्यजनक कमाई कर सकतें है, अपनी बेहद छोटी या बड़ी, खाली – बेकार पड़ी हुई, एकदम बंजर जमीन को भी-
• बेहद उपजाऊ खेत/बगीचे में बदलकर
• जंगल/फ़ूड पार्क/गार्डन युक्त पार्टी/फंक्शन/सेलिब्रेशन डेस्टिनेशन आदि में बदलकर
• भूमिगत पानी की कमी या खारापन को बदलकर
• कार्बन क्रेडिट में बदलकर
ऊपर दिए गए चारों विकल्पों में कोई भी मनपसंद विकल्प चुनकर, अच्छी आमदनी की जा सकती हैं, जिनके बारे में जानकारी पाने के लिए, कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- Consult Now

रासायनिक खादों व कीटनाशकों के वर्षों तक इस्तेमाल करने की वजह से या खारे पानी की वजह से या किसी भी अन्य कारण की वजह से कोई भी खेत/बगीचा/जमीन, चाहे कितना भी ज्यादा बंजर हो चुका हो, तब भी उसे कुछ ही माह में निश्चित उपजाऊ बनाया जा सकता है, कुछ विशेष प्राकृतिक उपायों को आजमाकर (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को बेहतरीन प्राकृतिक तरीकों से जल्दी उपजाऊ बनाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

वास्तव में ये ट्रेंड हर शहर में देखने को मिल रहा है कि लोग अपने जीवन के यादगार पलों (जैसे- शादी, जन्मदिन, उत्सव, रेस्टोरेंट में सामूहिक भोजन, किटी पार्टी, छुटियाँ मनाना आदि) के लिए ऐसी जगह जाना पसंद करतें हैं जहाँ बहुत बढियाँ प्राकृतिक नजारा – हरियाली हो, इसलिए आजकल ऐसे छोटे – बड़े थीम फ़ूड पार्क/जंगल आदि की हाई डिमांड हो गयी है जहाँ काफी पेड़ – पौधे हों ! इसके अलावा आजकल कई स्कूल के स्टूडेंट्स को भी अपने बायोडायवर्सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए जंगल या इको-कैंप की ट्रिप लगानी पड़ती है ! बेहद छोटी और बंजर जमीन पर भी हमारे रिसर्चर्स की मदद से ऐसे सस्टेनेबल जंगल बनाये जा सकतें हैं जिन्हे कभी भी खाद या पानी देने की जरूर नहीं पड़ सकती है (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन को जंगल/फ़ूड पार्क की तरह विकसित करना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

अगर जमीन में भूमिगत जल बहुत कम हो चुका हो या पानी खारा हो चुका हो तब भी खेती करना बहुत मुश्किल और महंगा हो जाता है ! तो ऐसे मौके पर काम आते हैं कुछ बेहद सरल प्राकृतिक उपाय जिनसे धीरे – धीरे भूमिगत जल की कमी और खारापन दोनों दूर होने लगते हैं (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में कम होते भूजल या खारे पानी की समस्या को दूर करके खेती से प्रॉफिट कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !

इसके अलावा कार्बन क्रेडिट से भी पैसा कमाया जा सकता है जिसमें कई कम्पनीज आपकी जमीन में लगे हर एक पेड़ के रखरखाव के बदले में आपको सालाना भत्ते दे सकतीं हैं ! मतलब जमीन और पेड़ के मालिक हमेशा आप ही रहेंगे, लेकिन उस पेड़ की ठीक से देखभाल करने के लिए, प्रदूषण फैलाने वाली कम्पनीज आपको सालाना पैसा दें सकतीं हैं, एक लिखित कॉन्ट्रैक्ट साइन हो जाने के बाद (अतः अगर आप भी अपने बंजर खेत/बगीचे/जमीन में पेड़ों को उगाकर कार्बन क्रेडिट से पैसा कमाना चाहते हों तो आप, हमारे रिसर्चर्स से सम्पर्क कर सकतें हैं इस लिंक पर क्लिक करके- Consult Now) !
कृपया ध्यान दें हमारे शोधकर्ता कभी भी यह सलाह नहीं देते हैं कि किस जमीन/खेत/बगीचे में, किस मौसम में, किस फसल – पेड़ – पौधों – बीजों को लगाना चाहिए क्योकि पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, अलग – अलग मौसम अनुसार, विभिन्न प्रकार के फसलों/पौधों की उगने की खासियत होती है इसलिए किस क्षेत्र के, किस मौसम में, किस फसल/पौधा को उगाना ज्यादा लाभदायक होगा, उसकी एकदम सटीक जानकारी सिर्फ उस क्षेत्र में रहने वाले किसान या कृषि विभाग दे सकता है !
हमारे शोधकर्ताओं के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ाना, क्योकि अगर जमीन/खेत की उपजाऊ क्षमता बहुत कम हो जाए तो अच्छे से अच्छा बीज/पौधा बोने पर भी या महँगी से महँगी रासायनिक खाद/कीटनाशक डालने पर भी फसल/पौधे मरने लगते हैं ……… वहीँ अगर जमीन की उपजाऊ क्षमता बहुत अच्छी हो जाए तो ……… ऐसी आश्चर्यजनक घटनाएं भी देखी गयी है कि बिना कोई नया बीज/पौधा बोये हुए भी, जमीन के अंदर से अपने आप सैकड़ों नेटिव (देशी) किस्म के पेड़/पौधे उगकर एक घना प्राकृतिक जंगल बना देतें हैं (अधिक जानकारी के लिए कृपया ये 2 यूट्यूब वीडियो देखिये- एक पागलपन भरा कदम और पूरा जंगल बदल गया और We grew a forest WITHOUT planting a single tree) !
क्योकि जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ने से, जमीन की गहराई में वर्षों पहले दबी हुई (यानी सूखकर मर गयी) जड़ों/बीजों को भी फिर से नवजीवन मिलने लगता है, जिससे वे फिर से अपने आप उगकर हरे – भरे पेड़ – पौधों का रूप ले लेते हैं ……. और अंततः अलग से बिना कोई मेहनत या पैसा खर्च किये हुए, अपने आप वहां एक घना प्राकृतिक जंगल बन जाता हैं जिससे पर्यावरण और जीव जगत (बायोडायवर्सिटी) का बहुत ही भला होता है ………. इसलिए सभी सरकारी/प्राइवेट – खाली/बेकार/बंजर – छोटी/बड़ी जमीनों की भी सिर्फ उपजाऊ क्षमता बढ़ाकर वहां अपने आप एक बढियाँ जंगल का निर्माण किया जा सकता है !
जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का एक बहुत तेज तरीका है नेटिव एनिमल्स हस्बैंड्री (यानी देशी पशुओं का पालन) क्योकि पशुओं के बेशकीमती गोबर – मल – मूत्र से बनी खाद से और पशुओं के लोकोमोशन (घूमने – फिरने) से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर जबरदस्त अच्छा असर पड़ता है (जैसे इस वीडियो में देखिये बाईसन नाम का जीव, अमेरिका का देशी प्राणी है इसलिए इसको पालने से अमेरिका के पर्यावरण पर काफी अच्छा असर पड़ता है- How bison restore the American Prairie) ! इसी तरह भारतीय देशी गाय माँ, भारतीय पर्यावरण व खेती के सुधार के लिए रामबाण से कम नहीं है !
यहाँ, अनंत वर्ष पुराने सनातन धर्म की इस प्राचीन मान्यता पर भी गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की जरूरत है कि ……… भारतीय देशी गाय माँ सिर्फ भारत देश के लिए ही बल्कि पूरे विश्व के लिए नेटिव (देशी) प्राणी है, क्योकि धरती माँ कोई और नहीं बल्कि गाय माँ ही हैं (इसलिए ग्रंथों में गाय माँ को ही जगत माता कहा गया है और खुद श्रीमद् भागवत महापुराण में भी लिखा है कि धरती माँ जब नारायण से बात कर रही थी तो उनका रूप गाय का ही था) !

वास्तव में, पुराणों के अनुसार, एक निराकार (मतलब जिसका कोई आकार नहीं है) ईश्वर अलग – अलग विशिष्ट कामों को करने के लिए अलग – अलग रूप धारण करते रहतें हैं (जैसे संहार के लिए शिव जी का रूप, पालन करने के लिए विष्णु जी का रूप, और पैदा करने के लिए ब्रह्मा जी का रूप) उसी तरह ईश्वर ने जगत को धारण करने के लिए विशाल धरती यानी पृथ्वी का रूप लिया ! लेकिन धरती माँ अपने सभी पुत्रों के लिए हमेशा उपजाऊ बनी रहें इसलिए वो खुद को सूक्ष्म रूप (यानी गाय के रूप में) में परिवर्तित करके, हम मानवों के बीच में विचरने लगी, इसलिए कई परम आदरणीय संत महात्मा, भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ को भगवान कृष्ण का ही साक्षात् ममतामयी अवतार मानते हैं (अतः यह महामूर्खता ही है कि मानवों ने गाय माँ से प्राप्त बेशकीमती गोबर व गोमूत्र से अन्न की पैदावार बढ़ाने की जगह, गाय माँ को ही मारकर खाना शुरू कर दिया) ! ग्रंथों के अनुसार, पूरी पृथ्वी पर कोई ऐसी जगह नहीं हैं जहाँ भारतीय गाय माँ का अंश मौजूद ना हो !
इसलिए सारांश रूप में कई पर्यावरण शोधकर्ताओं का मानना है कि ………… दूसरे देशों के नेटिव प्राणियों (जैसे- अमेरिकन बाईसन, यूरोपियन खरगोश, अफ्रीकन हाथी, ऑस्ट्रेलियन कंगारू आदि) के मल – मूत्र में उतनी क्षमता नहीं है कि वो अपने देश/द्वीप के अलावा, किसी दूसरे देश/द्वीप की बंजर जमीनों की उपजाऊ क्षमता को ज्यादा बेहतर कर सकें ……….. लेकिन भारतीय देशी गाय माँ के गोबर – गोमूत्र में इतनी जबरदस्त पॉवर होती है की वो ना केवल भारत बल्कि सभी देशों में मौजूद बंजर जमीनों को भी बेहद उपजाऊ बना सकतें है, इसलिए अब कई दूसरे देश भी अपनी मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए, भारतीय गोबर को बड़ी मात्रा में नियमित रूप खरीदते जा रहें हैं (अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्नलिखित मीडिया न्यूज़ पढ़ें-
दुनिया में बढ़ी गोबर की इतनी डिमांड ! भारत से लगातार खरीद रहे है ये देश, वजह जानकर हो जाएंगे हौरान
India Cow Dung : kuwait भारत से बोला हमें चाहिए गोबर , Please भेजिए
गाय के गोबर में ऐसा क्या जो खरीदने के लिए लाइन लगाए हैं अरब देश
विदेशों में भारत के गोबर की भारी मांग, नाम दिया ब्राउन गोल्ड, कीमत 40 से 50 रुपये किलो
अमेरिकी बाजार में भारतीय गायों के गोबर की धूम, हॉट केक की तरह है मांग
ऑनलाइन 100 रु किलो बिक रहा है गाय का गोबर,आप भी कर सकते है यह बिज़नेस

अतः सभी बुध्दिमान किसानो/प्रकृति प्रेमियों/पर्यावरणीय सरकारी विभागों को सबसे पहले और सबसे ज्यादा ध्यान जमीन की उपजाऊ क्षमता सुधारने पर देना चाहिए ! इसे इस आसान उदाहरण से भी समझा जा सकता है की जमीन/खेत, माँ की तरह होतीं है और पेड़/पौधे/फसल उसके ऐसे दुधमुहें बच्चे की तरह होतें हैं जो अपनी धरती माँ से ही पोषण पाकर जिन्दा रहते हैं, इसलिए अगर धरती माँ की देखभाल करना छोड़कर सिर्फ बच्चे (यानी पेड़/पौधे/फसल) की देखभाल की जाए, तो ये निश्चित है कि बच्चे देर – सवेर मर जाएंगे, जबकि वहीँ अगर धरती माँ की देखभाल की जाए तो बच्चे अपने आप इतने ज्यादा स्वस्थ – मजबूत हो जाएंगे कि उन्हें ना ही कभी किसी कीटनाशक की जरूरत पड़ेगी और ना ही किसी उर्वरक की (जैसे जंगल में किसी भी पेड़ – पौधे को कभी उर्वरक या कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती है) !
जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !
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