एक माँ – पुत्र के विछोह की असीम पीड़ायुक्त संवाद
{नोट- पहली कविता “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए एक आदरणीय स्वयं सेवक द्वारा रचित है ! पहली कविता के अंत में प्रकाशित दूसरी कविता श्री देवयानी जी की है जिनकी हम पहले भी कुछ कविताओं को प्रकाशित कर …
{नोट- पहली कविता “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए एक आदरणीय स्वयं सेवक द्वारा रचित है ! पहली कविता के अंत में प्रकाशित दूसरी कविता श्री देवयानी जी की है जिनकी हम पहले भी कुछ कविताओं को प्रकाशित कर …
कहने को समाज बहुत ज्यादा पढ़ लिख गया है पर आज भी बहुत सी चीजों के बारे में लोगों को मामूली सी भी जानकारी नहीं है जिसका एक बड़ा उदाहरण है गाय माता से होने वाले जबरदस्त आर्थिक लाभों के …
आज से लगभग 8 – 9 वर्ष पूर्व, कंपनी के जर्मनी हेडक्वाटर के नित्य बदलते फैसले की वजह से अचानक कुछ महीने से भारतवर्ष के एक महानगर स्थित मेरा बिजनेस घाटे की ओर लगातार अग्रसर होने लगा था और मै …