153 देशों को सदस्य बनाकर, सामुद्रिक विज्ञान व प्रबंधन करने वाली संस्था की वेबसाइट पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह प्रकाशित

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,

जैसा की हमने अपने 3 वर्ष पूर्व प्रकाशित आर्टिकल में बताया था की यूनेस्को के सामुद्रिक उपक्रम “ओशन एक्सपर्ट” (Ocean Expert) ने भी “स्वयं बनें गोपाल” समूह का विवरण प्रकाशित किया है (जिसके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- यूनेस्को के सामुद्रिक उपक्रम ने भी “स्वयं बनें गोपाल” समूह को स्वीकृत किया) !

उसी परिप्रेक्ष्य में आगे बताना चाहेंगे कि, संयुक्त राष्ट्र संघ की समुद्र विज्ञान व प्रबंधन की जो लीड बॉडी (यानी सबसे मुख्य संस्था) है उसका नाम है “इंटरगवर्नमेंटल ओशियनोग्राफ़िक कमीशन ऑफ़ यूनेस्को” ! इस संस्था को शार्टकट में “आई ओ सी” (IOC) भी बोलते हैं और इससे 153 देशों की सरकारें भी मेंबर (सदस्य) की तरह जुड़ी हुई हैं (जिनके बारें में अधिक जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.ioc.unesco.org/en) !

इसी “आई ओ सी” (IOC) संस्था की महासागरीय आंकड़ा एवं सूचना प्रणाली (स्रोतों का अभिलेख) की वेबसाइट है जो समुद्रों से जुड़ी सारी जानकारी (जैसे- सैटेलाइट्स, सेंसर्स, रिसर्च डाटा, मैप्स, रिपोर्ट्स, टूल्स, सॉफ्टवेयर, संस्थाएं, प्रोजेक्ट्स आदि) को एक ही जगह उपलब्ध कराती है, जिससे देशों की सरकारें सामुद्रिक प्रदूषण व क्लाइमेट चेंज जैसे अति महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहतर फैसले ले सकतीं हैं !

इसलिए “आई ओ सी” (IOC) संस्था की महासागरीय आंकड़ा एवं सूचना प्रणाली (स्रोतों का अभिलेख) वेबसाइट को समुद्रों की “Google Directory” भी बोला जाता है ! अब इस वेबसाइट पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह का विवरण भी प्रकाशित हो गया है, जिसे देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://catalogue.odis.org/view/3331

वर्तमान में इसकी वेबसाइट पर, भारत में कार्यरत लगभग 33 संस्थाओं/प्रोजेक्ट्स का ही विवरण प्रकाशित है, जिनमें से केवल “स्वयं बनें गोपाल” समूह को छोड़कर बाकी सभी संस्थाएं/प्रोजेक्ट्स सरकारी हैं !

इस वेबसाइट पर “स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ साथ लगभग सभी 33 संस्थाओं/प्रोजेक्ट्स के बारे में जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://catalogue.odis.org/search और ओपन हुए पेज के बीच में दिए गए सर्च बॉक्स में “India” टाइप करके सर्च बटन दबा दें ! या उन सभी संस्थाओं/प्रोजेक्ट्स का नाम निम्नलिखित लिस्ट में भी देखा जा सकता है-

• Ministry of Earth Sciences
• UN Environment
• IOC/UNESCO
• Indian Institute of Technology Bombay
• National Centre for Antarctic and Ocean Research
• National Institute of Oceanography
• Indian National Centre for Ocean Information Services
• National Institute of Science Communication & Information Resources
• Coastal Ocan Monitoring and Prediction System
• Coriolis data centre
• Cochin University of Science and Technology
• Manonmaniam Sundaranar University
• Savitribai Phule Pune University
• CMFRI
• University of Hull
• IIOE-2
• Marine Engineering
• Marinepedia App
• Maritime Knowledge
• Oceanography App
• Oceanography With Python package
• International Indian Ocean Expedition
• US Global Ocean Data Assimilation Experiment
• World continent and ocean

ऊपर लिस्ट में वर्णित कई सरकारी संस्थाओं के एक से ज्यादा प्रोजेक्ट्स, इस वेबसाइट पर प्रकाशित हैं, इसलिए उन सरकारी संस्थाओं का सिर्फ एक ही बार नाम उपर्युक्त लिस्ट में वर्णित है ! इन सभी संस्थाओं/प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का सरंक्षण, विज्ञान के माध्यम से करना है !

इस अवसर पर यह भी बताना चाहेंगे कि, विज्ञान – तकनीकी – नए अविष्कारों पर ही आधारित एक महाधिवेशन का आयोजन होने जा रहा है 5 से 7 मई 2026 तक, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के हेडक्वार्टर में जिसका नाम है “साइंस, टेक्नोलॉजी, इन्नोवेशन की 11 वीं वार्षिक मल्टी स्टेकहोल्डर फोरम (जिसके बारें में अधिक जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://sdgs.un.org/tfm/STIForum2026#innovations) ! इसी महाधिवेशन में पूरे विश्व से चुनिंदा साइंस मिनिस्टर्स, साइंटिस्ट्स, रिसर्चर्स, इनवेंटर्स, एनवायरोमेन्टलिस्ट्स आदि लोगों को सम्मिलित होना है जिनमें से एक हैं हमारे “स्वयं बनें गोपाल” समूह के प्रधान स्वयं सेवक (अध्यक्ष) परिमल पराशर जी !

यहाँ सारांश रूप में इस मोस्ट वैल्युएबल एंशिएंट साइंस (बेशकीमती प्राचीन विज्ञान) का भी जिक्र करना जरूरी है कि ……….. भारतीय देशी गाय माँ सिर्फ धरती के सुधार के लिए ही नहीं, बल्कि समुद्रों के उद्धार के लिए भी परम लाभदायक है ……… चूंकि बिना स्वस्थ समुद्रों के, स्वस्थ पर्यावरण की कल्पना करना मुमकिन नहीं है ……… इसलिए आईये समझतें हैं, गाय माँ के गोबर से जमीन की उर्वरता (soil fertility) बढ़ने का जो अप्रत्यक्ष असर समुद्र पर पड़ता है, उसे निम्नलिखित “Land To Ocean” (स्थल से समुद्र) चक्र के माध्यम से-

मतलब गाय माँ के गोबर से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है (यानी जमीन, पानी को ज्यादा सोखती है) और नदियों – नालों के रास्ते से समुद्र में बहने वाला रासायनिक कचरा (उर्वरक/कीटनाशक) काफ़ी कम हो जाता है, जिससे समुद्र का प्रदूषण घट जाता है ! गोबर की खाद से मिट्टी की संरचना भी मजबूत बनती है, जिससे भारी बारिश में मिट्टी का बहाव (soil erosion) कम हो जाता है और समुद्र के तटीय इलाकों में गाद (Sedimentation) कम जमा होती है !

अंततः इन सभी सुधारात्मक प्रभावों से ना केवल समुद्री बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) उन्नतशील बनती है बल्कि पूरा पारिस्थितिक तंत्र अधिक स्वस्थ होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन (climate change) को कम करने, ऑक्सीजन उत्पादन (Oxygen Production) और कार्बन अवशोषण (Carbon Absorption) में अत्यंत लाभ पहुंचाता है साथ ही तटीय क्षेत्र तूफानों से भी बचतें है !

इसलिए सरल शब्दों में निष्कर्ष-

सबसे अच्छी क्वालिटी के गोबर यानी भारतीय देशी गाय माँ के गोबर से खेती → स्वस्थ मिट्टी → साफ नदियां → स्वच्छ समुद्र → सुरक्षित समुद्री जीवन → सुरक्षित पर्यावरण → सुरक्षित मानव जीवन !

जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !

“संयुक्त राष्ट्र संघ” में “स्वयं बनें गोपाल” समूह की बढ़ती भागीदारी जानने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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