
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,
“जल ही जीवन है” इसलिए प्रदूषित हो चुके जल को फिर से बेशकीमती स्रोत में बदलने के लिए, दुनिया के सभी इच्छुक देशों की सरकारों की मदद करता है संयुक्त राष्ट्र संघ का उपक्रम “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” (Global Wastewater Initiative) ! वास्तव में, पीने व कृषि लायक पानी धरती पर बहुत – बहुत – बहुत ही कम बचा है, जिसे इस तरह समझा जा सकता है-
धरती के कुल पानी का लगभग 97% हिस्सा, समुद्रों में खारा पानी के रूप में मौजूद है ! यानी सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही पानी मीठा (fresh water) पीने योग्य हैं ! अब इस 3% पानी में भी लगभग 68% ग्लेशियर/बर्फ के रूप में जमा हुआ है, जिसमें से 30% जमीन के नीचे (groundwater) है ! अर्थात केवल 1% से भी कम पानी आसानी से उपलब्ध (नदियों, झीलों आदि में) है ! इसलिए प्रदूषित मीठे जल की ही विधिवत सफाई करके, फिर से पीने योग्य बनाना सबसे आसान व सस्ता तरीका है !
अतः पूरी दुनिया में जहाँ भी प्रदूषित जल मौजूद है, उसे फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाकर पर्यावरण सरंक्षण, क्लीन एनर्जी, ग्रीन जॉब्स, ज्यादा उपजाऊ जमीन, ज्यादा सुरक्षित जलीय जीवन और ज्यादा स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सके, यही मुख्य उद्देश्य है संयुक्त राष्ट्र संघ के उपक्रम “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” का जिसके बारें में अधिक जानने के लिए, कृपया इसकी वेबसाइट देखें- https://www.unep.org/topics/ocean-seas-and-coasts/ecosystem-degradation-pollution/wastewater/global-wastewater
वास्तव में “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” एक “मल्टी-स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म” (विविध हितधारकों का साझा मंच) हैं जो संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न संस्थाओं, बैंक्स, कम्पनीज़, स्वयं सेवी समूह आदि को एक साथ जोड़ती है (इसी जानकारी को इस उपक्रम की वेबसाइट पर देख सकतें हैं- https://www.unep.org/topics/ocean-seas-and-coasts/ecosystem-degradation-pollution/wastewater/global-wastewater) !
“ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” के सेक्रेटेरिएट (सचिवालय) ने “स्वयं बनें गोपाल” समूह को धन्यवाद देते हुए सूचित किया है कि अब “स्वयं बनें गोपाल” समूह भी “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” से जुड़ चुका है …………………. और इसी “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” ने अपने 13 वे संस्करण के न्यूज़ लेटर (समाचार पत्र 2026) में पूरे विश्व से अपने 7 मेंबर्स (सदस्यों) के कार्यों के बारें में प्रकाशन किया है, जिनमें से एक आपके अपने “स्वयं बनें गोपाल” समूह का भी है !
वास्तव में संयुक्त राष्ट्र संघ के उपक्रम के न्यूज़लेटर में, किसी संस्था के बारें में प्रकाशन होना, उस संस्था के लिए विशिष्ट सम्मान की बात होती है, क्योकि बहुत से बुद्धिजीवियों के अनुसार यह सम्मान उस संस्था को ग्लोबल रिकग्निशन एंड क्रेडिबिलिटी (वैश्विक पहचान और विश्वसनीयता) के एक नए आयाम पर पहुंचता है !
“स्वयं बनें गोपाल” समेत उन सभी 7 कार्यों से संबंधित मेंबर्स का नाम “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” के न्यूज़ लेटर में देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://new.express.adobe.com/webpage/O0PMBDxjAYRXu और ओपेन होने वाले पेज में ऊपर दिए गए “Partner News” लिंक पर क्लिक करें …………………. या उन सभी 7 का नाम निम्नलिखित लिस्ट में भी देखा जा सकता है-
• संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था FAO के RIWS के अंतर्गत IWMI (IWMI under FAO’s RIWS)
• जर्मन सरकार द्वारा संचालित SuSanA संस्था के साथ स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टिट्यूट (Stockholm Environment Institute with SuSanA)
• यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स के साथ अन्य इंस्टीट्यूट्स (University of Leeds with other insitiutes)
• एनवायर्नमेंटल एंड पब्लिक हेल्थ इंटरनेशनल (Environmental & Public Health International)
• डब्ल्यू डब्ल्यू टी डब्ल्यू एस (WWTWs)
• ए एस आई (A S I)
• स्वयं बनें गोपाल (Svyam Bane Gopal )

अब आईये फिर से समझने की कोशिश करतें हैं कि “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” जैसे विश्व स्तरीय उपक्रम की स्थापना, सिर्फ ख़राब पानी को रिसाइकल (यानी फिर से विभिन्न लाभकारी प्रयोजन हेतु उपयोगी बनाने) के लिए क्यों की गयी ?
जैसा की हमने ऊपर बताया है कि धरती के कुल पानी का केवल 1 % से भी कम हिस्सा ही सीधे पीने लायक उपलब्ध है ! इसलिए, विश्व की इतनी बड़ी आबादी को साफ़ पानी उपलब्ध कराने के लिए, वेस्ट वॉटर (Wastewater) की रीसाइक्लिंग करना, अब कोई चॉइस (अपनी इच्छा) नहीं रह गयी है, बल्कि मजबूरी हो चुकी है !
वेस्ट वॉटर रीसाइक्लिंग का मतलब होता है कि घरों/ऑफिसों/उद्योगों/शहरों आदि से निकलने वाले खराब पानी की सफाई करके, वापस इस्तेमाल करने योग्य बनाना ! ज्यादातर वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से साफ़ हुआ पानी सिर्फ खेती, भवन निर्माण व विभिन्न औद्यौगिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल होता है !
वास्तव में खराब पानी को साफ़ करने के क्षेत्र में, अभी बहुत रिसर्च करना बाकी है क्योकि उस वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को सबसे अच्छा माना जाता है जो प्राकृतिक तरीके से यानी कम से कम ऊर्जा/केमिकल्स/कृत्रिम संसाधनों की खफत में, जल्द से जल्द और अधिक से अधिक पानी की सफाई करके दे सके, जैसे- इजराइल देश की राजधानी तेल अवीव में स्थित शफदान वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा एक ग्लोबल मॉडल के रूप में भी माना जाता है !
इज़राइल का शफदान प्लांट, शहरों के वेस्ट वॉटर को पहले प्राइमरी और सेकेंडरी ट्रीटमेंट से साफ करता है, फिर इस पानी को रेत के टीलों (Sand Dunes) में फैलाकर, जमीन के अंदर एक्वीफर (Aquifer) में पहुंचाया जाता है, जहाँ यह प्राकृतिक फिल्ट्रेशन (Soil Aquifer Treatment) से और ज्यादा शुद्ध हो जाता है ! बाद में इस पानी को पंप करके मुख्यतः खेती में उपयोग किया जाता है, और इस पूरी प्रक्रिया से इज़राइल अपने वेस्ट वॉटर का लगभग 80 से 90% तक दोबारा इस्तेमाल कर पाता है !

शफदान प्लांट की इन्ही खूबियों को समझने के लिए, बेहद दूरदर्शी प्रधानमंत्री मोदी जी की विकसित व आत्मनिर्भर भारत की नीतियों के तहत, भारतीय इंजीनियर्स के प्रतिनिधि मंडल को भी वहां भेजा गया ! इसके अलावा मोदी जी, योगी जी जैसे देशभक्त नेतृत्व बहुत कुछ कर रहें हैं जल के प्रति आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए (जिन्हे अति संक्षेप में उपर्युक्त फोटो में भी देखा जा सकता है) !
वेस्ट वॉटर को, समुद्र के खारे पानी की तुलना में इस्तेमाल करने योग्य बनाना सस्ता पड़ता है क्योकि इसमें कम ऊर्जा और साधनों की जरूरत पड़ती है ! समुद्री पानी को मीठा बनाने में एक समस्या यह भी है, नमक का कचरा (Brine) वापस समुद्र में पहुँच जाता है जिससे समुद्री जीवन बर्बाद होने लगता है !
अब अगर बोरवेल/कुएँ से बार – बार खूब पानी निकाला जाए तो भूमिगत जल भी तेजी से ख़त्म होने लगता है जिससे जमीनों के धंसने (land subsidence) का खतरा भी बढ़ता है ! और भूमिगत जल एक बार खत्म हो जाए तो जल्दी वापस भी नहीं आता है (भूमिगत जल से संबंधित सभी जानकारियों को पाने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- इससे पहले कि पानी की घनघोर किल्लत से आपको घर – शहर छोड़ना पड़ जाए, तुरंत लागू करवाईये इन 3 उपायों को अपने घर, कॉलोनी/मोहल्ले, शहर में) !
पूरी दुनिया में पानी की इतनी अपरम्पार और निरतंर आवश्यकता होने की वजह से, वेस्ट वॉटर रीसाइक्लिंग को संतुलित और टिकाऊ समाधान माना जा सकता है ! वेस्ट वॉटर रीसाइक्लिंग के लिए कई प्राकृतिक तरीके भी मौजूद हैं, जिसमें भारतीय देशी गाय माँ का गोबर एक प्रभावशाली भूमिका अदा कर सकता है !
जी हाँ, कई बार इस आश्चर्यजनक पहलु को चरितार्थ होते हुए सुना गया है कि भारतीय देशी गाय माँ का गोबर सही तरीके से जमीन में डालने पर, ना केवल जमीन बहुत उपजाऊ बन सकती है, बल्कि जमीन और इसके अंदर स्थित भूगर्भ जल का डेटोक्सिफिकेशन (विषहरण) भी होने में मदद मिल सकती है !
गोबर का प्रयोग तो प्राचीन काल से ही विष के असर को कम करने के लिए किया जा रहा है (जिसे उस प्रसिद्ध उदाहरण से भी समझा जा सकता है, जब द्वापरयुग में पूतना राक्षसी द्वारा बाल गोपाल को जहर पिलाने के बाद, श्री गोपाल को तुरंत गोबर से नहलाया गया था ताकि जहर का प्रभाव ख़त्म हो सके) !
इतना ही नहीं, गाय माता जहाँ सुखपूर्वक रहती हैं, वहां पर- “गावः सर्वसुखप्रदाः गावः पापनाशिनीः , गावः शुद्धिप्रदाः नित्यं गावः सर्वार्थसाधिका:” यानी गाय माँ वहां के सभी पाप, नकारात्मकता को समाप्त करके, शुद्धि व सर्वसुख प्रदान करती हैं, इसलिए देखिये अमेरिका तक में लोग गाय माँ का सम्मानपूर्वक गृहप्रवेश करवाते हैं- Indian Family Brings Cow Into New Home in America !
अतः सारांश रूप में कहा जाए तो शुद्ध भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ और इनसे प्राप्त होने वाली सभी चीजें (जैसे- गोबर, गोमूत्र, दूध, आशीर्वाद) जबरदस्त काम कर सकतें हैं हर तरह के नकारात्मक, हानिकारक, जहरीले प्रभाव को कम करने के लिए (गाय माँ के सभी आश्चर्यजनक लाभ जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ बेहद उपजाऊ खेती – सुंदर स्वास्थ्य – महापुण्य के साथ सारी मनोकामनायें, कैसे पूरी कर सकतीं हैं श्री कृष्ण माता अर्थात भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ
असल में, गाय माँ के गोबर (Cow Dung) में मौजूद सूक्ष्मजीव (Microorganisms) और जैविक तत्व, पानी को साफ (Biodegradation) करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ! गाय माँ के गोबर में कई प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जो गंदे पानी में मौजूद जैविक प्रदूषकों (Organic Pollutants) को तोड़ सकतें हैं ! इस प्रक्रिया से पानी में BOD (Biological Oxygen Demand) और COD (Chemical Oxygen Demand) कम हो सकता है !

गोबर में पहले से ही Anaerobic (बिना ऑक्सीजन वाले) बैक्टीरिया होते हैं जो वेस्ट वॉटर में मौजूद जैविक पदार्थों को तोड़ सकते हैं ! इस प्रक्रिया से बायोगैस (Methane) भी बन सकती है, जिसका उपयोग ऊर्जा (खाना बनाने, बिजली बनाने आदि) के रूप में किया जा सकता है !
वास्तव में, गाय माँ का गोबर एक प्राकृतिक “Bio-Culture” की तरह काम कर सकता है ! यह Bioremediation प्रक्रिया को मजबूत बना सकता है ! जहरीले तत्वों (Toxins) को कम कर सकता है ! जिससे पानी की गुणवत्ता सुधर सकती है !
गोबर को मिट्टी या रेत के साथ मिलाकर फिल्टर बेड बनाया जाता है, जो ठोस कणों (Suspended Particles) को रोकता है और पानी को साफ बना सकता है ! गाय माँ के गोबर का उपयोग Artificial Wetlands में भी किया जा सकता है, जो पौधों और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि बढ़ा सकता है ! इससे पानी प्राकृतिक तरीके से साफ हो सकता है !
निष्कर्षतः गाय माँ का गोबर, वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है, जो मुख्यतः सूक्ष्मजीवों की मदद से पानी को साफ कर सकता है ! इसे अन्य तकनीकों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाए तो यह आश्चर्यजनक लाभ देने वाला समाधान बन सकता है वो भी मुफ्त में !
वेस्ट वॉटर रीसाइक्लिंग के लिए निम्नलिखित कुछ और प्राकृतिक तरीके भी इस्तेमाल हो सकते हैं-
कृत्रिम आर्द्रभूमि से पानी साफ़ करना- इसमें पौधों (जैसे कनेर, सरकंडा) और मिट्टी/रेत के जरिए पानी को फिल्टर किया जा सकता है ! यह पौधे और माइक्रोब्स गंदगी, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस को हटाते हैं और मिट्टी के कणों को भी छान सकतें है !
रेत फिल्टर- इसमें रेत की मोटी परत से पानी धीरे – धीरे गुजरता है, जिससे “Bio-Layer” (अच्छे बैक्टीरिया) बनती है जो कीटाणुओं को खा सकती है और माना जाता है कि लगभग 90% – 99% बैक्टीरिया हट जाते हैं !
सूरज की रोशनी से पानी को साफ करना- इसमें साफ प्लास्टिक/कांच के डिब्बे/बोतल में पानी भरकर, 6 से 8 घंटे धूप में रखा जाता है, जिसे सूर्य प्रकाश में मौजूद अल्ट्रा वायलेट किरणें बैक्टीरिया/वायरस को जलाकर मार देती हैं !
लकड़ी/नारियल के कोयले से पानी फिल्टर करना- यह पानी की बदबू, रंग, केमिकल (Toxins) को सोख लेता है !
उबालकर साफ़ करना- सबसे पुरानी और सबसे आसान विधि है पानी को उबालकर, ठण्डा करके पीना, जिससे भी बहुत से हानिकारक कीटाणु तुरंत मर जाते हैं !

यहाँ ये भी बताना चाहेंगे कि, इस वर्ष “विश्व पर्यावरण दिवस” (World Environment Day 2026) के उपलक्ष्य पर संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरणीय संस्था “यू एन एनवायरनमेंट प्रोग्राम” (United Nations Environment Programme) ने “स्वयं बनें गोपाल” समूह को धन्यवाद देते हुए प्रशस्ति पत्र भेजा है, जो ठीक ऊपर फोटो के रूप में प्रकाशित है !
वर्ष 2019 में भी “विश्व पर्यावरण दिवस” के उपलक्ष्य पर इसी “यू एन एनवायरनमेंट प्रोग्राम” ने “स्वयं बनें गोपाल” समूह के प्रधान स्वयं सेवक (अध्यक्ष) परिमल पराशर जी को “वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे हीरो” चुना था, जिसके बारें में अधिक जानने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरणीय संस्था “यू एन एनवायरनमेंट प्रोग्राम” द्वारा “स्वयं बनें गोपाल” समूह के स्वयंसेवक को “वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे हीरो” चुना गया !
परिमल पराशर जी का नाम, इस 2026 वर्ष में, संयुक्त राष्ट्र संघ की खाद्य एवं कृषि संगठन “फ़ूड एंड एग्रीकल्चरल आर्गेनाइजेशन” के उपक्रम “ग्लोबल स्वायल पार्टनरशिप” की रिपोर्ट में भी प्रकाशित हुआ है जिसे देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- Fourteenth Session of the Global Soil Partnership Plenary Assembly !
आपको बताना चाहेंगे कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह, भूमि (मिट्टी या मृदा) के सरंक्षण व संवर्धन के वैश्विक अभियान “ग्लोबल स्वायल पार्टनरशिप” का वर्ष 2020 से पार्टनर है और इससे पहले भी इसकी रिपोर्ट्स में परिमल जी का नाम प्रकाशित हुआ है जिसे जानने के लिए कृपया यह आर्टिकल पढ़ें- विश्व पर्यावरण दिवस पर, जानिये स्वयं व समाज को भी जबरदस्त लाभान्वित कर सकने वाली आसान थ्योरी “चार बिना हार” को
अंततः सारांश रूप में कहा जा सकता है कि अगर समाज का हर व्यक्ति, रोज थोड़ा – थोड़ा पानी बचाने और रीसाइक्लिंग करने में मदद करे, तो निश्चित तौर पर पेय जल के अभाव की समस्या का पूर्ण निदान हो सकता है !
जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !
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