श्री कौशल किशोर माहेश्वरी, संभलपुर लिखते हैं कि हमारे बाबा महेश्वरी थे और दादी राबुत थीं। उनका गन्धर्व विवाह हुआ था। उनकी प्रेम गाथा को लिखकर अपने पूजनीय पूर्वजों की
मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर- मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर या मीनाक्षी अम्मां मन्दिर या केवल मीनाक्षी मन्दिर भारत के तमिल नाडु राज्य के मदुरई नगर, में स्थित एक ऐतिहासिक मन्दिर है। यह हिन्दू
श्री. रघुराथ प्रसाद बरनवाल, बलहज, लिखते हैं कि अखण्ड ज्योति के लोगों से प्रभावित होकर मैं गायत्री उपासना के मार्ग में बढ़ा। अति अल्प काल के जप में ही अपने
वन्य कुसुमों की झालरें सुख शीतल पवन से विकम्पित होकर चारों ओर झूल रही थीं। छोटे-छोटे झरनों की कुल्याएँ कतराती हुई बह रही थीं। लता-वितानों से ढँकी हुई प्राकृतिक गुफाएँ
श्री बलवन्त विष्णु नागदे, राजमहेन्द्री कहते हैं कि व्यापारी को फुरसत नहीं मिलती । हमकों बहुत काम रहता है। रात को दो बजे तक अक्सर काम करना पड़ता है। इसलिए
(भाई राजीव दीक्षित सही मायने में आधुनिक युग के निर्भीक कान्तिकारी थे जिन्होंने कानपुर आई आई टी से M. TECH और अन्य कई बड़े साइंस प्रोजेक्ट से जुड़ने के बावजूद
श्री मेघायती जी नगीना अपनी अनुभूति प्रकट करती हुई लिखती हैं कि गायत्री मन्त्र ईश्वर की उपासना के लिये मुख्य मन्त्र है। मेरा तो इस पर अति अटूट विश्वास और
ठा. जंगजीतसिंह राठोर, रानीपुरा, लिखते हैं कि हमारे ताऊजी एक अजनबी आदमी से कुछ जेवर सस्तेपन के लोभ में आकर खरीद लिया था। यह षडय़ंत्र हमारे एक शत्रु का था
उद्यान की शैल-माला के नीचे एक हरा-भरा छोटा-सा गाँव है। वसन्त का सुन्दर समीर उसे आलिंगन करके फूलों के सौरभ से उसके झोपड़ों को भर देता है। तलहटी के हिम-शीतल