देवी भक्तों का विश्व प्रसिद्ध धाम है उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विन्ध्य पहाड़ियों पर स्थित आदि शक्ति श्री दुर्गा जी का मन्दिर, जिसे दुनिया विन्ध्याचल मंदिर के नाम
प्राचीन भारत के ज्ञान विज्ञान के मूर्धन्य जानकार श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी बताते हैं की, ब्रह्माण्ड के निर्माता श्री ब्रह्मा जी ने गायत्री मन्त्र की अनन्त शक्ति पर अनुसन्धान
श्री वानर राज, श्री पवन पुत्र, श्री केशरी नन्दन, श्री अंजनी सुत, श्री सूर्य शिष्य, श्री कुबेर सुग्रीव व विभीषण सखा, श्री राम दास, हनुमान जी ने अत्यन्त शुभकारी दर्शन
शिवपुराण में यह वर्णन पाया जाता है कि महाराज शतानीक को दानी होने पर भी नरक-यातना भोगनी पड़ी थी। इसमें सन्देह नहीं कि महाराज शतानीक महादानी थे, किन्तु उनके बाद जब
श्रावस्ती नगरी में कृशागौतमी नाम की एक कन्या रहती थी। गौतमी उसका असली नाम था। काम करते-करते वह जल्दी थक जाती थी, अतएव लोग उसे कृशागौतमी के नाम से पुकारते
शास्त्र वर्णित कथानुसार एक बार अनेक ऋषि-मुनि बैठकर आत्मा और ब्रह्म के विषय में विचार-विमर्श करने लगे। बहुत विचार करने पर भी जब वे सहमत न हो पाये तब उन्होंने
महाभारत का युद्ध जीतने के बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने निष्कण्टक राज्य किया। अश्वमेध-सहित अनेक बृहद् यज्ञों का अनुष्ठान भी किया। संन्यास लेने का समय आया तो उन्होंने अपना सब राजपाट