अनन्त ब्रह्माण्ड अधीश्वरी का धाम : श्री विन्ध्याचल धाम

देवी भक्तों का विश्व प्रसिद्ध धाम है उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विन्ध्य पहाड़ियों पर स्थित आदि शक्ति श्री दुर्गा जी का मन्दिर, जिसे दुनिया विन्ध्याचल मंदिर के नाम

इस ब्रहमांड को बनाने में गायत्री मन्त्र इस्तेमाल हुआ है

प्राचीन भारत के ज्ञान विज्ञान के मूर्धन्य जानकार श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय जी बताते हैं की, ब्रह्माण्ड के निर्माता श्री ब्रह्मा जी ने गायत्री मन्त्र की अनन्त शक्ति पर अनुसन्धान

ये शरीर मरा तो, कारण शरीर जूझ गया (युग पुरुष के अथक प्रयास की महा गाथा)

युग पुरुष के पञ्च तत्वों का बना शरीर अपनी अन्तिम साँसे गिन रहा था ! समय था 2 जून 1990 (गायत्री जयंती) सुबह 8 बजे, गुरु माता जी का दाहिना

जब अन्तहीन परेशानियाँ आदमी को पागल करने लगें

भयंकर ठण्ड पड़े चाहे आतंकवादियों से जान का खतरा, कोई भी बाधा उस भक्त को माँ के पास पहुचने से नहीं रोक सकती जिसे माँ जगदम्बा वैष्णो देवी (Shakti Vaishno

जय हो संकट मोचक श्री बजरंगबली

श्री वानर राज, श्री पवन पुत्र, श्री केशरी नन्दन, श्री अंजनी सुत, श्री सूर्य शिष्य, श्री कुबेर सुग्रीव व विभीषण सखा, श्री राम दास, हनुमान जी ने अत्यन्त शुभकारी दर्शन

जब घूँघट में अपनी दाढ़ी मूछ छिपा ना सके भगवान भोले नाथ

भगवान् शिव से बड़ा कोई श्री विष्णु का भक्त नहीं, और भगवान् विष्णु से बड़ा कोई श्री शिव का भक्त नहीं है ! इसलिए भगवान् शिव सबसे बड़े वैष्णव और

हर रोम में करोड़ो ब्रह्माण्ड, हर ब्रह्माण्ड में असंख्य लोक

संसार का आकर्षण किसका दिमाग ना ख़राब कर दे ! माया इतनी प्रबल है कि एक से एक ज्ञानियों को संसार की सच्चाई देखने ही न दे ! एक बार

गलत कमाई रखे या दान करें नरक तो जाना ही पड़ेगा

शिवपुराण में यह वर्णन पाया जाता है कि महाराज शतानीक को दानी होने पर भी नरक-यातना भोगनी पड़ी थी। इसमें सन्देह नहीं कि महाराज शतानीक महादानी थे, किन्तु उनके बाद जब

24 घंटा साथ रहने वाली सबसे बड़ी वफादार; मौत

श्रावस्ती नगरी में कृशागौतमी नाम की एक कन्या रहती थी। गौतमी उसका असली नाम था। काम करते-करते वह जल्दी थक जाती थी, अतएव लोग उसे कृशागौतमी के नाम से पुकारते

रावण मरा तो बाद में लेकिन नींद तो माँ सीता के अपमान के बाद से ही उड़ गयी

पूजा पाठ, दान दक्षिणा, बड़े बड़े ताकतवर लोगों से दोस्ती सब कुछ अन्ततः खिलवाड़ साबित होता है अगर कोई अधर्म पर है ! अपने द्वारा किये गए पाप एक दिन

भोले नाथ के भोले पन का बहुत फायदा उठाया भक्तों ने

  कई अच्छे बुरे लोगों ने भोले भंडारी के भोलेपन का खूब फायदा उठाया है ! सबको पता है की वैसे तो श्री महादेव को दुनियादारी से कोई मतलब रहता

थोड़ा सावधान रहे तो शासन का सुख भी उठाये और परलोक भी सँवारे

शास्त्र वर्णित कथानुसार एक बार अनेक ऋषि-मुनि बैठकर आत्मा और ब्रह्म के विषय में विचार-विमर्श करने लगे। बहुत विचार करने पर भी जब वे सहमत न हो पाये तब उन्होंने

केवल हर सम्बन्धों रिश्तों को धर्मपूर्वक निभाने भर से ही स्वर्ग मिल जाता है

महाभारत का युद्ध जीतने के बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने निष्कण्टक राज्य किया। अश्वमेध-सहित अनेक बृहद् यज्ञों का अनुष्ठान भी किया। संन्यास लेने का समय आया तो उन्होंने अपना सब राजपाट

भक्त दुःख से छटपटायेगा, तो मैहर वाली माँ बेचैन हो उठेगी

ममता की सागर माँ दुर्गा जहाँ प्रत्यक्ष रूप से वास करती हैं उस पवित्र धाम का नाम है मैहर धाम ! पूरे विश्व से देवी के भक्त यहाँ पर अपनी