कविताएँ – दर्शन सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 वह चंद्रहीन थी एक रात,   जिसमें सोया था स्वच्छ प्रात   उजले-उजले तारक झलमल,   प्रतिबिंबित सरिता वक्षस्थल,     धारा बह जाती बिंब अटल,   खुलता था

कहानी – मृतक-भोज – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

सेठ रामनाथ ने रोग-शय्या पर पड़े-पड़े निराशापूर्ण दृष्टि से अपनी स्त्री सुशीला की ओर देखकर कहा, ‘मैं बड़ा अभागा हूँ, शीला। मेरे साथ तुम्हें सदैव ही दुख भोगना पड़ा। जब

श्री राधा रहस्य, कौन जानता है ?

ब्रज धाम में किसी राजा का नहीं बल्कि रानी का राज चलता है ! और ये रानी कोई और नहीं, हमारी प्यारी लाडली सरकार श्री राधा रानी जी हैं !

गणपति बाप्पा मोरया

आदिशक्ति माँ पार्वती को अपनी बाल लीलाओं से हँसाने वाले, श्री महादेव के परम लाडले, भगवान कार्तिकेय के परम आज्ञाकारी छोटे भाई, लड्डू को बहुत पसंद करने वाले, चूहे पर

कहानी – सत्याग्रह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

हिज एक्सेलेंसी वाइसराय बनारस आ रहे थे। सरकारी कर्मचारी, छोटे से बड़े तक, उनके स्वागत की तैयारियाँ कर रहे थे। इधर काँग्रेस ने शहर में हड़ताल मनाने की सूचना दे

कहानी – प्रेरणा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधामी कोई लड़का न था, बल्कि यों कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मुझे ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से साबका न पड़ा

कविताएँ – लज्जा सर्ग – कामायनी (लेखक – जयशंकर प्रसाद )

भाग-1 “कोमल किसलय के अंचल में   नन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सी,   गोधूली के धूमिल पट में   दीपक के स्वर में दिपती-सी।     मंजुल स्वप्नों की विस्मृति में