कहानी – गृह-नीति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 जब माँ, बेटे से बहू की शिकायतों का दफ्तर खोल देती है और यह सिलसिला किसी तरह खत्म होते नजर नहीं आता, तो बेटा उकता जाता है और दिन-भर की
कविता – सुआ खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 पदमावति तहँ खेल दुलारी । सुआ मँदिर महँ देखि मजारी॥ कहेसि चलौं जौलहि तन पाँखा । जिउ लै उड़ा ताकि बनडाँखा॥ जाइ परा बा खंड जिउ लीन्हें । मिले
कहानी – चमत्कार – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 बी.ए. पास करने के बाद चन्द्रप्रकाश को एक टयूशन करने के सिवा और कुछ न सूझा। उसकी माता पहले ही मर चुकी थी, इसी साल पिता का भी देहान्त हो
कविता – सिंहलद्वीप वर्णन खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 सिंघलद्वीप कथा अब गावौं। औ सो पदमिनि बरनि सुनावौं॥ निरमल दरपन भाँति बिसेखा। जो जेहि रूप सो तैसइ देखा॥ धानि सो दीप जहँ दीपक बारी। औ पदमिनि जो दई
कहानी – नया विवाह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 हमारी देह पुरानी है, लेकिन इसमें सदैव नया रक्त दौड़ता रहता है। नये रक्त के प्रवाह पर ही हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी की इस चिरन्तन व्यवस्था में यह
कविता – स्तुतिखंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 सुमिरौं आदि एक करतारू । जेहि जिउ दीन्ह कीन्ह संसारू॥ कीन्हेसि प्रथम जोति परकासू । कीन्हेसि तेहि पिरीत कैलासू॥ कीन्हेसि अगिनि, पवन, जल खेहा । कीन्हेसि बहुतै रंग उरेहा॥
कहानी – बालक – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 गंगू को लोग ब्राह्मण कहते हैं और वह अपने को ब्राह्मण समझता भी है। मेरे सईस और खिदमतगार मुझे दूर से सलाम करते हैं। गंगू मुझे कभी सलाम नहीं करता।
कविता – मानसरोदक खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 एक दिवस पून्यो तिथि आई । मानसरोदक चली नहाई॥ पदमावति सब सखी बुलाई । जनु फुलवारि सबै चलि आई॥ कोइ चंपा कोइ कुंद सहेली । कोइ सु केत, करना,
कहानी – नेऊर – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 आकाश में चांदी के पहाड़ भाग रहे थे, टकरा रहे थे गले मिल रहें थे, जैसे सूर्य मेघ संग्राम छिड़ा हुआ हो। कभी छाया हो जाती थी कभी तेज धूप
कविता – राजा-सुआ संवाद खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 राजै कहा सत्य कहु सूआ । बिनु सत जस सेंवर कर भूआ॥ होइ मुख रात सत्य के बाता । जहाँ सत्य तहँ धारम सँघाता॥ बाँधाो सिहिटि अहै सत केरी
कहानी – विश्वास – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 उन दिनों मिस जोशी बम्बई सभ्य-समाज की राधिका थी। थी तो वह एक छोटी-सी कन्या-पाठशाला की अध्यापिका पर उसका ठाट-बाट, मान-सम्मान बड़ी-बड़ी धन-रानियों को भी लज्जित करता था। वह एक
कविता – रत्नसेन जन्म खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 चित्रासेन चितउर गढ़ राजा । कै गढ़ कोट चित्रा सम साजा॥ तेहि कुल रतनसेन उजियारा । धानि जननी जनमा अस बारा॥ पंडित गुनि सामुद्रिक देखा । देखि रूप औ
कहानी – जादू – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 नीला तुमने उसे क्यों लिखा ? ‘ ‘मीना क़िसको ? ‘ ‘उसी को ?’ ‘मैं नहीं समझती !’ ‘खूब समझती हो ! जिस आदमी ने मेरा अपमान
रत्नसेन जन्म खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी की कविता October 16, 2021April 15, 2015 चितउरगढ़ कर एक बनिजारा । सिंघलदीप चला बैपारा॥ बाम्हन हुत एक निपट भिखारी । सो पुनि चला चलत बैपारी॥ ऋन काहू सन लीन्हेसि काढ़ी । मकु तहँ गए होइ
कहानी – मिस पद्मा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 13, 2021April 15, 2015 कानून में अच्छी सफलता प्राप्त कर लेने के बाद मिस पद्मा को एक नया अनुभव हुआ, वह था जीवन का सूनापन। विवाह को उसने एक अप्राकृतिक बंधन समझा था और
कविता – नागमती सुआ संवाद खंड – पदमावत – मलिक मुहम्मद जायसी – (संपादन – रामचंद्र शुक्ल ) March 13, 2021April 15, 2015 दिन दस पाँच तहाँ जो भए । राजा कतहुँ अहेरै गए॥ नागमती रुपवंती रानी । सब रनिवास पाट परधाानी॥ कै सिँगार कर दरपन लीन्हा । दरसन देखि गरब जिउ