कहानी – विराम-चिह्न (लेखक – जयशंकर प्रसाद) August 5, 2015January 2, 2015 देव-मन्दिर के सिंहद्वार से कुछ दूर हट कर वह छोटी-सी दुकान थी। सुपारी के घने कुञ्ज के नीचे एक मैले कपड़े पर सूखी हुई धार में तीन-चार केले, चार कच्चे
आत्मकथा – असंबल गान – (लेखक – पांडेय बेचन शर्मा उग्र) February 11, 2021January 1, 2015 उपदेशक— तेरी कन्था के कोने में कुछ संबल, या संशय है, अरे पथिक, होने में? तेरी. यदि कुछ हो न ठहरता जा ना, कन्था अपनी भरता जा ना, करम दिखा
कहानी – पशु से मनुष्य – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) August 5, 2015January 1, 2015 दुर्गा माली डॉक्टर मेहरा, बार-ऐट ला, के यहाँ नौकर था। पाँच रुपये मासिक वेतन पाता था। उसके घर में स्त्री और दो-तीन छोटे बच्चे थे। स्त्री पड़ोसियों के लिए गेहूँ