वह आँधी सब जगह आयी, रूस, जर्मनी, आस्ट्रिया, हंगरी, टर्की, चीन सब देशों के वन-उपवन उसके झोंके से कंपित हो उठे। प्रजातंत्र की वह आँधी कई देशों में आयी और
संसार की स्वाधीनता के विकास का इतिहास उस अमूल्य रक्त से लिखा हुआ है, जिसे संसार के भिन्न-भिन्न भाग के कर्तव्यशील वीर पुरुषों ने स्वत्वों की रणभूमि में करोड़ों मूक
कुछ समय से हमारे अधिकांश नौजवान जिस वातावरण में है, उससे वे संतुष्ट नहीं है। निष्क्रियता में मुर्दों से बाजी लगाने वाले इस देश के युवक इस समय परिवर्तन और
मेज्जिनी का आदेश ‘हममें से प्रत्येक का कर्तव्य है कि वह अपनी आत्मा को एक देवालय के समान पवित्र बनावे। उससे अहंकार को दूर भगा दे और सच्चे धार्मिक भाव
राष्ट्र महलों में नहीं रहता। प्रकृत राष्ट्र के निवास-स्थल वे अगणित झोंपड़े हैं, जो गाँवों और पुरवों में फैले हुए खुले आकाश के देदीप्यमान सूर्य और शीतल चन्द्र और तारागण
8 अप्रैल से 15 अप्रैल तक देश के कितने ही स्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा का सप्ताह मनाया जायेगा। इन उत्सवों का मतलब यह होगा कि लोग राष्ट्रीय शिक्षा की बात
कवि-श्रेष्ठ मिल्टन की उक्ति है कि शान्तिकाल की विजय युद्धकाल की विजयी से कम नहीं होती। हमारा विचार है कि शान्तिकाल की विजय अधिक स्थायी, अधिक गौरवप्रद और अधिक वास्तविक
वर्तमान युग अधिकारों का युग है। संसार के कोने-कोने से अधिकारों की ध्वनि उठ रही है। अत्याचारों से पीड़ित व्यक्तियों और समूहों से लेकर स्वतंत्र और शक्तिसंपन्न व्यक्तियों और समूहों
अनुत्तरदायी? जल्दबाज? अधीर, आदर्शवादी? लुटेरे? डाकू? हत्यारे? अरे, ओ दुनियादार, तू किस नाम से, किस गाली से विभूषित करना चाहता है? वे मस्त हैं। वे दीवाने हैं। वे इस दुनिया
वैसे तो हमारा देश-भर शिक्षा में, मनुष्य की बाहरी उन्नति के इस परमावश्यक साधन के विषय में, संसार-भर के सभ्य देशों से बहुत पिछड़ा हुआ है, परंतु देश में भी