श्री अम्बाशंक गोविन्द जी व्यास, जूनागढ़ ने लिखा है कि परिस्थितियोंवश में स्कूली शिक्षा बहुत ही कम प्राप्त कर सका। कक्षा चार उत्तीर्ण करने के बाद रोटी कमाने की चिन्ता
मैं ‘संगमहाल’ का कर्मचारी था। उन दिनों मुझे विन्ध्य शैल-माला के एक उजाड़ स्थान में सरकारी काम से जाना पड़ा। भयानक वन-खण्ड के बीच, पहाड़ी से हटकर एक छोटी-सी डाक
पं. श्रीकृष्ण शुक्ल, देहली का कहा है कि गायत्री का आश्रय से मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है। कोई वस्तु नहीं जिसे गायत्री साधक प्राप्त न कर सके। अनुभवी
पं. राधेमोहन मिश्र, वैघ बहरायच, लिखते हैं कि मेरी प्रकृति अपनी बाल्यावस्था से ही आध्यात्मवाद की ओर रही। मुझे ऐसे मित्र तथा मार्ग-प्रदर्शक मिलते गये जिनसे और सहायता मिलती गयी।
श्री गोकुलचन्द सक्सेना, खडग़पुर, लिखते हैं कि हमारे लोको दफ्तर के हैडक्लर्क और सुपरिटेण्डेण्ट से एक बार मेरी गरमा-गरम बहस हो गई। आपस में अशिष्ठ और अवांछनीय शब्दों का भी
आदि शंकराचार्य- हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार इनको भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत
श्री विनोद बिहारी गर्ग, विशनगढ़ का कहना है कि आजकल शहरों में बच्चों की सुरक्षा भी एक पेचीदा समस्या है। लड़के स्कूल में पढऩे जाते हैं, वहां कोई जन्मजात दुष्ट
महर्षि अरविन्द – इनका मूल नाम अरबिंदो घोष है । आधुनिक काल में भारत में अनेक महान क्रांतिकारी और योगी हुए हैं, अरबिंदो घोष उनमें अद्वितीय हैं। अरविंदो घोष कवि