श्री हरमानभाई पटेल, सदनपुरा, लिखते हैं कि गायत्री माता द्वारा उपार्जित शक्ति का मैंने प्रथम बार उपयोग किया और वह बहुत ही सफल रहा। मेरे बड़े भाई डाहभाई के पेट
आयुर्वेद इस भूमण्डल में स्वास्थ्य एवं रोग निवारण के ज्ञान का सर्वप्रथम स्रोत है। वैसे तो यह ज्ञान प्रकृति की उत्पत्ति के साथ ही उत्पन्न हुआ लेकिन इसका नामकरण भगवान
इनकी आराधना से भक्त को 8 महा सिद्धियाँ – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व और 9 निधियों की प्राप्ति होती है ! नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री
कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत
मातृ शक्ति श्री कूष्मांडा देवी का ध्यान एक गर्भवती स्त्री के रूप में किया गया है ! अपने उदर (पेट) से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें
जोधपुर के महाराज जसवन्तसिंह की सेना में आशकरण नाम के एक राजपूत सेनापति थे, बड़े सच्चे, वीर, शीलवान् और परमार्थी। उनकी बहादुरी की इतनी धाक थी, कि दुश्मन उनके नाम