(विशेष अवसर पर गोलोक वासी ऋषि सत्ता की अत्यंत दयामयी कृपा से प्राप्त आपबीती दुर्लभ अनुभव का अंश विवरण)- मेरे अपने पार्थिव देह को छोड़ने अर्थात मृत्यु के बाद जब
{नीचे सर्वप्रथम श्री परमहंस योगानंद की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक “एक योगी की आत्मकथा” (जो फिलोसौफिकल लायब्रेरी न्यूयार्क के 1946 मूल संस्करण का पुनर्मुद्रण है) के पेज नम्बर 431 और 513
मुख्यतः भक्ति योग में शीघ्र सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले आदरणीय जिज्ञासुओं के लिए यह लेख प्रस्तुत है ! इसमें सबसे पहली बात यह समझने की जरूरत है
लम्बे समय से ब्रह्मांड से सम्बंधित सभी पहलुओं पर रिसर्च करने वाले, “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए विद्वान रिसर्चर श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय (Doctor Saurabh Upadhyay) के निजी
{This article is English version of previously published article titled – जिसे हम उल्कापिंड समझ रहें हैं, वह कुछ और भी तो हो सकता है which was published on 30th
अब आधुनिक वेरी इम्मेच्योर साइंस के वैज्ञानिक व चिकित्सक भी अनंत वर्ष पुराने परम आदरणीय हिन्दू धर्म की सभी बातों की तरह, इस बात को भी स्वीकारने लगे हैं कि
पूरे विश्व में स्थित “स्वयं बनें गोपाल” समूह के सभी आदरणीय पाठकों को “स्वयं बनें गोपाल” समूह का हार्दिक प्रणाम, दिनांक 31 October 2017 अर्थात हरि प्रबोधनी एकादशी के शुभ
एच.आई.वी/एड्स (human immunodeficiency virus, acquired immune deficiency syndrome) व कैंसर जैसी घातक बीमारियों के उपचार के सम्बन्ध में मूर्धन्य योग व अन्य विशेषज्ञों की बेशकीमती सलाह, के अतिरिक्त परम आदरणीय
ट्यूबरक्लोसिस (टी बी, Tuberculosis or TB) एक तकलीफदायक बीमारी है, जिसका इलाज आज के मॉडर्न एलोपैथिक साइंस में अब भी थोड़ा अनिश्चित है क्योंकि गिनती की कुछ चंद एलोपैथिक दवाएं
लम्बे समय से ब्रह्मांड से सम्बंधित सभी पहलुओं पर रिसर्च करने वाले, “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए विद्वान रिसर्चर श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय (Doctor Saurabh Upadhyay) के निजी
आईये जानते हैं सबसे पहले कि परम आदरणीय हिन्दू धर्म के अनुसार, पिता कहतें किसे हैं– पिता- ‘पा रक्षणे’ धातु से ‘पिता’ शब्द निष्पन्न होता है अर्थात ‘य: पाति स