
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,
यह गजब की विडंबना है कि इंसान अपने स्वास्थ्य के लिए तो बहुत सजग रहता है, लेकिन इंसान को स्वस्थ बनाने के लिए जो परम आवश्यक चीज होती है यानी “अन्न का स्वास्थ्य” के प्रति ना तो इंसान को कोई जानकारी होती है और ना ही कोई रुचि, जबकि अन्न की प्रचंड महिमा के बारें में तो प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक ग्रंथों में, लिखा हुआ है कि “अन्नं जीवनस्य आधारः अस्ति” (अर्थात अन्न ही जीवन का आधार होता है) !
अन्न (जिसे आम बोलचाल की भाषा में अनाज भी कहते हैं) का मतलब होता है, पेड़ – पौधों से प्राप्त होने वाला भोजन ! अब ये तो सबको पता है कि अगर पेड़ – पौधे ना हो, तो सभी माँसाहारी जीव भी मर जाएंगे क्योकि मांसाहारी जीव, जिन दूसरों जीवों का मारकर खातें हैं वे किसी ना किसी माध्यम से शाकाहारी जीवों पर निर्भर करतें हैं ! इसलिए अगर धरती से पेड़ – पौधे समाप्त हो जाएँ तो धरती भी धीरे – धीरे जीवन शून्य हो जायेगी !
अब बात करतें हैं कि आखिर किन वजहों से धरती से पेड़ – पौधे समाप्त हो सकतें हैं ? अगर मानवों के पेड़ काटकर बेचने की लालच को छोड़ दिया जाए तो धरती से पेड़ – पौधे समाप्त होने के 2 सबसे बड़े कारण है- पेड़ पौधों का विभिन्न हानिकारक केमिकल्स से जमीन या वायु के माध्यम से सम्पर्क में आना, और पेड़ पौधों को विभिन्न हानिकारक कीड़ों, रोगाणुओं, फंगस आदि एवं उचित पोषण की कमी को झेलना ! अब पेड़ – पौधों को कैसे हानिकारक केमिकल्स, बिमारियों और पोषण की कमी से बचाया जा सकता है, इसके बारें में इस आर्टिकल के नीचे विशद विवेचना की गयी है, लेकिन यहाँ सबसे पहले ध्यान देने वाली बात यह है कि ………. इंसान का स्वास्थ्य, पूरी तरह से निर्भर करता है, पेड़ – पौधों के स्वास्थ्य पर !
यानी पेड़ – पौधों का स्वास्थ्य जितना अच्छा होगा, इंसान उतना ही ज्यादा स्वस्थ और मजबूत होगा, जिसके सबसे बड़े उदाहरण हैं,- घने जंगलों (जहाँ पेड़ – पौधे एकदम स्वस्थ होतें हैं) में रहने वाले आदिवासी लोग जिनके पास बिजली, कंप्यूटर, इंटरनेट, वॉटर फ़िल्टर, मॉडर्न दवाएं जैसी सुविधाएं तो बिल्कुल नहीं होती है, लेकिन वो शारीरिक रूप से इतने ज्यादा स्वस्थ मजबूत होतें हैं कि उनकी बराबरी शहरी लोग कभी नहीं कर सकते हैं !
पूरी दुनिया में “पेड़ – पौधों के स्वास्थ्य” का महत्व और उनकी सुरक्षा के प्रति जन जागृति बढ़ाई जा सके ………. इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ भी हर वर्ष 12 मई को “इंटरनेशनल डे ऑफ़ प्लांट हेल्थ” (International Day of Plant Health) मनाता है ………. पौधों के स्वास्थ्य का महत्व, निम्नलखित इंग्लिश और हिंदी कहावतों से भी समझा जा सकता है-
” Healthy Plants, Healthy Planet ”
“ जब पौधे मुस्कुराते हैं, तभी धरती हरी भरी नज़र आती है ”
मतलब, जहाँ एक तरफ ख़राब पौधे, समाज में भुखमरी, गरीबी, बीमारी, आर्थिक संकट जैसी भीषण समस्यायें पैदा करतें हैं ……… वहीँ दूसरी तरफ स्वस्थ पौधे ही हम मानवों के भोजन का 80% स्रोत हैं और साथ ही वे ऑक्सीजन, पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता आदि को भी बनाए रखने के लिए निहायत जरूरी हैं !
अतः बिना स्वस्थ पौधों के, स्वस्थ मानव जीवन की कल्पना मुश्किल है ………. और यही जागरूकता फैलाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र संघ हर वर्ष 12 मई को “इंटरनेशनल डे ऑफ़ प्लांट हेल्थ” मनाता है, जिसका समन्वय संयुक्त राष्ट्र की संस्था “फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन” (Food and Agriculture Organization – FAO) करती है (“स्वयं बनें गोपाल” समूह, FAO के उपक्रम “ग्लोबल स्वायल पार्टनरशिप” के साथ – साथ संयुक्त राष्ट्र संघ” के कई अन्य पर्यावरणीय उपक्रमों से भी जुड़ चुका है जिनके बारे में अधिक जानने के लिए कृपया इन 2 लिंक्स पर क्लिक करें- संयुक्त राष्ट्र संघ के नए विश्वप्रसिद्ध उपक्रम का पार्टनर बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह ……… और ……… जानिये ➤ “संयुक्त राष्ट्र संघ” में “स्वयं बनें गोपाल” समूह की बढ़ती भागीदारी) !
पूरे विश्व से मात्र 6 पर्यावरणीय कार्यक्रम ही वर्ष 2026 “इंटरनेशनल डे ऑफ़ प्लांट हेल्थ” पर संयुक्त राष्ट्र संघ की इस वेबसाइट पर प्रकाशित हुए हैं, जिसमें से एक आपका अपना “स्वयं बनें गोपाल” समूह का है, जिसे देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.fao.org/plant-health-day/events/events-list/en

यहाँ यह भी बताना चाहेंगे कि पिछले 2 वर्षों (2025 व 2026) में, पूरे भारत से केवल “स्वयं बनें गोपाल” समूह ही एकमात्र अकेली ऐसी भारतीय संस्था है जो संयुक्त राष्ट्र संघ की इस वेबसाइट में प्रकाशित हुई है ! साथ ही इस वेबसाइट द्वारा इन 2 वर्षों में प्रकाशित सभी कार्यक्रमों में, “स्वयं बनें गोपाल” समूह को छोड़कर, बाकी लगभग सभी कार्यक्रम सरकारी सहयोग द्वारा संचालित हैं !
अतः संयुक्त राष्ट्र संघ की इस वेबसाइट द्वारा प्रकाशित सभी कार्यक्रमों (यानी इस वर्ष 2026 में प्रकाशित 6 कार्यक्रम और पिछले वर्ष 2025 में प्रकाशित 10 कार्यक्रमों) को करने वाली संस्थाओं का नाम एक साथ देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.fao.org/plant-health-day/events/events-list/en या उन सभी नामों को निम्नलिखित लिस्ट में भी देखा जा सकता हैं-
• सल्तनत ऑफ ओमान (Sultanate of Oman, represented by Ministry of Agriculture and Water Resources)
• पैसिफिक प्लांट प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन, फिजी (Pacific Plant Protection Organisation, Fiji)
• केन्या प्लांट हेल्थ इंस्पेक्टोरेट सर्विस 1 (Kenya Plant Health Inspectorate Service )
• स्वयं बनें गोपाल (Svyam Bane Gopal)
• नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ़ प्लांट हेल्थ एंड बॉयोसिक्योरिटी मोजांबिक (National Directorate of Plant Health and Biosecurity Mozambique)
• केन्या प्लांट हेल्थ इंस्पेक्टोरेट सर्विस 2 (Kenya Plant Health Inspectorate Service)
• इटैलियन एसोसिएशन फॉर प्लांट प्रोटेक्शन (Italian Association for Plant Protection)
• नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन फॉर केन्या (KEPHIS – National Plant Protection Organization for Kenya)
• नेशनल प्लांट प्रोटेक्शन आर्गेनाइजेशन फॉर चेक गणराज्य (National Plant Protection Organization of Czechia – ÚKZÚZ)
• एजेंसी फॉर रेगुलेशन एंड कण्ट्रोल ऑफ़ प्लांट एंड एनिमल हेल्थ इक्वाडोर (Agency for Regulation and Control of Plant and Animal Health)
• इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स, नार्मन मैनले इंटरनेशनल एयरपोर्ट एंड सैंगेस्टर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (International Airports, Norman Manley International Airport and Sangster International Airport – Kingston Jamaica)
• वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन द्वारा STDF (STDF Secretariat housed in World Trade Organization )
• प्लांट प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट, मंगोलिया सरकार उपक्रम (Plant Protection Department, Government Implementing Agency, Mongolia)
• ऑस्ट्रेलियन रिसर्च कौंसिल (Australian Research Council)
• डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर, एंड फॉरेस्ट्री कैनबेरा ऑस्ट्रेलिया (Department of Agriculture, Fisheries and Forestry – Canberra Australia)
• फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन, आई पी पी सी (FAO , IPPC – FAO , IPPC)

आईये अब बात करतें हैं उन प्राकृतिक तरीकों की जिनसे हर तरह के पेड़ – पौधे हमेशा स्वस्थ बने रह सकते हैं ! इसी संदर्भ में याद दिलाना चाहेंगे कि अभी कुछ ही दिन पहले, भारतवर्ष के परम बुद्धिमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी देशहित में आवाहन किया है स्वदेशी व प्राकृतिक तकनीकियों को ही अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए ताकि विदेशी वस्तुओं/तकनीकियों का कम से कम आयात करना पड़े (अधिक जानकारी के लिए कृपया यह न्यूज़ पढ़ें- प्राकृतिक खेती और केमिकल-फ्री उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का बन सकते हैं “हाईवे”: पीएम मोदी) !
इसलिए अब हर भारतीय को इस राष्ट्रधर्म पर विशेष तवज्जो देने की जरूरत है कि हम जो कुछ भी खाएं/पीएं/पहने/इस्तेमाल करें, वो सब कुछ स्वदेशी व प्राकृतिक तरीकों से बना हो ताकि वो वापस आसानी से प्रकृति में विलीन हो सके ! अब पौधों को केमिकल्स फ्री यानी प्राकृतिक तरीकों से कैसे रोग विहीन रखा जा सकता हैं, उन्हें समझने की कोशिश करते हैं !
वास्तव में, विभिन्न तरह कीट (Pests- टिड्डी दल, सुंडी, विभिन्न प्रकार के भृंग – beetles) , रोगाणु (Pathogens- बैक्टीरिया, वायरस) , फंगस (Fungus/Disease) आदि हर साल 20 – 40% फसल नुकसान कर देते हैं ! इन सभी समस्याओं का समाधान हानिकारक केमिकल्स की जगह, सिर्फ प्राकृतिक तरीकों से कैसे किया जा सकता है, उन्ही लाभकारी जानकारियों के बारें में “स्वयं बनें गोपाल” समूह ने अपने पूर्व के कई आर्टिकल्स में आसान तरीके से समझाया है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण आर्टिकल पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- विश्व पर्यावरण दिवस पर, जानिये स्वयं व समाज को भी जबरदस्त लाभान्वित कर सकने वाली आसान थ्योरी “चार बिना हार” को
उपर्युक्त आर्टिकल में सारांश रूप में यही 2 बातें समझायी गयीं है- (1) दुनिया का सबसे उपजाऊ फ़र्टिलाइज़र (खाद)- भारतीय देशी गाय माँ के गोबर की मदद से बनता है (देशी गाय माँ की प्रचंड महिमा जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ बेहद उपजाऊ खेती – सुंदर स्वास्थ्य – महापुण्य के साथ सारी मनोकामनायें, कैसे पूरी कर सकतीं हैं श्री कृष्ण माता अर्थात भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ) ……………. (2) दुनिया का सबसे बढ़िया प्राकृतिक पेस्टिसाइड (कीटनाशक)- गोमूत्र (और कुछ पत्तियों जैसे- नीम, तुलसी, मदार – आक, करंज, धतूरा, बेशर्म – निर्गुंडी की पत्तियों के अलावा, फिटकरी एवं सब्जी मसाले के विभिन्न घटक जैसे- लौंग, लहसुन, प्याज, अदरक, हल्दी, , हरी – लाल – काली मिर्च, नीम्बू, दालचीनी, तेजपत्ता, जावित्री, जायफल आदि) के मिश्रण से बनता है !
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अनंत वर्ष पुराने आयुर्वेद की सलाह पर ही विभिन्न जड़ीबूटियों को सब्जी मसाले के रूप में उपयोग किया जाता है क्योकि सब्जी मसाले वाली जड़ीबूटियां का एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल गुण, ना केवल फसलों में लगने वाले रोगाणुओं को मारने में सक्षम हैं, बल्कि भोजन के रूप में शरीर के अंदर जाने पर विभिन्न बिमारियों के रोगाणुओं को भी मारने में सक्षम है (उदाहरण के तौर पर दालचीनी मसाला जिसे लेने के लिए सिकंदर भारत आया था, वही दालचीनी मिश्र के पिरामिडों में हजारो साल से सुरक्षित पड़ी ममी से भी लपेटी हुई पायी गई क्योकि दालचीनी, शरीर में बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकती हैं) !
लेकिन आजकल मसालों के नाम पर जो मिलावटी खतरनाक केमिकल्स मार्केट में बिक रहें है, उसको खाने से आदमी सिर्फ बीमार ही पड़ता है इसलिए यथासम्भव सिर्फ खड़ा मसाला खरीदकर, घर में पीसकर इस्तेमाल करना चाहिए या बाबा रामदेव की पतंजलि जैसी विश्वसनीय कम्पनीज़ का ही मसाला खरीदकर इस्तेमाल करना चाहिए !

इस अवसर पर, आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों और देशी गाय माँ के गोबर – गोमूत्र की प्रचंड ताकत का एक और उदाहरण प्रस्तुत है ……… जिसे खोजा है “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े शोधकर्ताओं ने, अपने वर्षों के अथक मेहनत युक्त रिसर्च से ……… और वो खोज है- एक अद्भुत प्राकृतिक सोल्युशन (विलयन) ……… जो बना है सिर्फ आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों और गोबर – गोमूत्र आदि के विशेष फार्मूला (विधि) से ……… और वो प्राकृतिक सोल्युशन इतना पॉवरफुल है कि ……… उसकी बहुत थोड़ी सी मात्रा को विशेष तरीके से किसी भी तरह के कार्बनिक पदार्थों (जैसे- कृषि अपशिष्ट, गोबर, घरेलू सब्जियों फलों के छिलके कचरे, जूठन बासी खाना आदि – Soil Organic Matter) पर डालने से ……… वो कार्बनिक पदार्थ तेजी से अपघटित होने लगता है ……… जिसकी वजह से उन कार्बनिक पदार्थों से बनने वाली खाद, सालों में तैयार होने की जगह, मात्र कुछ महीनों में ही तैयार हो जाती है, वो भी उच्च गुणवत्ता युक्त जैविक खाद (Compost) के रूप में ……… फिर उस जैविक खाद को बंजर जमीन में डालने से ……… बंजर जमीन भी काफी कम समय में, जबरदस्त उपजाऊ बनना शुरू हो जाती है !
यह हमेशा याद रखने की जरूरत है कि कोई जमीन जितनी ज्यादा स्वस्थ यानी उपजाऊ होगी, उस जमीन में उगने वाले पौधे उतने ही ज्यादा स्वस्थ यानी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले होंगे ……………. और यही कैरेक्टरिस्टिक हमने चरितार्थ होते हुए देखा हैं हमारे शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किये गए प्राकृतिक सोल्युशन का प्रयोग किसी बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर करने पर ……………. क्योकि इससे ना केवल जमीन की उपजाऊ क्षमता में आश्चर्यजनक सुधार हुआ, बल्कि उस जमीन में उगने वाले पौधो का स्वास्थ्य भी काफी बेहतर हुआ !
और हमने ऐसा अद्भुत एक्सपेरिमेंट भी सफल होते हुए देखा है कि बारिश के मौसम की शुरुआत में ……………. हमारे प्राकृतिक सोल्युशन के साथ, मुफ्त में हर जगह मिलने वाले प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थों (जैसे- सब्जी मंडियों की बिना बिकी हुई सड़ी गली सब्जियां – फल, मंदिरों से निकलने वाले फूल माला, धान की पराली, गोबर आदि) को मिलाकर किसी बंजर जमीन पर, मोटी परत बिछाकर छोड़ देने पर ……………. मतलब उस बंजर जमीन में ना तो किसी भी अन्य तरह का रासायनिक या प्राकृतिक खाद/उर्वरक डाला गया, और ना ही किसी भी तरह का बीज/पौधा/जड़ बोया गया, और ना ही उस जमीन की कोई निराई/गुड़ाई या किसी भी अन्य तरह की देखभाल की गयी ……………. तब भी अगले कुछ महीने में ही उस बंजर जमीन में, अपने आप ना जाने कितने किस्म के देशी पेड़ – पौधे उगने शुरू हो गए, जिससे वहां अपने आप भांति – भांति की चिड़ियाँ भी आनी शुरू हो गयी थी ……………. लेकिन जैसा की भारत की वर्षो पुरानी रूढ़िवादी मानसिकता का ऐसा प्रभाव भी देखने को मिलता है कि किसी बंजर जमीन की उपजाऊ क्षमता प्राकृतिक तरीके से बढ़ने के बावजूद भी, उसमें फिर से रासायनिक खादों व कीटनाशकों द्वारा खेती शुरू हो जाती हैं, जिसकी वजह से वो जमीन वापस बंजर बनने लगती है !
शास्त्रों के अनुसार एक पेड़ लगाना और उसकी रक्षा करना, दस सद्गुणी पुत्रों का पालन करने के बराबर पुण्यदायी होता है क्योकि जैसे एक सद्गुणी पुत्र किसी न किसी माध्यम से समाज का भला आजीवन करता रहता है, ठीक उसी तरह एक पेड़ जब तक जीवित रहता है, तब तक उससे निकलने वाली बेशकीमती ऑक्सीजन, उस पर रहने वाले पक्षी, उसकी छाया में बैठने वाले जीव और राहगीर भी, उस पेड़ लगाने वाले को अनमोल आशीर्वाद देते रहते हैं, जिससे कई यज्ञों का पुण्य प्राप्त होता है !
शायद इन्ही वजहों से प्राचीन काल से एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है कि “उत्तम खेती, मध्यम बान, अधम चाकरी” जिसका अर्थ है कि खेती करना सबसे सम्मानजनक काम है, उसके बाद व्यापार करना, जबकि नौकरी करना सबसे छोटा काम है, चाहे वो नौकरी कितनी भी बड़ी पद पर हो ! लेकिन आज के जमाने में इसका ठीक उल्टा हो गया है क्योकि कई किसानो के लिए खेती करना, अब बिल्कुल प्रॉफिटेबल नहीं रहा है !
खेती में प्रॉफिट इसलिए नहीं मिलता है क्योकि केमिकल्स युक्त फ़र्टिलाइज़र व पेस्टिसाइड्स इतने महंगे हो चुके हैं कि किसान की सारी कमाई इन्ही को खरीदने में खत्म हो जा रही है और ऊपर से केमिकल्स का प्रयोग करने से जमीन की उपजाऊ क्षमता हर साल कम होती जा रही है जिससे हर साल फर्टिलाइज़र्स का खर्चा पहले से ज्यादा बढ़ता जा रहा है और साथ ही पेस्टिसाइड्स का भी खर्चा बढ़ता जा रहा है, क्योकि अगर जमीन, कमजोर हो तो पौधे भी कमजोर पैदा होते हैं जिन्हे आसानी से कोई रोग लग जाता है ! अतः खेती को प्राकृतिक तरीके से करना, एक ऐसे अक्षय पात्र की तरह है, जो मुफ्त में हर साल आश्चर्यजनक कमाई करवा सकता है !

यहाँ पर हमारे बेहद दूरदर्शी प्रधानमन्त्री श्री मोदी जी के इस नए वक्तव्य पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि- PM मोदी की दुनिया को चेतावनी, बोले- युद्ध और ऊर्जा संकट नहीं रुके तो करोड़ों लोग फिर गरीबी में जाएंगे ! साथ ही कई वैश्विक समीकरणों में अविश्वसनीय उलट – पुलट होने की वजह से भी पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था गर्त में जा सकती है !
इस अवसर पर हम, अपने सभी आदरणीय पाठकों को याद दिलाना चाहेंगे कि ठीक यही भविष्यवाणी, आज से 10 वर्ष पहले “स्वयं बनें गोपाल” समूह के मुख्य मार्गदर्शक ड़ॉ सौरभ उपाध्याय (जो भारतवर्ष के विभिन्न यूनिवर्सिटीज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के लगभग 15 वर्षों से तक प्रोफेसर रहे हैं और जिनके कई विश्व विख्यात इंजीनियरिंग रिसर्च पेपर्स भी पब्लिश्ड हैं, साथ ही स्पेस साइंस को ठीक से समझने के लिए जिन्होंने भारतीय ज्योतिष विज्ञान पर भी काफी रिसर्च किया है) ने इस आर्टिकल के माध्यम से किया था- महा मंदी लाने वाली है महा बेरोजगारी
जैसे आग लगने पर कुंआ नहीं खोदा जा सकता है ठीक उसी तरह हर समझदार व्यक्ति को निकट भविष्य में आ सकने वाले आर्थिक संकटों से उबरने के लिए कोई “प्लान बी” (Plan B, जिसका मतलब होता है कि पहली योजना के फेल होने जाने के बाद, तुरंत अपनाई जाने वाली कोई दूसरी सुरक्षित योजना) जरूर तैयार कर लेना चाहिए !
प्लान बी के लिए अनाज या फलों की खेती से अच्छा विकल्प कोई और नहीं हो सकता है क्योकि अगर खेती सिर्फ प्राकृतिक तरीके से किया जाए तो निश्चित तौर पर कुछ ही सालों में खेती करने में खर्च जीरो (यानी शून्य) हो जाता है जबकि उत्पादन अपरम्पार होने लगता है ! इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि जल्द से जल्द खेती लायक जमीन खरीदकर या किराये पर लेकर खेती करना शुरू कर दें !
हर बिजनेस की तरह, खेती को भी प्राकृतिक तरीके से करने पर, शुरुआत में कुछ घाटा हो सकता है, लेकिन इससे बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है क्योकि कुछ ही वर्षों में निश्चित बेहतरीन कमाई होकर रहेगी ! प्राकृतिक खेती ही एकमात्र ऐसा बिजनेस है जिसमें धन के साथ – साथ बहुत पुण्य भी मिलता है क्योकि इससे धरती माँ का टॉक्सिन्स (जहर) ख़त्म होता है साथ ही फसल – पेड़ – पौधे वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित करके, समाज को मुफ्त में खूब ऑक्सीजन भी देतें हैं (जिससे ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज जैसे वैश्विक खतरों में भी राहत मिलती है) !
अभी कुछ वर्ष पहले कोविड के संकट काल के दौरान सभी ने देखा था कि सिर्फ भोजन से संबंधित बिजनेस ही ऐसे होतें हैं जिनका स्कोप कभी ख़त्म नहीं होता है क्योकि इंसान कितना भी धनी हो लेकिन वो सोना – चांदी – डॉलर – रूपये आदि को नहीं खा सकता ! आम तौर पर माना जाता है कि इंसान की मूलभूत जरूरतों से संबंधित चीजों यानी रोटी – कपड़ा – मकान का बिजनेस कभी मंदा नहीं होगा लेकिन कोविड के बाद से ही लोगों ने रियल एस्टेट में भी इन्वेस्ट करना काफी कम कर दिया है जिसकी वजह से देखा जा रहा है कि इण्डिया में भी चीन की तरह बिना बिके हुए नए मकानों की संख्या बढ़ती जा रही है- टॉप 8 शहरों में बिना बिके घरों का अंबार, 5 लाख से ज्यादा घर खा रहे हैं धूल, 50 लाख से सस्ते फ्लैट्स पर दबाव !
अगर बात करें टेक्सटाइल इंडस्ट्री (कपड़ा उद्योग) की तो, डॉ सौरभ उपाध्याय के अनुसार, अब तो ए आई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ; AI) आधारित ऐसे डिजिटल प्रिंटर बनने वाले हैं जो ना केवल कपड़ों पर मनमाफिक डिज़ाइन प्रिंट कर देते हैं, बल्कि पूरा ड्रेस ही (यानी टी शर्ट, पैंट, सलवार सूट, साड़ी आदि) मनमाफिक फिटिंग में सिलकर तुंरत दे सकतें हैं ! मतलब निकट भविष्य में हर आदमी अपनी शरीर की नाप और अपनी मनपसंद डिज़ाइन – कलर के हिसाब से अपने कपड़े को अपने घर में आराम से बैठकर, ए आई प्रिंटर से तुरंत सिलवा लेगा, वो भी काफी सस्ते दामों में !
सारांश रूप में कहें तो इंसान ए आई की मदद से, ना केवल कपड़े सिलवा सकेगा, बल्कि दुनिया में मौजूद हर छोटी – बड़ी चीज (चाहे वो चीज कितनी सरल हो या कठिन हो) की डिज़ाइन व मैन्युफैक्चरिंग भी करवा सकेगा ……. जैसे- उदाहरण के तौर पर देखें कि कैसे ए आई ने बेहद आसानी से उस अद्भुत शक्तिशाली राकेट इंजन को मात्र 15 मिनट में बना दिया था जिसे बड़े से बड़े इंजीनियर और साइंटिस्ट भी आज तक नहीं बना पाए थे- This AI Built a Rocket Engine Faster Than Humans ……. साथ ही ए आई को हाउस वाइव्स (घरेलु महिलाओं) के कामों से लेकर हर तरह के ऑफिस, फैक्ट्री, दुकानों के वर्कर्स के काम सिखाये जा रहें है- स्पेस और AI रेस के बाद चीन की नजर अब इस रेस पर है ……. अब एआई संचालित रोबोट चला रहे पूरा तबेला ……. फोन पहनकर धन कमा रही हैं हाउसवाइफ !

डॉ सौरभ के अनुसार अगर देखा जाए, तो ए आई सबसे ज्यादा कमर तोड़ रहा है, खुद ए आई को पैदा करने वाले आई टी इंडस्ट्री की क्योकि ए आई सबसे छोटे लेवल यानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के अधिकाँश काम तो धड़ल्ले से करके दे ही रहा है, साथ ही सीनियर लेवल की जॉब्स (जैसे- प्रोजेक्ट मैनेजर्स, डायरेक्टर्स, वाईस प्रेसिडेंट आदि) के डिजिटल क्लोन (प्रतिरूप) बनाने में भी तेजी से अग्रसर हो रहा है, जिससे भविष्य में मात्र मुट्ठी भर लोग ही मिलकर बड़ी से बड़ी कंपनी चलाने में सक्षम होंगे (जैसे यह न्यूज़ पढ़ें- Mark Zuckerberg बना रहे हैं अपना AI क्लोन! अब मशीन से करवाएंगे अपना काम) !
मतलब ना केवल टेक्निकल काम, बल्कि नए बिजनेस क्लाइंट (ग्राहकों) को लाने का काम भी ए आई ज्यादा अच्छे तरीके से करेगा, क्योकि किसी ग्राहक को वास्तव में किस बजट में क्या चाहिए, ये किसी MBA वाले मैनेजर की तुलना में, ए आई तुरंत समझ लेगा और बिना थके लाखो – करोड़ों कस्टमर्स को रोज एप्रोच करेगा जिससे बेहिसाब मुनाफा हो सकता है !
मतलब भविष्य में, ए आई की वजह से, छोटी – बड़ी आई टी इंडस्ट्री और आई टी की ही मदद से फलने – फूलने वाली दूसरी इंडस्ट्रीज का क्या अंजाम होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन अभी वर्तमान में ही कई ऐसे लक्षण दिखने लगें हैं जो बता रहें हैं कि अब वर्षों पुराना सिस्टम एकदम बदलने वाला है, जैसे- सदियों से पूरे विश्व में लेखकों, कवियों, संगीतकारों का बहुत सम्मान होता रहा है लेकिन वर्तमान में देखा जाए तो ए आई, खुद धीरे – धीरे सबसे बड़ा लेखक, कवि, संगीतकार बनता जा रहा हैं !
क्योकि अब ए आई की मदद से कोई बच्चा भी जब चाहे तब, एकदम नया मनपसंद आध्यात्मिक भजन या डिस्को पार्टी सांग या दुःख भरी गजलें या कहानी – उपन्यास – किताब (वो भी मनमाफिक वीडियो के साथ) बनाकर देख – सुन सकता है और अब ऐसे गानों व कहानियों से यूट्यूब (You Tube) जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी भरे पड़ें हुए है, जिन्हें कोई भी “AI Made Songs/Stories” आदि जैसे Key Words टाइप करके सर्च कर सकता है !
चूंकि ए आई रोज पहले से ज्यादा बुद्धिमान, विद्वान और सक्षम बनता जा रहा है इसलिए उसके द्वारा बनाये गए कई गाने, कहानियां, वीडियोज़, मूवीज भी किसी एक्सपीरिएंस्ड लेखक, कवि, संगीतकार से ज्यादा लोकप्रिय हो जा रहें हैं ! अतः कई विचारकों का कहना है कि बहुत संभव है कि आने वाले समय में मानव निर्मित साहित्य सिर्फ संग्रहालयों में देखने को मिलेंगे, जबकि स्कूल से लेकर सरकारी दफ्तरों तक में सिर्फ ए आई द्वारा निर्मित लेटेस्ट व अपडेटेड कंटेंट का यूज़ होगा (अधिक जानकारी के लिए कृपया ये 3 लिंक्स देखें- सरकारी नौकरी करने वालों के लिए भी जरूरी हो गया है AI, जानिए आप इसे कैसे यूज कर सकते हैं ……… और ……… केरल के स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही AI रोबोट Teacher ……… और ……… दोस्तों के चक्कर में ज़िंदगी बर्बाद मत करो ) !
वैसे हो सकता है कि ए आई की वजह से भविष्य में स्कूल जाने का कांसेप्ट ही पूरी तरह से ख़त्म हो जाए क्योकि जहाँ एक तरफ आदरणीय मोदी जी ने भी कह दिया है कि बच्चों के ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम को वरीयता दी जाए, वही बच्चों के अभिवावक भी मुख्यतः इन 3 बातों से भी बहुत ज्यादा परेशान हैं- स्कूल्स द्वारा बढियाँ पढ़ाई के नाम पर मनमानी फीस वसूलना, बच्चो द्वारा कुछ नया सीखने पर जोर देने की बजाय हर महीने होने वाले ढ़ेर सारे एग्जाम्स में ज्यादा नंबर लाने के लिए दबाव देना, मासूम बच्चे को क्लास के गंदे बच्चो द्वारा जाने – अनजाने बुरी आदतें सीख जाना ! ऐसा नहीं है कि घर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चे कम समझदार होते हैं, जिसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है- 9 साल के बच्चे ने Education System पर उठाए बड़े सवाल ! रही बात बच्चों के मिलजुल के काम करने की आदत सीखने की, तो इसके लिए हफ्ते में एक – दो बार कोई सोशल एक्टिविटी जैसे- सामूहिक योग करना, सामूहिक पेड़ लगाना, सामूहिक गरीबों को भोजन बाटना, सामूहिक गली – मोहल्ला सफाई अभियान आदि करने से ना केवल बच्चे का, बल्कि पूरे देश का उद्धार होगा !
मेडिकल जगत भी अब ए आई की जबरदस्त घुसपैठ से बचा नहीं है क्योकि जहां बड़े से बड़े डॉक्टर्स द्वारा भी अक्सर मरीजों के इलाज में मानवीय गलतियां – लापरवाही – भूल – चूक आदि की खबरें सुनने को मिलती है, वहीँ ए आई अपने आप को इस तरह हाइली डेवलप्ड और इक्विप्ड कर रहा है जिससे उसे मरीज के लिए सही इलाज खोजने में थोड़ी सी भी गलती ना हो सके (अधिक जानकारी के लिए कृपया यह 4 न्यूज़ पढ़ें- AI से AIIMS में हो रहा कैंसर मरीजों का इलाज, जानिए कैसे करता है काम ……… और ……… अब डॉक्टर नहीं, एआई करेगा मरीजों का इलाज, इस नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा हेल्थ सिस्टम, जानें ……… और ……… 19.5 करोड़ से नया ब्लॉक, AI और रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होगी ……… और ……… चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि: ब्रिटेन में पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सर्जरी में प्रत्यक्ष रूप से शामिल) !
इतना ही नहीं, बहुत सम्भव है कि भविष्य में बिना किसी पैथोलॉजी या जांच केंद्र में गए हुए (मतलब घर बैठे ही), और बिना ब्लड की एक बूँद निकाले हुए भी, सिर्फ AI की मदद से, सारी रिपोर्ट्स मिनटों में मिल जाएँ, जैसे इस वीडियो में देखिये कि अभी हैदराबाद में बिना ब्लड दिए भी कई जांच तुरंत हो जा रही है- Kya Bina Khoon nikale Blood Test ho Skta Hai ? Artificial Intelligence, A Revolution ……. लेकिन आयुर्वेद की कुछ दुर्लभ अनुभव जनित विधाएँ जैसे- नाड़ी परीक्षण या मर्म चिकित्सा परीक्षण में ए आई कभी पारंगत हो सकेगा या नहीं, यह भविष्य ही बताएगा (इन प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ हर शारीरिक व मानसिक बीमारियों का नाश कर सकने में सक्षम, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां (जैसे- योगासन, प्राणायाम, ध्यान, बन्ध, मुद्राएं, यौगिक क्रियाएं, आयुर्वेद, मर्म चिकित्सा, एक्यूप्रेशर)) !
वास्तव में प्राकृतिक खेती ही एकमात्र ऐसा बिजनेस है जिसे ए आई कभी भी समाप्त नहीं कर सकेगा ……. क्योकि ए आई और विभिन्न केमिकल्स की मदद से लेब्रोटरी/वर्कशॉप/बंद कमरें आदि में उगाई गयी फसलें, भले ही ऊपर से दिखने में एकदम स्वस्थ, हरी, ताज़ी दिखाई दे सकतीं हो ……. लेकिन इंसान को पोषण देने के मामले में ये लेब्रोटरी/वर्कशॉप/बंद कमरें वाली फसलें कभी भी, उन फसलों की बराबरी नहीं कर सकतीं हैं ……. जो फसलें, खुले आसमान के नीचे, सूर्य प्रकाश व गाय माँ के गोबर – गोमूत्र से बनी प्राकृतिक खाद युक्त धरती से पैदा होती हैं ……. हां ये जरूर है कि खेती के मामले में, ए आई सुपरविजन (देखरेख – निगरानी) जैसे कामों में मदद कर सकता है ……. लेकिन प्राकृतिक तरीके से खेती करने से सुपरविजन की भी कुछ खास जरूरत नहीं पड़ती है !

वास्तव में देखा जाए तो वर्तमान या भविष्य में डेवलप्ड होने वाले किसी भी ए आई से कहीं ज्यादा विकसित हैं- भारतीय देशी गाय माँ, जिनके रोम – रोम में इतना रहस्यमय साइंस छिपा है जिसे पूरी तरह से समझ पाना आज के मॉडर्न साइंटिस्ट्स के बस की बात नहीं है ………. उदाहरण के तौर पर देखिये- प्राचीन महान गणितज्ञ श्री ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta) ने “गोमूत्रिका सिद्धांत” (Gomūtrikā Principle) का उल्लेख किया था जिसमें अंतरिक्ष की व्याख्या एक विशेष पैटर्न के आधार पर मिलती है ! आपको जानकार आश्चर्य होगा कि गाय माँ के गोमूत्र (पेशाब) करने की स्टाइल भी इतनी वैज्ञानिक (यानी एक विशेष तरीके से टेढ़ी – मेढ़ी / zig-zag / alternating pattern वाली) होती है कि इसी पर गहरा रिसर्च करके “गोमूत्रिका सिद्धांत” का आविष्कार हुआ है !
आज के वैज्ञानिक इस “गोमूत्रिका सिद्धांत” को Modern Mathematical Frameworks के रूप में इस्तेमाल करते हैं ! यह गोमूत्र वाला पैटर्न Convergence (निकटता) और Divergence (अस्थिरता) को समझने में काम आता है ! जैसे कई गणनाओं में values ऊपर – नीचे oscillate करती हैं- जैसे sine wave ; y=sin(x) जो कि बिल्कुल गोमूत्रिका की तरह alternating flow दिखाता है ! इसके अलावा Numerical Methods (Computational Mathematics), Iterative algorithms (जैसे root finding) और Error correction methods में भी values बार – बार ऊपर – नीचे adjust होती हैं, जो कि zig-zag convergence है !
अब बात करतें हैं आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान (Astronomy) में इसके उपयोग की ! Orbital Perturbations (कक्षीय बदलाव), ग्रहों और उपग्रहों की गति बिल्कुल सीधी नहीं होती है और वे छोटे – छोटे deviations दिखाते हैं ! यह motion भी कई बार zig-zag या oscillatory pattern लगता है ! Light Curves & Signal Patterns ; Stars और pulsars की brightness समय के साथ ऊपर – नीचे होती रहती है- I(t)=I ; 0 ; +Asin(ωt) ! यह भी एक प्रकार का controlled “गोमूत्रिका pattern” है ! Chaos Theory & Non-linear Dynamics; Complex systems (जैसे galaxy motion), Irregular लेकिन patterned behavior; यहाँ zig-zag patterns randomness और order के बीच संतुलन दिखाते हैं !
ए आई (Artificial Intelligence & Machine Learning) Training के दौरान error कम करने के लिए weights बार – बार ऊपर – नीचे बदलते हैं Gradient descent में oscillation आता है जो कि यह भी “गोमूत्रिका pattern” जैसा behavior है ! Space Science (ISRO / NASA जैसे संस्थान) Satellite motion corrections ; Orbital perturbations ; trajectory सीधी नहीं होती जो कि zig-zag adjustments होते हैं !
अतः माना जाता है कि नासा, इसरो, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट (NASA, ISRO, Google AI & optimization, Microsoft) आदि जैसी सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थाएं भी “गौमूत्रिका सिद्धांत” का अलग नामों से आज भी बहुत व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं !
तो इस तरह से हम लोग देख सकतें हैं कि सिर्फ गौमूत्र के गिरने की स्टाइल पर गहरा रिसर्च करके स्पेस साइंस (अंतरिक्ष विज्ञान) के ना जाने कितने राज सुलझाए जा सकतें हैं ……………. अतः जो पुराणों में कहा गया है कि “गोमये वसते लक्ष्मी, गोमूत्रे सर्वमंगला” (यानी गाय के गोबर में माँ लक्ष्मी और गोमूत्र में सभी मंगलों का वास होता है) उससे यही साबित होता है कि ……………. गोबर – गोमूत्र से इतना अपरम्पार अन्न / फसल उगाया जा सकता है कि पूरे विश्व से ही गरीबी व भुखमरी का नामोनिशान मिट जाए ……………. इन्ही वजहों से गाय माँ को “जगत माता” का दर्जा दिया गया है और सभी बुद्धिजीवियों ने एकमत से स्वीकारा है कि “गाय बचेगी तभी विश्व बचेगा” !
अन्ततः निष्कर्ष तौर पर हम कह सकतें हैं कि “इंटरनेशनल डे ऑफ़ प्लांट हेल्थ” हमें यह याद दिलाता है कि ……………. स्वस्थ पौधे = स्वस्थ मानव जीवन = स्वस्थ पृथ्वी ……………. यानी अगर हम “प्राकृतिक + पारंपरिक” तरीकों को अपनाते हैं ……………. तो हम ना केवल फसलों की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित पर्यावरण युक्त दुनिया भी प्रदान सकते हैं !
जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !
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