193 देशों की प्रतिबद्धता से तैयार, पर्यावरणीय उपक्रम को लागू करने में मदद कर रहा है “स्वयं बनें गोपाल” समूह

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,

संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 देशों द्वारा, पूरी पृथ्वी के पर्यावरण सरंक्षण के लिए ली गयी प्रतिबद्धता यानी “टेन वाई. एफ. पी.” (10YFP) को इम्प्लीमेंट (लागू) करने वाला वैश्विक उपक्रम है “वन प्लेनेट नेटवर्क” जिससे वर्तमान में विश्व की लगभग 370 सिविल सोसाइटी (स्वयंसेवी संस्था) जुड़ी हुईं हैं जिनमें से एक है आपका अपना “स्वयं बनें गोपाल” समूह, जिसका विवरण “वन प्लेनेट नेटवर्क” की वेबसाइट पर देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.oneplanetnetwork.org/organisations/svyam-bane-gopal

इस “वन प्लेनेट नेटवर्क” से “स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ – साथ जो अन्य विश्व प्रसिद्ध कॉर्पोरेट हाउसेस, सिविल सोसाइटीज, सरकारी तंत्र आदि जुड़े हुएं हैं उनका विवरण देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.oneplanetnetwork.org/network/organisations या उनमें से कुछ नाम नीचे की लिस्ट में भी देखे जा सकतें हैं-

• अमेरिकन विदेश मंत्रालय (U.S. Department of State)

• अमेरिकन कृषि मंत्रालय (United States Department of Agriculture)

• अमेरिकन सरकार का रसायन सुरक्षा व प्रदूषण बचाव विभाग (US EPA Office of Chemical Safety and Pollution Prevention)

• अमेरिकन सरकार – व्यापी नीति विभाग (U.S. GSA Office of Governmentwide Policy)

• ब्रिटिश विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास मंत्रालय (United Kingdom Foreign, Commonwealth, and Development Office)

• ब्रिटिश पर्यावरण, खाद्य व ग्रामीण विकास मंत्रालय (United Kingdom – Department for Environment, Food and Rural Affairs)

• यू ए इ जलवायु परिवर्तन व् पर्यावरण मंत्रालय (UAE – Ministry of Climate Change and Environment)

• मैसाचूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology)

• ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford)

• कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University)

• माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)

• यूनेस्को (UNESCO)

• यूनिसेफ (UNICEF)

• यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (United Nations Development Programme)

• यू एन टूरिज्म (UN Tourism)

• वर्ल्ड बैंक (World Bank Group)

• वर्ल्ड इकनोमिक फोरम (World Economic Forum)

• वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन (World Trade Organization)

वास्तव में “वन प्लेनेट नेटवर्क” का आधार है “सस्टेनेबल कंजम्प्शन एंड प्रोडक्शन” (Sustainable Consumption and Production) यानी कम से कम संसाधनों द्वारा हर उचित क्षेत्र (जैसे- खाद्य सामग्रियां, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेस आदि) में उचित उत्पादन/निर्माण/प्रसार करना ताकि पर्यावरण की अनावश्यक बर्बादी रोकी जा सकी (खाद्य और इंजीनियरिंग क्षेत्रों से संबंधित “स्वयं बनें गोपाल” के सहयोग जानने के लिए कृपया ये 2 आर्टिकल्स पढ़ें- जानिये यूनेस्को नेशनल कमीशन, वर्ल्ड फ़ूड फोरम, वर्ल्ड बिजनेस कौंसिल फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट, “स्वयं बनें गोपाल” समूह आदि के एक्सपर्ट्स द्वारा निर्मित संयुक्त राष्ट्र संघ की फ़ूड सिस्टम समिट की रिपोर्ट के बारे में ………. और ……….. दुनिया के नंबर वन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट “एम. आई. टी.” (MIT USA) ने अपने उपक्रम के लिए “स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था का रिव्यूअर (परीक्षक)” नियुक्त किया हमारे 2 स्वयं सेवकों को) !

“वन प्लेनेट नेटवर्क” से संयुक्त राष्ट्र की संस्था “फ़ूड एंड एग्रीकल्चरल आर्गेनाइजेशन” (FAO) भी जुड़ी हुई है जिसके उपक्रम “ग्लोबल स्वायल पार्टनरशिप” का “स्वयं बनें गोपाल” समूह वर्ष 2020 से पार्टनर है, जिसके बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- संयुक्त राष्ट्र संघ के नए विश्वप्रसिद्ध उपक्रम का पार्टनर बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह

इसी “फ़ूड एंड एग्रीकल्चरल आर्गेनाइजेशन” की सहयोगी, संयुक्त राष्ट्र की संस्था “यू एन ग्लोबल मार्केट प्लेस” (United Nations Global Marketplace) के अलावा , 69 देशों को मेंबर्स की तरह जोड़ने वाले “एशियन डेवलपमेंट बैंक” (Asian Development Bank) को भी पर्यावरणीय सुझाव देने के लिए, “स्वयं बनें गोपाल” समूह के प्रधान स्वयं सेवक (अध्यक्ष) परिमल पराशर जी एक कंसलटेंट (सलाहकार) के तौर पर रजिस्टर्ड हैं (अधिक जानने के लिए, कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- यूनेस्को, यू एन हैबिटेट, एशियन डेवलपमेंट बैंक, वर्ल्ड बैंक, आई एम ऍफ़, यू एन वाटर, यू एन फाउंडेशन और “स्वयं बनें गोपाल”) !

यहाँ बताना चाहेंगे कि परिमल जी खुद एक हाई क्लास इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन इंजीनियर हैं, और स्विट्ज़रलैंड में आगामी आयोजित होने वाली “वर्ल्ड समिट ऑन द इन्फॉर्मेशन सोसाइटी 2026” (WSIS – World Summit on the Information Society Forum) की सफलता के लिए, परिमल पराशर जी को मदद करने के लिए आमंत्रित किया गया है 21 जनवरी 2026 को होने वाली स्टेकहोल्डर्स की मीटिंग में !

संक्षेप में, “वर्ल्ड समिट ऑन द इन्फॉर्मेशन सोसाइटी” एक ऐसा वैश्विक प्रयास है जो यह सुनिश्चित करता है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग, सिर्फ सभी के लाभ के लिए हो जिससे एक न्यायसंगत व समृद्ध डिजिटल दुनिया का निर्माण सम्भव हो सके ! इसका आयोजन मुख्यतः संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था “इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन” (अन्तर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ) करती हैं !

डिजिटल टेक्नोलॉजी के ही वैश्विक नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए, यूनेस्को द्वारा 12 – 13 फरवरी 2026 को साउथ अफ़्रीका की राजधानी प्रीटोरिया में आयोजित होने वाली “इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन डिजिटल प्लेटफार्म गवर्नेंस 2026” (The International Conference on Digital Platform Governance) में भी आमंत्रित हैं परिमल जी !

इस अवसर पर यह भी बताना चाहेंगे कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 193 देशों के साथ विमर्श से तैयार, “ए. आई. व डिजिटल टेक्नोलॉजी” के वैश्विक नियंत्रक समझौते “ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट” के लिए 15 दिसंबर 2025 को एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ था जिसका नाम था “Digital@UNGA” ! इस कार्यक्रम का नाम “Digital@UNGA” इसलिए था क्योकि “ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट” का यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली (United Nations General Assembly) के साथ हुआ था ! इस “Digital@UNGA” कार्यक्रम में ऑनलाइन पार्टिसिपेट किया था परिमल जी ने (“ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट” से “स्वयं बनें गोपाल” समूह के संबंधों को जानने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 193 देशों के साथ विमर्श से तैयार, “ए. आई. व डिजिटल टेक्नोलॉजी” के वैश्विक नियंत्रक समझौते के समर्थक समूह में शामिल हुआ “स्वयं बनें गोपाल”) !

इसके अतिरिक्त, जनरल असेंबली के 80 वें सेशन की प्रेसिडेंट महामहिम सुश्री एनालेना बेयरबॉक (Ms. Annalena Baerbock) द्वारा 29 जनवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम “सिविल सोसाइटी टाउन हॉल” (Civil Society Town Hal) में भी न्यूयॉर्क आने के लिए आमंत्रित थे परिमल जी (संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली क्या होती है, जानने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- जनरल असेंबली ने ट्यूबरकुलोसिस, डिजास्टर रिस्क रिडक्शन, प्रेस फ्रीडम व विकासीय मुद्दों पर आधारित मीटिंग्स में आमंत्रित किया हमारे स्वयं सेवक को) !

हालांकि वर्तमान विश्व के भयावह हालात देखते हुए, परिमल जी सबसे ज्यादा समर्पित हैं पर्यावरण सरंक्षण के लिए, क्योकि हर एक सजग नागरिक की तरह उनका भी मानना है कि अगर हमारा घर यानी पृथ्वी माँ ही नहीं बचेंगी तो फिर किसी भी आधुनिक टेक्नोलॉजी के विकास का क्या फायदा है !

मतलब अब इस कटु सत्य को बिल्कुल अनदेखा नहीं किया जा सकता कि इस समय विश्व की सबसे ज्वलंत समस्या बन चुकी है पर्यावरण प्रदूषण, और अब यह समस्या इतना विकराल रूप पकड़ चुकी हैं कि धरती पर स्थित सभी प्राणियों के जीवन पर गहरे संकट के बादल मंडरा रहें हैं जिनसे आज भी बहुत से लोग एकदम बेखबर हैं, इसलिए अब पर्यावरण सरंक्षण सिर्फ सरकारी कर्मचारियों या कुछ संस्थाओं की मेहनत के भरोसे सम्भंव नहीं है, जब तक की हर एक आम नागरिक भी इसे अपनी निजी ज़िम्मेदारी मानकर रोज सहयोग ना दे ! अधिक जानकारी के लिए कृपया मीडिया में प्रकाशित निम्नलिखित न्यूज़ को देखें-

धरती पर जीवन खतरे में, इंसानों के रहने लायक नहीं रहेगी पृथ्वी

विकास की अंधी दौड़ से प्रकृति विनाश की ओर

विकास की कीमत पर विनाश, जलवायु परिवर्तन की अनदेखी कर हम खोद रहें हैं अपनी ही कब्र

धधकती धरती: विकास की दौड़ या विनाश की ओर?

विनाश से बचाने के लिये पृथ्वी संरक्षण जरूरी

इसलिए “स्वयं बनें गोपाल” समूह पिछले लगभग 20 वर्षों से विभिन्न माध्यमों द्वारा, आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ – साथ उन सभी प्राचीन भारतीय विज्ञान के भी पुनरुत्थान में लगा हुआ हैं जो पर्यावरण सरंक्षण के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परम लाभदायक हो सकतें हैं जैसे- उस पुराने भुला दिए गए इलेक्ट्रोकल्चर फार्मिंग (Electroculture Farming ; विद्युत् कृषि) को फिर से, नयी टेक्निक द्वारा सफल बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें बिजली उत्पादन में बिना कोई पैसा खर्च किये हुए, सिर्फ वातावरण में हर समय मौजूद बिजली को ही एंटीना द्वारा ग्रहण करके, हर तरह के पौधों को विशेष तरीके से सप्लाई करके, फसल की पैदावार आश्चर्यजनक रूप से बढ़ाई जा सकती है ! पर्यावरण सरंक्षण के लिए, “स्वयं बनें गोपाल” समूह निम्नलिखित प्राचीन विज्ञान की पुनर्स्थापना में यथासम्भव सहयोग कर रहा है-

• केमिकल्स रहित प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां, जो हर शारीरिक व मानसिक बीमारियों का नाश कर सकने में सक्षम है {अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट के इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ हर शारीरिक व मानसिक बीमारियों का नाश कर सकने में सक्षम, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां (जैसे- योगासन, प्राणायाम, ध्यान, बन्ध, मुद्राएं, यौगिक क्रियाएं, आयुर्वेद, मर्म चिकित्सा, एक्यूप्रेशर)}

• केमिकल्स रहित प्राकृतिक कृषि पद्धतियां, जो अत्यंत उपजाऊ, स्वास्थ्यकारी के साथ – साथ बेहद सस्ती, टिकाऊ भी होती हैं {अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट के इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ बेहद उपजाऊ खेती – सुंदर स्वास्थ्य – महापुण्य के साथ सारी मनोकामनायें, कैसे पूरी कर सकतीं हैं श्री कृष्ण माता अर्थात भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ}

• दुर्लभ सांसारिक व आध्यात्मिक साहित्य व जानकारियां, जो इंसान को इतना जागरूक बना सके कि इंसान सभी सामाजिक मूल्यों की ही तरह प्रकृति यानी प्रत्यक्ष भगवान् (जिनका असली मतलब यह होता है- भ= भूमि, ग= गगन, व= वायु, आ की मात्रा= अग्नि, न= नीर) का भी उचित आदर कर सके {अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाइट के इन 2 लिंक्स पर क्लिक करें- जानिये ➤ प्रसिद्ध लेखकों की सामाजिक प्रेरणास्पद कहानियां, कवितायें, साहित्य, जिनका अध्ययन व प्रचार करके वापस दिलाया जा सकता है मातृभूमि भारतवर्ष की आदरणीय राष्ट्रभाषा हिन्दी के खोये हुए सम्मान को …… और …… जानिये ➤ दिव्य संत, अध्यात्मिक घटनाएं, दुर्लभ ज्ञान, कथाएं, ज्योतिषीय अनुभव, प्राचीन मंदिर)}

वास्तव में, “स्वयं बनें गोपाल” समूह लगातार विभिन्न माध्यमों से यही प्रयासरत है कि कैसे इस विकट आपदा यानी पर्यावरणीय समस्या के निस्तारण में अधिक से अधिक आम जनमानस भी ख़ुशी – ख़ुशी इंटरेस्टेड होकर सहयोग कर सकें ! पर्यावरण को बचाने के लिए, सारांश रूप में कहा जाए तो केवल निम्नलिखित 2 तरह के ही काम करने होतें हैं-

(1)- पर्यावरण को हर हानिकारक चीज से बचाना है, जैसे- पानी की बर्बादी, विभिन्न हानिकारक केमिकल्स – गैसेस – मेटल्स – प्लास्टिक आदि के प्रयोग को कम से कम करना (नहाने – कपड़े धोने – बर्तन माँजने – बीमारियों के इलाज आदि जैसी रोजमर्रा की आवश्यकताओं में भी केमिकल्स के उपयोग को कैसे आसानी से समाप्त किया जा सकता है, जानने के लिए कृपया हमारे इन 2 आर्टिकल्स को पढ़ें- क्या योग की सफलता, पर्यावरण की सफलता पर निर्भर करती है …… और …… जानिये दुनिया की सबसे ताकतवर, इलाज की पद्धतियों के कुछ अनछुए पहलुओं बारे में) !

(2)- पर्यावरण को हर लाभकारी चीज से मजबूत करना है, जैसे- अधिक से अधिक देशी प्रजातियों के पेड़ – पौधे – फसल उगाना, अधिक से अधिक देशी गाय माँ के गोबर – गोमूत्र से बनी सर्वोत्तम खाद से उपजा हुआ ही अनाज उगाना और खरीदना आदि (विस्तृत जानकारी पाने के लिए, कृपया हमारे इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ बेहद उपजाऊ खेती – सुंदर स्वास्थ्य – महापुण्य के साथ सारी मनोकामनायें, कैसे पूरी कर सकतीं हैं श्री कृष्ण माता अर्थात भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ) !

इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र संघ के विभिन्न वैश्विक पर्यावरणीय व अन्य महत्वपूर्ण अभियानों में “स्वयं बनें गोपाल” समूह किस स्तर पर सहयोग कर रहा है जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ “संयुक्त राष्ट्र संघ” में “स्वयं बनें गोपाल” समूह की बढ़ती भागीदारी

“स्वयं बनें गोपाल” समूह द्वारा चलाये जा रहे, ये सभी सामाजिक जागृति अभियान आप सभी आदरणीय पाठकों द्वारा काफी पसंद व सराहे भी जा रहें हैं, संभवतः इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र की संस्था “यूनेस्को” के “मीडिया एंड इनफार्मेशन लिट्रेसी अलायन्स” (UNESCO Media and Information Literacy Alliance) ने भी “स्वयं बनें गोपाल” समूह को अपना मेम्बर (Member) नियुक्त किया है (अधिक जानने के लिए, कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनेस्को के मीडिया ग्रुप का भी मेम्बर बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह) !

इसी संदर्भ में यह भी बताना चाहेंगे कि ……… साइंस को समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करने के लिए, विश्व प्रसिद्ध संस्था “इंटरनेशनल साइंस कॉउन्सिल” ने “स्वयं बनें गोपाल” समूह को प्रशंसात्मक सर्टिफिकेट भेजकर धन्यवाद दिया है (वह सर्टिफिकेट, ठीक ऊपर दी हुई फोटो के रूप में प्रकाशित है) ! “इंटरनेशनल साइंस कॉउन्सिल” लगभग 100 साल पुरानी संस्था “इंटरनेशनल कॉउन्सिल फॉर साइंस” और 75 साल पुरानी संस्था “इंटरनेशनल सोशल साइंस कॉउन्सिल” के मिलन से बनी है !

“इंटरनेशनल साइंस कॉउन्सिल” के मेंबर्स (सदस्यों) में विश्व की कई उच्च स्तरीय वैज्ञानिक रिसर्च संस्थाएं हैं, जिनके बारें में जानने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://council.science/members/online-directory/ या उनमें से कुछ संस्थाओं का नाम निम्नलिखित लिस्ट में भी देखा जा सकता है-

• अमेरिकन नेशनल एकेडेमी ऑफ़ सइंसेस (U. S. National Academy of Sciences)

• यू के एकेडेमी ऑफ़ मेडिकल सइंसेस (U. K. Academy of Medical Sciences)

• साइंस कॉउन्सिल ऑफ़ जापान (Science Council of Japan)

• यू के रॉयल सोसाइटी (U. K. Royal Society)

• इटली नेशनल रिसर्च कॉउन्सिल (Italy, National Research Council)

• यू के ब्रिटिश एकेडमी (U. K. British Academy)

• किंग अब्दुलअज़ीज़ सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (King Abdulaziz City for Science and Technology)

• ग्लोबल ओशन ऑब्जर्विंग सिस्टम (Global Ocean Observing System)

• इंडियन कॉउन्सिल ऑफ़ सोशल साइंस रिसर्च (Indian Council of Social Science Research)

• इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (Indian National Science Academy)

जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !

“संयुक्त राष्ट्र संघ” में “स्वयं बनें गोपाल” समूह की बढ़ती भागीदारी जानने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं/पोस्ट्स/विडियोज़ आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी तरह की जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें, क्योंकि हर मानव की शारीरिक सरंचना व परिस्थितियां अलग - अलग हो सकतीं हैं ! अतः किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, प्राप्त हुई किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे ! धन्यवाद !