पूरे विश्व के सिर्फ 20 ऐसे पर्यावरणीय कार्यक्रम, जो इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ की वेबसाइट पर प्रकाशित हुए

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,

एक लोकोक्ति है कि-

“जंगल हैं तो जल है, जल है तो जीवन है”

जंगलों की इतनी प्रचंड महिमा को ही प्रसारित करने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली ने हर वर्ष की 21 मार्च तारीख को “इंटरनेशनल डे ऑफ़ फॉरेस्ट” (अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस) घोषित किया है (जनरल असेंबली क्या होती है जानने के लिए, कृपया हमारे इस आर्टिकल पर क्लिक करके पढ़ें- जनरल असेंबली ने ट्यूबरकुलोसिस, डिजास्टर रिस्क रिडक्शन, प्रेस फ्रीडम व विकासीय मुद्दों पर आधारित मीटिंग्स में आमंत्रित किया हमारे स्वयं सेवक को) !

इस वर्ष 21 मार्च 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने पूरे विश्व से मात्र 20 कार्यक्रमों को ही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया है, जिसमें से “स्वयं बनें गोपाल” समूह का विवरण देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.fao.org/international-day-of-forests/events/detail/india–save-our-planet/en

इन 20 कार्यक्रमों में “स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ साथ, भारत की केवल 2 और संस्थाओं के ही कार्यक्रम प्रकाशित हुए हैं, और वे दोनों संस्थाएं गुजरात सरकार की हैं ! इन सभी 20 पर्यावरणीय कार्यक्रमों को करने वाली संस्थाओं का नाम एक साथ देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://www.fao.org/international-day-of-forests/events/en या उनमें से कुछ नाम निम्नलिखित लिस्ट में भी देखे जा सकतें हैं-

• कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ एनवायर्नमेंटल डिज़ाइन & मैनेजमेंट (California Institute of Environmental Design & Management)

• यूनाइटेड नेशंस FAO सेलेब्रटिंग आई डी ऍफ़ एंड वर्ल्ड वॉटर डे (United Nations FAO Celebrating the 2026 International Day of Forests and World Water Day)

• यूनाइटेड नेशंस FAO फॉरेस्ट एंड एकॉनॉमिस (United Nations FAO — Forests and economies: sustainable production and bioeconomy pathways)

• यूनाइटेड नेशंस FAO रीजनल ऑफिस फॉर एशिया एंड पैसिफिक (United Nations FAO Regional Office for Asia and the Pacific)

• यूनाइटेड नेशंस इकोनोमिक कमिशन फॉर यूरोप (United Nations Economic Commission for Europe – Grown by Nature )

• गुजरात स्टेट फारेस्ट डिपार्टमेंट (Gujarat State Forest Department)

• नवसारी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (Navsari Agricultural University)

• यूनिवर्सिटी ऑफ़ वीगो, स्कूल ऑफ़ फारेस्ट इंजीनियरिंग (University of Vigo, School of Forest Engineering)

• यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीओन, स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चरल एंड फॉरेस्ट इंजीनियरिंग (University of León, School of Agricultural and Forestry Engineering)

• एकेडमी ऑफ़ साइंस एंड आर्ट्स ऑफ़ द रिपब्लिका सर्पस्का (Academy of Sciences and Arts of the Republika Srpska)

• यूनाइटेड नेशंस फोरम ऑन फारेस्ट सेक्रेटेरिएट (United Nations Forum on Forests Secretariat)

आईये अब सक्षेप में बात करतें हैं कि जंगल से हमें क्या मिल सकता है और इसके बदलें में हम जंगल को क्या दे सकतें हैं-

जंगल हमें जीने के लिए परम आवश्यक शुद्ध वायु देते हैं (पेड़ ऑक्सीजन बनाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को कम करते हैं), जल चक्र बनाए रखते हैं (जंगल बारिश को प्रभावित करते हैं और पानी को जमीन में सुरक्षित रखते हैं), जलवायु संतुलित करते हैं (जंगल धरती के वातावरण को नियंत्रित करते हैं जिससे ग्लोबल वार्मिंग, आंधी, तूफ़ान, बाढ़ आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में काफी कमी आती है), जंगल असंख्य जीव – जंतुओं को आवास व भोजन उपलब्ध कराते हैं (Biodiversity Conservation), जंगल मानव जीवन के लिए विभिन्न उपयोगी संसाधन प्रदान करते हैं (जैसे- औषधियाँ, भोजन, फल, शहद आदि), जंगल उपजाऊ मिट्टी का संरक्षण करतें हैं (मिट्टी के कटाव – soil erosion को रोकते हैं) आदि !

इतने बेशकीमती लाभों के बदलें में, हमें जंगलों को बस एक चीज देनी होती है, और वो है “सुरक्षा” (क्योकि जंगल अपने आप में एक सस्टेनेबल इकोसिस्टम यानी पूर्ण आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र होता है जिसे जिन्दा रहने के लिए बाहर से खाद या पानी जैसी कोई मदद देने की जरूरत नहीं पड़ती है) ! अतः जंगलों को एक प्रभावशाली सुरक्षा देने के लिए, हमें निम्नलिखित प्रयास, नियमित रूप से करने होंगे-

पेड़ लगाना (Afforestation रोज अधिक से अधिक देशी प्रजाति के पेड़ लगाना), अवैध कटाई तत्काल रोकना (प्रशासन और आम लोगों को मिलकर निगरानी करनी चाहिए), कम से कम कागज का उपयोग (रिसाइकिल करने योग्य पदार्थों से बने कागज या डिजिटल चीजों का ज्यादा इस्तेमाल करना), जंगलों की आग रोकना (ध्यान रखना की किसी की थोड़ी सी लापरवाही से आग न लगने पाए), जागरूकता फैलाना (स्कूल, समाज और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाना) !

यहाँ बताना चाहेंगे कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस वर्ष “इंटरनेशनल डे ऑफ़ फॉरेस्ट” की थीम “Forests and Economies” तय की थी, जिसका उद्देश्य दुनिया को यही समझाना था कि …………. जंगल किस तरह लोगों की आजीविका, रोज़गार और आर्थिक मज़बूती में मदद करते हैं ! जंगल, टिकाऊ और सबको साथ लेकर चलने वाली अर्थव्यवस्थाओं का आधार हैं ! ये अरबों लोगों को आमदनी, ऊर्जा, भोजन और इकोसिस्टम से जुड़ी सेवाएँ मुहैया कराते हैं …………. और इसी उद्देश्य को आपका अपना “स्वयं बनें गोपाल” समूह भी बखूबी प्रसारित कर रहा है, इस वैचारिक क्रांति के माध्यम से- जानिये कैसे आश्चर्यजनक प्रॉफिट दे सकती है छोटी बंजर जमीन भी …………. जिसमें बेहद आसान तरीके से यही बताया गया है कि “भारतीय देशी गाय माँ” ना केवल बंजर जमीन में भी बेहद जल्द एक घना जंगल ऊगा सकती हैं, बल्कि उस जंगल से बेहतरीन कमाई भी करवा सकतीं हैं !

सारांशतः …………. अगर हम जंगल को सुरक्षा देंगे तो …………. जंगल ना केवल हमें सुरक्षा देंगे (ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषित वायु, आंधी, तूफ़ान, बाढ़ आदि जैसी विनाशकारी समस्याओं से) …………. बल्कि हमें रोजगार के विभिन्न अवसर भी प्रदान करेंगे !

जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !

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