जर्मन सरकार द्वारा संचालित इस विश्वप्रसिद्ध पर्यावरणीय गठबंधन का पार्टनर बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह

आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम,

जर्मन सरकार द्वारा संचालित विश्वप्रसिद्ध पर्यावरणीय गठबंधन है “सस्टेनेबल सैनिटेशन एलायंस” (Sustainable Sanitation Alliance) जो कि “सतत स्वच्छता” (Sustainable Sanitation) को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य- 6 (SDG-6, यानी स्वच्छ जल व स्वच्छता) को प्राप्त करने में योगदान देता है !

2007 में शुरू हुआ यह वैश्विक गठबंधन “सस्टेनेबल सैनिटेशन एलायंस”, जनता में मुख्यतः अपने शार्ट कट (संक्षिप्त) नाम यानी “सुसैनए” (SuSanA) नाम से प्रसिद्ध है और इस गठबंधन का पोषण, जर्मन सरकार का आर्थिक सहयोग और विकास संघीय मंत्रालय (German Federal Ministry for Economic Cooperation and Development) करता है !

अगर आदरणीय पाठकों को याद हो तो कुछ माह पूर्व प्रकाशित इस आर्टिकल- संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरणीय उपक्रम “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” का मेंबर बना “स्वयं बनें गोपाल” समूह में हमने बताया था कि “ग्लोबल वेस्ट वॉटर इनिशिएटिव” ने अपने 13 वे संस्करण के न्यूज़ लेटर (समाचार पत्र 2026) में पूरे विश्व से अपने जिन 7 मेंबर्स (सदस्यों) के कार्यों के बारें में प्रकाशन किया है, उनमें से “स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ – साथ सुसैनए गठबंधन का भी है !

आईये सबसे पहले समझते हैं कि सतत स्वच्छता (Sustainable Sanitation) का अर्थ होता क्या है ! सुसैनए (SuSanA) गठबंधन के अनुसार, एक स्वच्छता प्रणाली (Sanitation System) को “सतत” तभी माना जा सकता है, जब वह निम्नलिखित 5 प्रमुख मानदंडों को पूरा करती हो-

• स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सरंक्षण- यह मानव स्वास्थ्य की रक्षा करे और बीमारियों के प्रसार को रोके !

• पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन संवर्धन- यह प्राकृतिक जल स्रोतों और पर्यावरण को प्रदूषित न करे, तथा अपशिष्ट पदार्थों से ऊर्जा या खाद का पुनर्चक्रण (Recycling) संभव बनाए !

• तकनीकी एवं संस्थागत रूप से उपयुक्त- इसे संचालित करना आसान हो और स्थानीय संस्थाएं इसे प्रबंधित कर सकें !

• सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य- यह लोगों की आदतों और सामाजिक मूल्यों के अनुकूल हो !

• आर्थिक रूप से व्यवहारिक- यह सस्ती हो और इसे बनाने तथा बनाए रखने में समाज की आर्थिक क्षमता का ध्यान रखा जाए !

इन्ही सब समाज उपयोगी मानकों, नीतियों, कार्यप्रणालियों के सतत उत्थान के लिए स्थापना की गयी है सुसैनए गठबंधन की जो वास्तव में एक विशाल ग्लोबल फोरम है …………………. जहाँ दुनिया के बेहतरीन साइंटिस्ट्स, एक्सपर्ट्स आदि अलग – अलग विषयों (जैसे- जल सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, बायोगैस प्लांट, अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी स्वच्छता आदि) से जुड़ी समस्याओं के तकनीकी समाधान उपलब्ध कराते हैं …………………. जिससे वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर सरकारों को ऐसी नीतियां को बनाने में मदद मिलती है जो सस्टेनेबल (टिकाऊ) हों !

सुसैनए गठबंधन की जो क्षेत्रीय शाखा है, वो भारत सरकार के स्वच्छता अभियानों को टेक्नोलॉजी व नॉलेज संबंधित सहायता देती है ……………एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए, स्वच्छता की परम आवश्यकता व महत्व को, भलीभांति समझतें हैं भारतवर्ष के बेहद दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, इसलिए उन्होंने वर्ष 2014 से ही शुरू कर दिया था “स्वच्छ भारत अभियान” (Clean India Mission) …………… जो कि एक वृहद राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन है और जिसका मुख्य उद्देश्य उचित साफ – सफाई के प्रति आम जनमानस को जागरूक करना है …………… इसलिए सभी बीजेपी शासित मुख्यमंत्री गण, जनता को प्रेरित करने के लिए, खुद ही स्वच्छता अभियानो का नेतृत्व करतें रहतें हैं !

देखा जाए तो पूरी पृथ्वी और उस पर रहने वाले सभी जीवों का उम्मीद से कई ज्यादा गुना भला हो सकता है ………….. अगर हर आम जनमानस निम्नलिखित (छोटी दिखने वाली, लेकिन गंभीर असर डालने वाली) 4 समस्याओं के आसान प्राकृतिक समाधानों को अपनाये –

पहली समस्या – प्लास्टिक से बने सामानों (जैसे- बोतल, बैग्स – थैला आदि) का इस्तेमाल करना (जो बिस्फेनॉल ए, थैलेट्स जैसे जहरीले केमिकल्स का स्राव करतें है, साथ ही माइक्रोप्लास्टिक – नैनोप्लास्टिक में टूटकर, बारिश या अपशिष्ट जल के माध्यम से, मिट्टी और अंततः भूजल में पहुंचकर प्रदूषण फैलातें है) !

पहली समस्या का समाधान – प्लास्टिक बॉटल्स/बैग्स की जगह , रियूजेबल बॉटल्स व बैग्स (जैसे- स्टील/मिटटी के बॉटल्स व कपड़ों से बने बैग्स आदि) का इस्तेमाल करना !

दूसरी समस्या – अधिक पैदावार के नाम पर, विभिन्न तरह के केमिकल्स युक्त प्रोडक्ट्स (जैसे- फ़र्टिलाइजर्स , पेस्टिसाइड्स आदि) का इस्तेमाल करके, धरती माँ को दूषित व बंजर बनाना (जिनसे अन्ततः नदी, तालाब, झील, भूगर्भ जल आदि जैसे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित होतें हैं) !

दूसरी समस्या का समाधान – इस समस्या के कई बेहद आसान उपायों को जानने के लिए, कृपया “स्वयं बनें गोपाल” समूह की वेबसाइट के इस लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ बेहद उपजाऊ खेती, सुंदर स्वास्थ्य कैसे प्रदान कर सकतीं हैं भारतीय देशी नस्ल की गाय माँ

तीसरी समस्या – शरीर को साफ़, सुंदर और स्वस्थ रखने के नाम पर, विभिन्न तरह के केमिकल्स युक्त प्रोडक्ट्स (जैसे- वाशिंग पाउडर, साबुन, शैम्पू, क्रीम, मेकअप सॉल्यूशंस और अनावश्यक एलोपैथिक मेडिसिन्स आदि) का लगातार इस्तेमाल करना (जिनसे शरीर अन्ततः कमजोर, निस्तेज बन सकता है, साथ ही प्राकृतिक जल स्रोत व भूमि भी दूषित होती है) !

तीसरी समस्या का समाधान – इस समस्या के कई बेहद कारगर उपायों को जानने के लिए, कृपया “स्वयं बनें गोपाल” समूह की वेबसाइट के लिंक पर क्लिक करें- जानिये ➤ हर शारीरिक व मानसिक बीमारियों का नाश कर सकने में सक्षम, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां (जैसे- योगासन, प्राणायाम, ध्यान, बन्ध, मुद्राएं, यौगिक क्रियाएं, आयुर्वेद, मर्म चिकित्सा, एक्यूप्रेशर)

चौथी समस्या – खाने से संबंधित चीजों (जैसे- सब्जियों फलों के छिलके, बासी खाना आदि) को कूड़े की तरह फेक देना (जिससे ये चीजें, पौधों को स्वस्थ रखने वाली बेशकीमती खाद में बदलने की जगह, मनुष्यों में बिमारी पैदा करने वाले इन्फेक्शन युक्त कूड़े में बदल जातीं है) !

चौथी समस्या का समाधान – विश्व में हर साल अरबों टन किचेन वेस्ट (खराब खाने पीने की चीजों) के अलावा, क्रॉप वेस्ट (विभिन्न फसलों को तने , शाखाएँ, पत्तियाँ, बीज, ख़राब फल – फूल – अनाज आदि) निकलता है, जिसे प्राकृतिक विधि से मुफ्त में बेशकीमती खाद में बदलकर पूरी दुनिया का कल्पना से ज्यादा भला किया जा सकता है ! किचेन व क्रॉप वेस्ट को खाद में बदलने वाली सबसे आसान प्राकृतिक विधि को जानने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें-विश्व पर्यावरण दिवस पर, जानिये स्वयं व समाज को भी जबरदस्त लाभान्वित कर सकने वाली आसान थ्योरी “चार बिना हार” को)

इसके अलावा पेट्रोल – डीज़ल जैसे केमिकल्स से चलने वाली गाड़ियों का कम से कम इस्तेमाल करके, पैदल, साइकिल, शेयरिंग वीइकल्स या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करने से भी, विश्व के सभी प्राणियों को आश्चर्यजनक लाभ मिल सकता है (यातायात में भी पेट्रोल – डीज़ल का कम से कम से प्रयोग होने से, समाज पर क्या जबरदस्त पॉजिटिव असर पड़ सकता है, जानने के लिए कृपया हमारे इस आर्टिकल को पढ़ें- संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं के सहयोग से निर्मित विश्व यातायात सम्बन्धित रिपोर्ट में, भारत के राष्ट्रीय केन्द्रीय प्रतिनिधि की भूमिका निभायी हमारे स्वयं सेवक ने) !

वर्तमान में सुसैनए गठबंधन से अभी विश्व की 413 संस्थाएं, पार्टनर (Partner) की तरह जुड़ी हुई हैं, जिनमें से एक है आपका अपना “स्वयं बनें गोपाल” समूह, जिसका विवरण सुसैनए गठबंधन की वेबसाइट पर देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें- https://susana.org/community/partners?id=1818

“स्वयं बनें गोपाल” समूह के साथ – साथ विश्व की जो 413 संस्थाएं, सुसैनए गठबंधन से पार्टनर के तौर पर जुड़ी हुई हैं उनका विवरण देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करिये- https://www.susana.org/community/partners या उनमें कुछ संस्थाओं का नाम निम्नलिखित लिस्ट में देखा जा सकता है-

• यू एन ह्यूमन सेटलमेंट प्रोग्राम (United Nations Human Settlement Programme)

• यू एन चिल्ड्रेन फण्ड (United Nations Childrens Fund)

• यू एन FAO लैंड & वॉटर डेवलोपमेन्ट डिवीज़न (UN FAO Land & Water Development Division)

• मिनिस्टरी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट IWRP (Ministry of Agriculture and Rural Development – IWRP)

• लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबिलिटी (Local Governments for Sustainability)

• वॉटर रिसर्च कमिशन (Water Research Commission)

• ऑस्ट्रियन डेवलपमेंट एजेंसी (Austrian Development Agency)

• जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (Japan International Cooperation Agency)

• स्वीडिश इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी (Swedish International Development Agency)

• GIZ जर्मन सरकार एजेंसी (GIZ)

• येल यूनिवर्सिटी – होराइजन इंटरनेशनल (Yale University – Horizon International)

• नार्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी (North Carolina State University)

• यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी सिडनी (University of Technology Sydney- ISF)

• हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी- IWMWP(Hamburg University of Technology, IWMWP)

• नार्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ़ लाइफ साइंस (Norwegian University of Life Sciences)

• स्टॉकहोम एनवायरनमेंट इंस्टिट्यूट (Stockholm Environment Institute)

• यूनिवर्सिटी ऑफ़ बॉन- CDR (University of Bonn- CDR )

• फ़ेडरल इंस्टिट्यूट फॉर जियोसाइंस & नेचुरल रिसोर्सेस (Federal Institute for Geosciences & Natural Resources)

• नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स (National Institute of Urban Affairs)

• ईस्ट कोलकाता वेटलैंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (East Kolkata Wetland Management Authority)

• सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Sardar Vallabhbhai National Institute of Technology)

• इंडियन इंस्टिट्यूट फॉर ह्यूमन सेट्लमेंट्स (Indian Institute for Human Settlements)

• आई आई टी पलक्कड़ TIF (IIT Palakkad TIF)

• भारतीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय- EIACP (Indian Ministry of Environment, Forest and Climate Change- EIACP)

यहाँ आदरणीय पाठकों को याद दिलाना चाहेंगे कि “स्वयं बनें गोपाल” समूह, जर्मन सरकार को मेम्बर बनाने वाले इस कृषि उपक्रम का भी मेंबर बन चुका है- जर्मनी, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड समेत 53 देशों की सरकारों के साथ – साथ “स्वयं बनें गोपाल” समूह भी मेम्बर बना इस विश्वप्रसिद्ध कृषि उपक्रम का !

जय हो परम आदरणीय गौ माता की !
वन्दे मातरम् !

“संयुक्त राष्ट्र संघ” में “स्वयं बनें गोपाल” समूह की बढ़ती भागीदारी जानने के लिए कृपया इसी लिंक पर क्लिक करें

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण से संबन्धित आवश्यक सूचना)- विभिन्न स्रोतों व अनुभवों से प्राप्त यथासम्भव सही व उपयोगी जानकारियों के आधार पर लिखे गए, विभिन्न लेखकों/एक्सपर्ट्स के निजी विचार ही “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि पर विभिन्न लेखों/कहानियों/कविताओं/पोस्ट्स/विडियोज़ आदि के तौर पर प्रकाशित हैं, लेकिन “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट, इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, दी गयी किसी भी तरह की जानकारी की सत्यता, प्रमाणिकता व उपयोगिता का किसी भी प्रकार से दावा, पुष्टि व समर्थन नहीं करतें हैं, इसलिए कोई भी जानकारी अधूरी या गलत भी हो सकती है ! अतः कृपया इन जानकारियों को किसी भी तरह से प्रयोग में लाने से पहले, प्रत्यक्ष रूप से मिलकर, उन सम्बन्धित जानकारियों के दूसरे एक्सपर्ट्स से भी परामर्श अवश्य ले लें ! इसलिए किसी को भी, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान की इस वेबसाइट/फेसबुक पेज/ट्विटर पेज/यूट्यूब चैनल आदि के द्वारा, और इससे जुड़े हुए किसी भी लेखक/एक्सपर्ट के द्वारा, और किसी भी अन्य माध्यम के द्वारा, प्राप्त हुई किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रयोग में लाने से हुई, किसी भी तरह की हानि व समस्या के लिए “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान और इससे जुड़े हुए कोई भी लेखक/एक्सपर्ट जिम्मेदार नहीं होंगे ! धन्यवाद !