आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, संयुक्त राष्ट्र संघ के 193 देशों द्वारा, पूरी पृथ्वी के पर्यावरण सरंक्षण के लिए ली गयी प्रतिबद्धता यानी “टेन वाई. एफ. पी.” (10YFP) को
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, जैसा की सभी को पता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ लगातार प्रयास कर रहा है पूरे विश्व के पारिस्थितिकी तंत्र का फिर से कायाकल्प
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, पिछली सदी (यानी सन 1900) को परमाणु सदी माना जाता है क्योकि पिछली सदी की सबसे महत्वपूर्ण खोज, परमाणु सम्बंधित अविष्कारों को माना जाता
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, वास्तव में समुद्रों का सरंक्षण दुनिया की सबसे ज्वलंत समस्याओं में से एक है और पृथ्वी पर स्थित जीवों का जीवनचक्र सुगमता पूर्वक चलते
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, अमेरिका देश में स्थित “एम. आई. टी.” यानी मैसाचूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology; https://web.mit.edu/) को पूरे विश्व का नंबर वन इंजीनियरिंग
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, यूनेस्को के सामुद्रिक उपक्रम “ओशन एक्सपर्ट” (Ocean Expert; https://oceanexpert.org/) ने भी “स्वयं बनें गोपाल” समूह को स्वीकृत किया है, जिसे देखने के लिए कृपया
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था “यू. एन. फ़ूड सिस्टम कोआर्डिनेशन हब” (UN Food Systems Coordination Hub; https://www.unfoodsystemshub.org/en) ने खाद्य व्यवस्था में कायाकल्प (सम्पूर्ण सुधार)
(For reading this article in English language, please click on this link- General Assembly invited our volunteer in the meetings organized for Tuberculosis, Disaster Risk Reduction, Press Freedom and Developmental
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली ने इस वर्ष दोबारा हमारे स्वयं सेवक को आमंत्रित किया है ! जनरल असेंबली के 77 वें सेशन
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, न्यूक्लियर वेपन्स (परमाणु हथियार) से हो सकने वाले संभावित खतरों के प्रति गंभीर व सर्वव्यापी जागरूकता लाया जा सके ताकि परमाणु हथियार मुक्त एक
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, जैसा कि हमने लगभग 3 वर्ष पूर्व प्रकाशित आर्टिकल में बताया था कि 94 देशों की सरकारों द्वारा स्थापित किये गए विश्व प्रसिद्ध उपक्रम
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा होने के बावजूद भी, हिन्दी भाषियों को वर्षों का इंतजार करना पड़ा इस सम्मान को