जी हाँ, यह तय बात है कि इस दुनिया में हम जिन जिन व्यक्तियों/वस्तुओं से जितना ज्यादा आसक्ति रखेंगे (ईश्वर को छोड़कर) उन उन व्यक्तियों/वस्तुओं से उतना ज्यादा दुःख (जो
श्रीमत् भागवत पुराण में भगवान दत्तात्रेय सर्प की निर्मोही पन से प्रभावित थे इसलिए वे सर्प की निर्मोहीपन, निरासक्ति और संग्रह न करने की इच्छा को अनुकरणीय मानते थे। क्योकि