श्री स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन में कई विषयों के रहस्यमय पहलुओ का उजागर किया जिसकी वजह से उनकी गिनती आज भी दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोगों में होती
जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी। उसे अपने पीछे आते देखकर यमराज ने उसे
हर व्यक्ति के जीवन का अन्त ही प्रलय है । श्री महर्षि ने जाने कितने छात्रों को, जाने कितनी बार पढ़ाया होगा यह सूक्त। कितनी बार दुहराया होगा वह अर्थ जो उन्होंने अपने
ये प्रसंग है, अनन्त ब्रह्माण्ड नायक योगेश्वर श्री कृष्ण और उनके परम प्रिय पांडु पुत्रों का | महाभारत के अति भीषण युद्ध में जीत के बाद जब सब कुछ सामान्य
पिता रत्नाकरो यस्य, लक्ष्मीर्यस्य सहोदरी । शङ्खो भिक्षाटनं कुर्यात्, फलं भाग्यानुसारतः ।। मतलब – पिता जिसका सागर है, और लक्ष्मी जिसकी बहन है (यहाँ शंख की बात हो रही
ये कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि हार्ड कोर, वेरी एनसीएन्ट साइंस है जिसका नाम है “योग” जिसके प्रथम प्रणेता थे अनन्त शक्तिशाली, जन्म – मृत्यु से रहित, सबको बनाने,
वैसे तो उड़ीसा के पुरी मंदिर को कलियुग का साक्षात मोक्षदायिनी तीर्थ कहा गया है और जहा साक्षात जगन्नाथ भगवान कृष्ण विराजते हो उस स्थल पर अनगिनत दृश्य – अदृश्य
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने भी उस रामपथ को खोजने की शुरूआत की है जो अयोध्या से चित्रकूट होता हुआ दण्डकारण क्षेत्र से पंचवटी होते हुआ रामेश्वरम जाता है !