5000 साल पहले हुई भविष्यवाणी कितनी सटीक साबित हो रही है

ये प्रसंग है, अनन्त ब्रह्माण्ड नायक योगेश्वर श्री कृष्ण और उनके परम प्रिय पांडु पुत्रों का | महाभारत के अति भीषण युद्ध में जीत के बाद जब सब कुछ सामान्य

देवभाषा संस्कृत में लिखे बच्चों, बूढों और जवानों के लिए कुछ नियम

  पिता रत्नाकरो यस्य, लक्ष्मीर्यस्य सहोदरी । शङ्खो भिक्षाटनं कुर्यात्, फलं भाग्यानुसारतः ।। मतलब – पिता जिसका सागर है, और लक्ष्मी जिसकी बहन है (यहाँ शंख की बात हो रही

लकवा, पागलपन, घबराहट, डर, स्ट्रेस, डिप्रेशन, मेमोरी लॉस आदि सभी मानसिक रोगो में गारन्टीड फायदा देगी यह मुद्रा

ये कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि हार्ड कोर, वेरी एनसीएन्ट साइंस है जिसका नाम है “योग” जिसके प्रथम प्रणेता थे अनन्त शक्तिशाली, जन्म – मृत्यु से रहित, सबको बनाने,

सैकड़ो रोगो में फायदा है अर्जुन

अर्जुन एक बहुत शक्तिशाली और बहुउपयोगी पौधा है ! अर्जुन की लगभग 15 प्रजातिया पाई जाती है पर उनमे से एक ही संभवत: ह्रदय रोग के लिए फायदेमंद है !

कई महान आश्चर्यों को अपने में समेटा है पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर

वैसे तो उड़ीसा के पुरी मंदिर को कलियुग का साक्षात मोक्षदायिनी तीर्थ कहा गया है और जहा साक्षात जगन्नाथ भगवान कृष्ण विराजते हो उस स्थल पर अनगिनत दृश्य – अदृश्य

जानिये बारिश के पानी के औषधीय गुण

बारिश के पानी का कोई चिकित्सकीय लाभ भी हो सकता है ऐसा बहुत से लोगो को बिलकुल नहीं पता। पर हां सावन के महीने की शुरू की चार पांच बारिश

धर्म पिता के धर्म पुत्र का धर्म

पांड़ु पुत्र युधिष्ठर के बारे में चर्चा करते ही लोग उनके जुए में सर्वस्व हारने की बात याद करते है पर ये भूल जाते है की युधिष्ठर जी से बड़ा

मृत गाय माता का पुर्नजन्म

संत अपनी योग विभूतियों को जगजाहिर नहीं करते लेकिन जरुरत पड़ने पर कृपा करने से पीछे भी नहीं हटते। मिथिला के बनगाँव के श्री कारी खाँ ने स्वामी जी को

पूरे विश्व के बारह शिवलिंग एक ही स्थान पर, वह भी भगवान श्री राम द्वारा स्थापित

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने भी उस रामपथ को खोजने की शुरूआत की है जो अयोध्या से चित्रकूट होता हुआ दण्डकारण क्षेत्र से पंचवटी होते हुआ रामेश्वरम जाता है !

एक जीभ चार जबान

वाणी सामान्य अर्थों में वह कही जाती है जो जिह्वा से कही और कानों से सुनी जाये। इसका एक स्वरूप लेखन और वाचन भी हो सकता है। यह स्थूल वाणी

अमेरिका की धर्म सभा में श्री विवेकानंद का आगाज

(श्री विवेकानंद का भाषण सन 1893 में, अमेरिका के शिकागो में)- अमेरिका के बहनो और भाइयों, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया

कमजोर और बीमार शरीर तुरन्त रिस्टोर व रिफ्रेश होने लगता है ध्यान में

ध्यान की विभिन्न स्थितियों का अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया हैं कि ध्यान (dhyan) की अतल गहराई में प्रविष्ट होने पर साधक के शारीरिक एवं मानसिक क्रिया-कलापों में एकरसता-

हस्त मुद्राऐं और उनके लाभ

ब्रह्म मुद्रा (Brahma mudra) – – रीढ़ की हड्डी और गर्दन सीधी रखते हुए गर्दन को धीरे-धीरे दाईं ओर ले जाएं, कुछ देर रुकें और फिर गर्दन को सीधे बाईं

बहुत सीधा और आसान पर बेहद आश्चर्यजनक फायदेमंद

सदैव अचूक फल देने वाला सिद्धांत है कि, अगर आपको आपकी किसी बीमारी में आराम ना मिल रहा हो तो आप तुरन्त ऐसे गरीब लाचार लोगों (जो पैसे की कमी