(भाई राजीव दीक्षित सही मायने में आधुनिक युग के निर्भीक कान्तिकारी थे जिन्होंने कानपुर आई आई टी से M. TECH और अन्य कई बड़े साइंस प्रोजेक्ट से जुड़ने के बावजूद
शा. मोड़कमल केजड़ीवाल, कलकत्ता लिखते हैं कि जोधपुर राज्य के एक गाँव में हमारी जन्मभूमि है। हिन्दी मिडिल पास करने के बाद पास के गाँव में प्राइमरी स्कूल का अध्यापक
श्री शंभूचरण विश्वनोई, वीरपुर लिखते हैं कि हमारे पिता जी बड़े चतुर और बुद्घिमान थे। उन्होने अपने हाथों लगभग दस लाख की सम्पत्ति कमाई थी। जमींदारी, देन-लेन, घी और गल्ले
श्री बामन जी तरुड़कार ,बेतूल लिखते हैं कि मेरे पिताजी गायत्री के अनन्य भक्त हैं। उनका अधिकांश समय गायत्री उपासना में जाता है। 24 लक्ष का अनुष्ठान कर चुके हैं
भीत-सी आँखोंवाली उस दुर्बल, छोटी और अपने-आप ही सिमटी-सी बालिका पर दृष्टि डाल कर मैंने सामने बैठे सज्जन को, उनका भरा हुआ प्रवेशपत्र लौटाते हुए कहा – ‘आपने आयु ठीक
चिकित्सा की अन्य पद्धतियों की तरह एक्युप्रेशर भी इलाज का एक बेहतरीन तरीका होता हैं। अब ये तरीके अपने यहां भी इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। एक्युप्रेशर में एक्यु
पं. शंभूप्रसाद मिश्र, हृदयनगर, कहते हैं कि मुझे अनुभव है कि मेरे इष्ट वेदमाता ने मेरे बड़े-बड़े हानि-लाभ के कार्यों में स्वप्नों में ही दिग्दर्शन कराके आने वाली विपत्ति से
पं. लक्ष्मी नाथ झा व्याकरण साहित्याचार्य, झॉंसी लिखते हैं कि यह सेवक मिथिल के चौमथ ग्राम, यज्ञोपवीत संस्कार के अनन्तर से ही कुछ गायत्री मंत्र जप किया करता था। किन्तु