श्री बलवन्त विष्णु नागदे, राजमहेन्द्री कहते हैं कि व्यापारी को फुरसत नहीं मिलती । हमकों बहुत काम रहता है। रात को दो बजे तक अक्सर काम करना पड़ता है। इसलिए
(भाई राजीव दीक्षित सही मायने में आधुनिक युग के निर्भीक कान्तिकारी थे जिन्होंने कानपुर आई आई टी से M. TECH और अन्य कई बड़े साइंस प्रोजेक्ट से जुड़ने के बावजूद
श्री मेघायती जी नगीना अपनी अनुभूति प्रकट करती हुई लिखती हैं कि गायत्री मन्त्र ईश्वर की उपासना के लिये मुख्य मन्त्र है। मेरा तो इस पर अति अटूट विश्वास और
ठा. जंगजीतसिंह राठोर, रानीपुरा, लिखते हैं कि हमारे ताऊजी एक अजनबी आदमी से कुछ जेवर सस्तेपन के लोभ में आकर खरीद लिया था। यह षडय़ंत्र हमारे एक शत्रु का था
उद्यान की शैल-माला के नीचे एक हरा-भरा छोटा-सा गाँव है। वसन्त का सुन्दर समीर उसे आलिंगन करके फूलों के सौरभ से उसके झोपड़ों को भर देता है। तलहटी के हिम-शीतल
श्यामसुन्दर ने विरक्त होकर कहा-”कला! यह मुझे नहीं अच्छा लगता।” कलावती ने लैम्प की बत्ती कम करते हुए सिर झुकाकर तिरछी चितवन से देखते हुए कहा-”फिर मुझे भी सोने के