उपन्यास – गबन – 3 -1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

इक्कीस   अगर इस समय किसी को संसार में सबसे दुखी, जीवन से निराश, चिंताग्नि में जलते हुए प्राणी की मूर्ति देखनी हो, तो उस युवक को देखे, जो साइकिल

उपन्यास – गबन – 4 – 1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

उसी दिन शव काशी लाया गया। यहीं उसकी दाह-क्रिया हुई। वकील साहब के एक भतीजे मालवे में रहते थे। उन्हें तार देकर बुला लिया गया। दाह-क्रिया उन्होंने की। रतन को

उपन्यास – गबन – 4 – 2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पैंतीस रूदन में कितना उल्लास, कितनी शांति, कितना बल है। जो कभी एकांत में बैठकर, किसी की स्मृति में, किसी के वियोग में, सिसक-सिसक और बिलखबिलख नहीं रोया, वह जीवन

उपन्यास – गबन – 5 – 2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

अड़तालीस सारे दिन रमा उद्वेग के जंगलों में भटकता रहा। कभी निराशा की अंधाकारमय घाटियां सामने आ जातीं, कभी आशा की लहराती हुई हरियाली । ज़ोहरा गई भी होगी ?

उपन्यास – गोदान – 2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

सेमरी और बेलारी दोनों अवध-प्रांत के गाँव हैं। जिले का नाम बताने की कोई जरूरत नहीं। होरी बेलारी में रहता है, रायसाहब अमरपाल सिंह सेमरी में। दोनों गाँवों में केवल

निबंध – अरण्य-रोदन (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

कई बार देश की छाती पर प्रहार हुए। आत्‍माएँ तिलमिल उठी। शासकों ने अपनी मनमानी की। दमन का बवंडर उठा और इतिहास के वर्क उलट गये। दमन की भूतकालीन घटनाएँ

उपन्यास – गोदान – 7 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

यह अभिनय जब समाप्त हुआ, तो उधर रंगशाला में धनुष-यज्ञ समाप्त हो चुका था और सामाजिक प्रहसन की तैयारी हो रही थी, मगर इन सज्जनों को उससे विशेष दिलचस्पी न

उपन्यास – गोदान – 8 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

यह अभिनय जब समाप्त हुआ, तो उधर रंगशाला में धनुष-यज्ञ समाप्त हो चुका था और सामाजिक प्रहसन की तैयारी हो रही थी, मगर इन सज्जनों को उससे विशेष दिलचस्पी न