उपन्यास – गोदान – 3 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होरी अपने गाँव के समीप पहुँचा, तो देखा, अभी तक गोबर खेत में ऊख गोड़ रहा है और दोनों लड़कियाँ भी उसके साथ काम कर रही हैं। लू चल रहीं
उपन्यास – गोदान – 4 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होरी को रात-भर नींद नहीं आई। नीम के पेड़-तले अपने बाँस की खाट पर पड़ा बार-बार तारों की ओर देखता था। गाय के लिए नाँद गाड़नी है। बैलों से अलग
उपन्यास – गोदान – 5 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 उधर गोबर खाना खा कर अहिराने में जा पहुँचा। आज झुनिया से उसकी बहुत-सी बातें हुई थीं। जब वह गाय ले कर चला था, तो झुनिया आधे रास्ते तक उसके
निबंध – अरण्य-रोदन (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी) March 9, 2021April 15, 2015 कई बार देश की छाती पर प्रहार हुए। आत्माएँ तिलमिल उठी। शासकों ने अपनी मनमानी की। दमन का बवंडर उठा और इतिहास के वर्क उलट गये। दमन की भूतकालीन घटनाएँ
उपन्यास – गोदान – 6 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 जेठ की उदास और गर्म संध्या सेमरी की सड़कों और गलियों में, पानी के छिड़काव से शीतल और प्रसन्न हो रही थी। मंडप के चारों तरफ फूलों और पौधों के
उपन्यास – गोदान – 7 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 यह अभिनय जब समाप्त हुआ, तो उधर रंगशाला में धनुष-यज्ञ समाप्त हो चुका था और सामाजिक प्रहसन की तैयारी हो रही थी, मगर इन सज्जनों को उससे विशेष दिलचस्पी न
उपन्यास – गोदान – 8 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 यह अभिनय जब समाप्त हुआ, तो उधर रंगशाला में धनुष-यज्ञ समाप्त हो चुका था और सामाजिक प्रहसन की तैयारी हो रही थी, मगर इन सज्जनों को उससे विशेष दिलचस्पी न
उपन्यास – गोदान – 9 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे।
उपन्यास – गोदान – 10 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 हीरा का कहीं पता न चला और दिन गुजरते जाते थे। होरी से जहाँ तक दौड़-धूप हो सकी, की; फिर हार कर बैठ रहा। खेती-बारी की भी फिक्र करना थी।
उपन्यास – गोदान – 11 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 ऐसे असाधारण कांड पर गाँव में जो कुछ हलचल मचनी चाहिए, वह मची और महीनों तक मचती रही। झुनिया के दोनों भाई लाठियाँ लिए गोबर को खोजते फिरते थे। भोला
उपन्यास – गोदान – 12 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 रात को गोबर झुनिया के साथ चला, तो ऐसा काँप रहा था, जैसे उसकी नाक कटी हुई हो। झुनिया को देखते ही सारे गाँव में कुहराम मच जायगा लोग चारों
उपन्यास – गोदान – 13 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 गोबर अँधेरे ही मुँह उठा और कोदई से बिदा माँगी। सबको मालूम हो गया था कि उसका ब्याह हो चुका है, इसलिए उससे कोई विवाह-संबंधी चर्चा नहीं की। उसके शील-स्वभाव
उपन्यास – गोदान – 14 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होरी की फसल सारी की सारी डाँड़ की भेंट हो चुकी थी। वैशाख तो किसी तरह कटा, मगर जेठ लगते-लगते घर में अनाज का एक दाना न रहा। पाँच-पाँच पेट
उपन्यास – गोदान – 15 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 मालती बाहर से तितली है, भीतर से मधुमक्खी। उसके जीवन में हँसी ही हँसी नहीं है, केवल गुड़ खा कर कौन जी सकता है! और जिए भी तो वह कोई
उपन्यास – गोदान – 16 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 रायसाहब को खबर मिली कि इलाके में एक वारदात हो गई है और होरी से गाँव के पंचों ने जुरमाना वसूल कर लिया है, तो फोरन नोखेराम को बुला कर
उपन्यास – गोदान – 17 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 गाँव में खबर फैल गई कि रायसाहब ने पंचों को बुला कर खूब डाँटा और इन लोगों ने जितने रुपए वसूल किए थे, वह सब इनके पेट से निकाल लिए।