उपन्यास – गोदान – 21 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 देहातों में साल के छ: महीने किसी न किसी उत्सव में ढोल-मजीरा बजता रहता है। होली के एक महीना पहले से एक महीना बाद तक फाग उड़ती है, असाढ़ लगते
उपन्यास – गोदान – 22 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 इधर कुछ दिनों से रायसाहब की कन्या के विवाह की बातचीत हो रही थी। उसके साथ ही एलेक्शन भी सिर पर आ पहुँचा था, मगर इन सबों से आवश्यक उन्हें
उपन्यास – गोदान – 23 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 गोबर और झुनिया के जाने के बाद घर सुनसान रहने लगा । धनिया को बार-बार चुन्नू की याद आती रहती है । बच्चे की माँ तो झुनिया थी, पर उसका
उपन्यास – गोदान – 24 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 सोना सत्रहवें साल में थी और इस साल उसका विवाह करना आवश्यक था। होरी तो दो साल से इसी फिक्र में था, पर हाथ खाली होने से कोई काबू न
उपन्यास – गोदान – 25 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 भोला इधर दूसरी सगाई लाए थे। औरत के बगैर उनका जीवन नीरस था। जब तक झुनिया थी, उन्हें हुक्का-पानी दे देती थी। समय से खाने को बुला ले जाती थी।
उपन्यास – गोदान – 26 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 लाला पटेश्वरी पटवारी-समुदाय के सद्गुणों के साक्षात अवतार थे। वह यह न देख सकते थे कि कोई असामी अपने दूसरे भाई की इंच भर भी जमीन दबा ले। न वह
उपन्यास – गोदान – 27 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 मिस्टर खन्ना को मजूरों की यह हड़ताल बिलकुल बेजा मालूम होती थी। उन्होंने हमेशा जनता के साथ मिले रहने की कोशिश की थी। वह अपने को जनता का ही आदमी
उपन्यास – गोदान – 28 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 मिस्टर खन्ना को मजूरों की यह हड़ताल बिलकुल बेजा मालूम होती थी। उन्होंने हमेशा जनता के साथ मिले रहने की कोशिश की थी। वह अपने को जनता का ही आदमी
उपन्यास – गोदान – 29 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 नोहरी उन औरतों में न थी, जो नेकी करके दरिया में डाल देती हैं। उसने नेकी की है, तो उसका खूब ढिंढोरा पीटेगी और उससे जितना यश मिल सकता है,
उपन्यास – गोदान – 30 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 मिल करीब-करीब पूरी जल चुकी है, लेकिन उसी मिल को फिर से खड़ा करना होगा। मिस्टर खन्ना ने अपनी सारी कोशिशें इसके लिए लगा दी हैं। मजदूरों की हड़ताल जारी
उपन्यास – गोदान – 31 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 रायसाहब का सितारा बुलंद था। उनके तीनों मंसूबे पूरे हो गए थे। कन्या की शादी धूम-धाम से हो गई थी, मुकदमा जीत गए थे और निर्वाचन में सफल ही न
उपन्यास – गोदान – 32 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 मिर्जा खुर्शेद ने अस्पताल से निकल कर एक नया काम शुरू कर दिया था। निश्चिंत बैठना उनके स्वभाव में न था। यह काम क्या था? नगर की वेश्याओं की एक
उपन्यास – गोदान – 33 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 डाक्टर मेहता परीक्षक से परीक्षार्थी हो गए हैं। मालती से दूर-दूर रह कर उन्हें ऐसी शंका होने लगी है कि उसे खो न बैठें। कई महीनों से मालती उनके पास
उपन्यास – गोदान – 34 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 सिलिया का बालक अब दो साल का हो रहा था और सारे गाँव में दौड़ लगाता था। अपने साथ वह एक विचित्र भाषा लाया था, और उसी में बोलता था,
उपन्यास – गोदान – 35 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होरी की दशा दिन-दिन गिरती ही जाती थी। जीवन के संघर्ष में उसे सदैव हार हुई, पर उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। प्रत्येक हार जैसे उसे भाग्य से लड़ने की
उपन्यास – गोदान – 36 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 दो दिन तक गाँव में खूब धूमधाम रही। बाजे बजे, गाना-बजाना हुआ और रूपा रो-धो कर बिदा हो गई, मगर होरी को किसी ने घर से निकलते न देखा। ऐसा