कहानी – शोक का पुरस्कार – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 आज तीन दिन गुज़र गये। शाम का वक्त था। मैं युनिवर्सिटी हॉल से खुश-खुश चला आ रहा था। मेरे सैकड़ों दोस्त मुझे बधाइयाँ दे रहे थे। मारे खुशी के मेरी
कहानी – सैलानी बंदर – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 जीवनदास नाम का एक गरीब मदारी अपने बन्दर मन्नू को नचाकर अपनी जीविका चलाया करता था। वह और उसकी स्त्री बुधिया दोनों मन्नू को बहुत प्यार करते थे। उनके कोई
कहानी – शेख़ मख़मूर – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 मुल्के जन्नतनिशाँ के इतिहास में बहुत अँधेरा वक़्त था जब शाह किशवर की फ़तहों की बाढ़ बड़े ज़ोर-शोर के साथ उस पर आयी। सारा देश तबाह हो गया। आज़ादी की
कहानी – लेखक – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 प्रात:काल महाशय प्रवीण ने बीस दफा उबाली हुई चाय का प्याला तैयार किया और बिना शक्कर और दूध के पी गये। यही उनका नाश्ता था। महीनों से मीठी, दूधिया चाय
कहानी – होली का उपहार – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 मैकूलाल अमरकान्त के घर शतरंज खेलने आये, तो देखा, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहे हैं। पूछा-कहीं बाहर की तैयारी कर रहे हो क्या भाई? फुरसत हो, तो
कहानी – अलग्योझा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष
कहानी – ईदगाह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ
कहानी – सांसारिक प्रेम और देश प्रेम – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 शहर लन्दन के एक पुराने टूटे-फूटे होटल में जहाँ शाम ही से अँधेरा हो जाता है, जिस हिस्से में फ़ैशनेबुल लोग आना ही गुनाह समझते हैं और जहाँ जुआ, शराब-खोरी
कहानी – बेटोंवाली विधवा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 पंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की
कहानी – बड़े भाई साहब – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था; लेकिन तालीम जैसे
कहानी – शांति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 स्वर्गीय देवनाथ मेरे अभिन्न मित्रों में थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो वह रंगरेलियाँ आँखों में फिर जाती हैं, और कहीं एकांत में जाकर जरा देर रो
कहानी – पाप का अग्निकुंड – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 कुँवर पृथ्वीसिंह महाराज यशवंतसिंह के पुत्र थे। रूप गुण और विद्या में प्रसिद्ध थे। ईरान मिò श्याम आदि देशों में परिभ्रमण कर चुके थे और कई भाषाओं के पंडित समझे
कहानी – प्रायश्चित – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 दफ्तर में जरा देर से आना अफसरों की शान है। जितना ही बड़ा अधिकारी होता है, उत्तरी ही देर में आता है; और उतने ही सबेरे जाता भी है। चपरासी
कहानी – यह मेरी मातृभूमि है – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 8, 2021April 15, 2015 आज पूरे 60 वर्ष के बाद मुझे मातृभूमि-प्यारी मातृभूमि के दर्शन प्राप्त हुए हैं। जिस समय मैं अपने प्यारे देश से विदा हुआ था और भाग्य मुझे पश्चिम की ओर
कहानी – पंचतन्त्र – पढ़े-लिखे मूर्ख March 8, 2021April 15, 2015 किसी नगर में चार ब्राह्मण रहते थे। उनमें खासा मेल-जोल था। बचपन में ही उनके मन में आया कि कहीं चलकर पढ़ाई की जाए। अगले दिन वे पढ़ने के लिए
बाल कहानिया – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) March 8, 2021April 15, 2015 एक गधा लकड़ी का भारी बोझ लिए जा रहा था। वह एक दलदल में गिर गया। वहाँ मेढकों के बीच जा लगा। रेंकता और चिल्लाता हुआ वह उस तरह साँसें