कहानी – शेख़ मख़मूर – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मुल्के जन्नतनिशाँ के इतिहास में बहुत अँधेरा वक़्त था जब शाह किशवर की फ़तहों की बाढ़ बड़े ज़ोर-शोर के साथ उस पर आयी। सारा देश तबाह हो गया। आज़ादी की

कहानी – लेखक – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

प्रात:काल महाशय प्रवीण ने बीस दफा उबाली हुई चाय का प्याला तैयार किया और बिना शक्कर और दूध के पी गये। यही उनका नाश्ता था। महीनों से मीठी, दूधिया चाय

कहानी – होली का उपहार – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मैकूलाल अमरकान्त के घर शतरंज खेलने आये, तो देखा, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहे हैं। पूछा-कहीं बाहर की तैयारी कर रहे हो क्या भाई? फुरसत हो, तो

कहानी – ईदगाह – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ

कहानी – सांसारिक प्रेम और देश प्रेम – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

शहर लन्दन के एक पुराने टूटे-फूटे होटल में जहाँ शाम ही से अँधेरा हो जाता है, जिस हिस्से में फ़ैशनेबुल लोग आना ही गुनाह समझते हैं और जहाँ जुआ, शराब-खोरी

कहानी – बेटोंवाली विधवा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की

कहानी – बड़े भाई साहब – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था; लेकिन तालीम जैसे

कहानी – शांति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

स्वर्गीय देवनाथ मेरे अभिन्न मित्रों में थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो वह रंगरेलियाँ आँखों में फिर जाती हैं, और कहीं एकांत में जाकर जरा देर रो

कहानी – पाप का अग्निकुंड – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कुँवर पृथ्वीसिंह महाराज यशवंतसिंह के पुत्र थे। रूप गुण और विद्या में प्रसिद्ध थे। ईरान मिò श्याम आदि देशों में परिभ्रमण कर चुके थे और कई भाषाओं के पंडित समझे

कहानी – यह मेरी मातृभूमि है – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

आज पूरे 60 वर्ष के बाद मुझे मातृभूमि-प्यारी मातृभूमि के दर्शन प्राप्त हुए हैं। जिस समय मैं अपने प्यारे देश से विदा हुआ था और भाग्य मुझे पश्चिम की ओर

कहानी – पंचतन्त्र – पढ़े-लिखे मूर्ख

किसी नगर में चार ब्राह्मण रहते थे। उनमें खासा मेल-जोल था। बचपन में ही उनके मन में आया कि कहीं चलकर पढ़ाई की जाए। अगले दिन वे पढ़ने के लिए

कहानी – शाप – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मैं बर्लिन नगर का निवासी हूँ। मेरे पूज्य पिता भौतिक विज्ञान के सुविख्यात ज्ञाता थे। भौगोलिक अन्वेषण का शौक मुझे भी बाल्यावस्था ही से था। उनके स्वर्गवास के बाद मुझे

कहानी – पंचतन्त्र – नीति अनीति

एक गाँव में द्रोण नाम का एक ब्राह्मण रहता था। भीख माँगकर उसकी जीविका चलती थी। उसके पास पर्याप्त वस्त्र भी नहीं थे। उसकी दाढ़ी और नाखून बढ़े रहते थे।