कहानी – परीक्षा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जब रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हुए तो परमात्मा की याद आयी। जा कर महाराज से विनय की कि दीनबंधु ! दास ने श्रीमान् की सेवा चालीस साल

कहानी – ममता – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

बाबू रामरक्षादास दिल्ली के एक ऐश्वर्यशाली खत्री थे, बहुत ही ठाठ-बाट से रहनेवाले। बड़े-बड़े अमीर उनके यहाँ नित्य आते-आते थे। वे आयें हुओं का आदर-सत्कार ऐसे अच्छे ढंग से करते

कहानी – मृत्यु के पीछे – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

बाबू ईश्वरचंद्र को समाचारपत्रों में लेख लिखने की चाट उन्हीं दिनों पड़ी जब वे विद्याभ्यास कर रहे थे। नित्य नये विषयों की चिंता में लीन रहते। पत्रों में अपना नाम

कहानी – नमक का दारोगा- (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ,

लेख – घृणा का स्थान – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

निंदा, क्रोध और घृणा ये सभी दुर्गुण हैं, लेकिन मानव जीवन में से अगर इन दुर्गुणों को निकल दीजिए, तो संसार नरक हो जायेगा। यह निंदा का ही भय है,

लेख – रामचर्चा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

जन्म प्यारे बच्चो! तुमने विजयदशमी का मेला तो देखा ही होगा। कहींकहीं इसे रामलीला का मेला भी कहते हैं। इस मेले में तुमने मिट्टी या पीतल के बन्दरों और भालुओं

लेख – “सोना हिरनी ” (लेखिका – महादेवी वर्मा)

सोना की आज अचानक स्मृति हो आने का कारण है। मेरे परिचित स्वर्गीय डाक्टर धीरेन्द्र नाथ वसु की पौत्री सस्मिता ने लिखा है : ‘गत वर्ष अपने पड़ोसी से मुझे

कहानी – स्त्री सुबोधिनी (लेखिका – मन्नू भंडारी)

प्यारी बहनो, न तो मैं कोई विचारक हूँ, न प्रचारक, न लेखक, न शिक्षक। मैं तो एक बड़ी मामूली-सी नौकरीपेशा घरेलू औरत हूँ, जो अपनी उम्र के बयालीस साल पार

कहानी – चारा काटने की मशीन (लेखक – उपेंद्रनाथ अश्क)

जब मैं जाडों में लिहाफ ओढती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया

कहानी – हाथी की फाँसी (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

कुछ दिन से नवाब साहब के मुसाहिबों को कुछ हाथ मारने का नया अवसर नही मिला था। नवाब साहब थे पुराने ढंग के रईस। राज्‍य तो बाप-दादे खो चुके थे,

कहानी – डाची (लेखक – उपेंद्रनाथ अश्क)

काट (काट – दस-बीस सिरकियों के खैमों का छोटा-सा गाँव) ‘पी सिकंदर’ के मुसलमान जाट बाकर को अपने माल की ओर लालचभरी निगाहों से तकते देख कर चौधरी नंदू वृक्ष

लेख – प्रताप की नीति (लेखक – गणेशशंकर विद्यार्थी)

आज अपने हृदय में नयी-नयी आशाओं को धारण करके और अपने उद्देश्‍य पर पूर्ण विश्‍वास रखकर ‘प्रताप’ कर्मक्षेत्र में आता है। समस्‍त मानव जाति का कल्‍याण हमारा परमोद्देश्‍य है और

कहानी – जादुई किताब (लेखक – हीरालाल नागर)

राजकुमार खमवास सेतना सम्राट यूसेर मातरा के पुत्र थे। वह अपना अधिकांश समय पुरातात्विक भाषा, जादू-टोने और अतिप्राचीन वस्तुओं के संग्रह में लगाते थे। एक दिन उन्हें पता चला कि