ग्रंथावली के प्रस्तुत (चौथे) खंड में ‘हरिऔधा’ के खड़ीबोली के स्फुट काव्य को शामिल किया गया है। इसके पहले तीन खंड भी कविता से सम्बध्द हैं, जिसमें ‘हरिऔधा’ के ब्रजभाषा-काव्य,
मेरे एक मित्र हैं, बड़े विद्वान, स्पष्टवादी और नीतिमान। वह इस राज्य के बहुत प्रतिष्ठित नागरिक हैं। उनसे मिलने से सदा नई स्फूर्ति मिलती है। यद्यपि वह अवस्था में मुझसे
जहाँ बैठके यह लेख लिख रहा हूँ उसके आगे पीछे, दाएँ-बाएँ, शिरीष के अनेक पेड़ हैं। जेठ की जलती धूप में, जबकि धरित्री निधूर्म अग्निकुंड बनी हुई थी, शिरीष नीचे