{This article is English version of previously published article titled – सावधान, पृथ्वी के खम्भों का कांपना बढ़ता जा रहा है which was published on 26th December 2015 on “Svyam
आज हठयोग (अष्टांग योग) के कुछ अभ्यासों (जैसे- आसन, प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान आदि) के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो लगभग सभी को है लेकिन राजयोग की एक परम शक्तिशाली
{नोट- पहली कविता “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए एक आदरणीय स्वयं सेवक द्वारा रचित है ! पहली कविता के अंत में प्रकाशित दूसरी कविता श्री देवयानी जी की
(विशेष अवसर पर गोलोक वासी ऋषि सत्ता की अत्यंत दयामयी कृपा से प्राप्त आपबीती दुर्लभ अनुभव का अंश विवरण)- मेरे अपने पार्थिव देह को छोड़ने अर्थात मृत्यु के बाद जब
{नीचे सर्वप्रथम श्री परमहंस योगानंद की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक “एक योगी की आत्मकथा” (जो फिलोसौफिकल लायब्रेरी न्यूयार्क के 1946 मूल संस्करण का पुनर्मुद्रण है) के पेज नम्बर 431 और 513
मुख्यतः भक्ति योग में शीघ्र सफलता प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले आदरणीय जिज्ञासुओं के लिए यह लेख प्रस्तुत है ! इसमें सबसे पहली बात यह समझने की जरूरत है
लम्बे समय से ब्रह्मांड से सम्बंधित सभी पहलुओं पर रिसर्च करने वाले, “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए विद्वान रिसर्चर श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय (Doctor Saurabh Upadhyay) के निजी
{This article is English version of previously published article titled – जिसे हम उल्कापिंड समझ रहें हैं, वह कुछ और भी तो हो सकता है which was published on 30th
अब आधुनिक वेरी इम्मेच्योर साइंस के वैज्ञानिक व चिकित्सक भी अनंत वर्ष पुराने परम आदरणीय हिन्दू धर्म की सभी बातों की तरह, इस बात को भी स्वीकारने लगे हैं कि