उपन्यास – प्रतिज्ञा – 6 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 लाला बदरीप्रसाद के लिए अमृतराय से अब कोई संसर्ग रखना असंभव था, विवाह तो दूसरी बात थी। समाज में इतने घोर अनाचार का पक्ष ले कर अमृतराय ने अपने को
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 7 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 लाला बदरीप्रसाद को दाननाथ का पत्र क्या मिला आघात के साथ ही अपमान भी मिला। वह अमृतराय की लिखावट पहचानते थे। उस पत्र की सारी नम्रता, विनय और प्रण, उस
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 8 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 वैशाख में प्रेमा का विवाह दाननाथ के साथ हो गया। शादी बड़ी धूम-धाम से हुई। सारे शहर के रईसों को निमंत्रित किया। लाला बदरीप्रसाद ने दोनों हाथों से रुपए लुटाए।
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 9 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 साड़ियाँ लौटा कर और कमलाप्रसाद को अप्रसन्न करके भी पूर्णा का मनोरथ पूरा न हो सका। वह उस संदेह को जरा भी न दूर कर सकी, जो सुमित्रा के हृदय
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 10 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 आदर्श हिंदू-बालिका की भाँति प्रेमा पति के घर आ कर पति की हो गई थी। अब अमृतराय उसके लिए केवल एक स्वप्न की भाँति थे, जो उसने कभी देखा था।
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 11 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 पूर्णा प्रातःकाल और दिनों से आध घंटा पहले उठी। उसने दबे पाँव सुमित्रा के कमरे में कदम रखा। वह देखना चाहती थी कि सुमित्रा सोती है या जागती। शायद वह
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 12 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 पूर्णा कितना ही चाहती थी कि कमलाप्रसाद की ओर से अपना मन हटा ले, पर यह शंका उसके हृदय में समा गई थी कि कहीं इन्होंने सचमुच आत्म-हत्या कर ली
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 13 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 इस वक्त पूर्णा को अपनी उद्दंडता पर पश्चाताप हुआ। उसने अगर जरा धैर्य से काम लिया होता तो कमलाप्रसाद कभी ऐसी शरारत न करता। कौशल से काम निकल सकता था,
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 14 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते थे, उसी भाँति जिसका विरोध करते थे, उसे मिट्टी में मिला देना चाहते
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 15 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 दाननाथ यहाँ से चले, तो उनके जी में ऐसा आ रहा था कि इसी वक्त घर-बार छोड़ कर कहीं निकल जाऊँ! कमलाप्रसाद अपने साथ उन्हें भी ले डूबा था। जनता
उपन्यास – प्रतिज्ञा – 16 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 दाननाथ जब अमृतराय के बँगले के पास पहुँचे तो सहसा उनके कदम रुक गए, हाते के अंदर जाते हुए लज्जा आई। अमृतराय अपने मन में क्या कहेंगे? उन्हें यही खयाल
उपन्यास – प्रेमा – 1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 संध्या का समय है, डूबने वाले सूर्य की सुनहरी किरणें रंगीन शीशो की आड़ से, एक अंग्रेजी ढंग पर सजे हुए कमरे में झॉँक रही हैं जिससे सारा कमरा रंगीन
उपन्यास – प्रेमा – 2 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 होली का दिन आया। पंडित वसंत कुमार के लिए यह भंग पीने का दिन था। महीनों पहले से भंग मँगवा रखी थी। अपने मित्रों को भंग पीने का नेवता दे
उपन्यास – प्रेमा – 3 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 लाला बदरीप्रसाद को दाननाथ का पत्र क्या मिला आघात के साथ ही अपमान भी मिला। वह अमृतराय की लिखावट पहचानते थे। उस पत्र की सारी नम्रता, विनय और प्रण, उस
उपन्यास – प्रेमा – 4 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते थे, उसी भाँति जिसका विरोध करते थे, उसे मिट्टी में मिला देना चाहते
उपन्यास – मंगल सूत्र – 1 – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद) March 9, 2021April 15, 2015 बड़े बेटे संतकुमार को वकील बना कर, छोटे बेटे साधुकुमार को बी.ए. की डिग्री दिला कर और छोटी लड़की पंकजा के विवाह के लिए स्त्री के हाथों में पाँच हजार