लम्बे समय से ब्रह्मांड से सम्बंधित सभी पहलुओं पर रिसर्च करने वाले, “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए विद्वान रिसर्चर श्री डॉक्टर सौरभ उपाध्याय (Doctor Saurabh Upadhyay) के निजी
परम आदरणीय ऋषि सत्ता से प्राप्त जानकारी अनुसार;- मानव मन हमेशा भूखा रहता है और मानव मन का भोजन है “विचार (अर्थात सोचना)” ! इसीलिए सभी मानवों का मन अपनी
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, जैसा कि विदित है कि आपके परिवार “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान का “आर्गेनाइजेशनल प्रोफाइल” (Organizational Profile) संयुक्त राष्ट्र संघ के “आर्थिक एवं सामाजिक अफेयर्स
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, “वाटर एक्शन हब” (Water Action Hub), संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) द्वारा प्रायोजित एक ऐसा वैश्विक उपक्रम है जो जल की सुरक्षा से सम्बन्धित,
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, संयुक्त राष्ट्र संघ” (United Nations) द्वारा आगामी 5 जून 2019 को मनाये जाने वाले “विश्व पर्यावरण दिवस” के उपलक्ष्य में (जिसका आयोजन इस वर्ष
आप सभी आदरणीय पाठकों को प्रणाम, “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान बड़े हर्ष से आपको सूचित कर रहा है कि “स्वयं बनें गोपाल” संस्थान द्वारा निरंतर विश्व के सर्वोन्मुखी विकास के
वैसे तो पतंजलि योग शास्त्र व अन्य प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में “योग” की बहुत सी परिभाषाएं दी गई हैं लेकिन उन सभी परिभाषाओं के सारांश रूप को आसान भाषा में
{This article is English version of previously published article titled – वैज्ञानिकों के लिए अबूझ बनें हैं हमारे द्वारा प्रकाशित तथ्य which was published on 31st December 2017 on “Svyam
{This article is English version of previously published article titled – ऋषिसत्ता की आत्मकथा 1 पृथ्वी से गोलोक, गोलोक से पुनः पृथ्वी की आश्चर्यजनक यात्रा which was published on 27th
{This article is English version of previously published article titled – जानिये, मानवों के भेष में जन्म लेने वाले एलियंस को कैसे पहचाना जा सकता है which was published on
{This article is English version of previously published article titled – सावधान, पृथ्वी के खम्भों का कांपना बढ़ता जा रहा है which was published on 26th December 2015 on “Svyam
आज हठयोग (अष्टांग योग) के कुछ अभ्यासों (जैसे- आसन, प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान आदि) के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो लगभग सभी को है लेकिन राजयोग की एक परम शक्तिशाली
{नोट- पहली कविता “स्वयं बनें गोपाल” समूह से जुड़े हुए एक आदरणीय स्वयं सेवक द्वारा रचित है ! पहली कविता के अंत में प्रकाशित दूसरी कविता श्री देवयानी जी की