कहानी – पत्‍नी से पति – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मिस्टर सेठ को सभी हिन्दुस्तानी चीजों से नफरत थी और उनकी सुन्दरी पत्नी गोदावरी को सभी विदेशी चीजों से चिढ़! मगर धैर्य और विनय भारत की देवियों का आभूषण है।

लेख – भावना या कल्पना – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

आरंभ में ही हम काव्यानुशीलन को भावयोग कह आए हैं और उसे कर्मयोग और ज्ञानयोग के समकक्ष बता आए हैं। यहाँ पर अब यह कहने की आवश्यकता प्रतीत होती है

कहानी – मोटर के छींटे – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

क्या नाम कि… प्रात:काल स्नान-पूजा से निपट, तिलक लगा, पीताम्बर पहन, खड़ाऊँ पाँव में डाल, बगल में पत्रा दबा, हाथ में मोटा-सा शत्रु-मस्तक-भंजन ले एक जजमान के घर चला। विवाह

लेख – संबंधनिर्वाह – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

प्रबंधकाव्य में बड़ी भारी बात है संबंधनिर्वाह। माघ ने कहा है – बह्वपि स्वेच्छया कामं प्रकीर्णमभिधीयते।   अनुज्झितार्थसंबंधा: प्रबन्धो दुरुदाहर:॥   जायसी का संबंधनिर्वाह अच्छा है। एक प्रसंग से दूसरे

कहानी – जेल – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

मृदुला मैजिस्ट्रेट के इजलास से ज़नाने जेल में वापस आयी, तो उसका मुख प्रसन्न था। बरी हो जाने की गुलाबी आशा उसके कपोलों पर चमक रही थी। उसे देखते ही

लेख – जायसी का रहस्यवाद – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

सूफियों के अद्वैतवाद का जो विचार पूर्वप्रकरण में हुआ था उससे यह स्पष्ट हो गया कि किस प्रकार आर्य जाति (भारतीय और यूनानी) के तत्त्वचिंतकों द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत को

कहानी – दुराशा (प्रहसन) – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

पात्र दयाशंकर -कार्यालय के एक साधारण लेखक   आनंदमोहन -कालेज का एक विद्यार्थी तथा दयाशंकर का मित्र   ज्योतिस्वरूप -दयाशंकर का एक सुदूर-सम्बन्धी   सेवती -दयाशंकर की पत्नी   [होली

लेख – जायसी की भाषा – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

जायसी की भाषा ठेठ अवधी है और पूरबी हिंदी के अंतर्गत है। इससे उसमें ब्रजभाषा और खड़ी बोली दोनों से कई बातों में विभिन्नता है। जायसी को अच्छी तरह समझने

कहानी – मैकू – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

कादिर और मैकू ताड़ीखाने के सामने पहुँचे, तो वहाँ कांग्रेस के वालंटियर झंडा लिये खड़े नजर आये। दरवाजे के इधर-उधर हजारों दर्शक खड़े थे। शाम का वक्त था। इस वक्त

लेख – काव्य की साधना- (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों को लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलाता और कहीं लड़ाता हुआ अंत तक चला चलता है और इसी

कहानी – समर-यात्रा – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

आज सवेरे ही से गाँव में हलचल मची हुई थी। कच्ची झोंपड़ियाँ हँसती हुई जान पड़ती थीं। आज सत्याग्रहियों का जत्था गाँव में आयेगा। कोदई चौधरी के द्वार पर चँदोवा

लेख – संक्षिप्त समीक्षा – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

अब तक जो कुछ लिखा गया उसमें जायसी की इन विशेषताओं और गुणों की ओर मुख्यत: ध्यान गया होगा – (1) विशुद्ध प्रेममार्ग का विस्तृत प्रत्यक्षीकरण – लौकिक प्रेमपथ के

लेख – परिशिष्ट : मलिक मुहम्मद जायसी – (लेखक – रामचंद्र शुक्ल )

ये प्रसिद्ध सूफी फकीर शेख मोहिदी (मुहीउद्दीन) के शिष्य थे और जायस में रहते थे। इनकी एक छोटी सी पुस्तक ‘आखिरी कलाम’ के नाम से फारसी अक्षरों में छपी मिलती

कहानी – बैंक का दिवाला – (लेखक – मुंशी प्रेमचंद)

लखनऊ नेशनल बैंक के दफ्तर में लाला साईंदास आरामकुर्सी पर लेटे हुए शेयरों का भाव देख रहे थे और सोच रहे थे कि इस बार हिस्सेदारों को मुनाफा कहाँ से